भारतीय किसान संघ बैराड़ ने किसानों की मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन | BAIRAD NEWS

शिवपुरी। भारतीय किसान संघ म.प्र. द्वारा अनाधिकृत जीएम/एचटीबीटी बीजों के खिलाफ व बीज किसान का अधिकार है नाम से संसद मे बिल लाकर कानून बनाने की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ जिलाध्यक्ष कल्याण सिंह यादव (बंटी) के नेतृत्व में किसान संघ ने तहसील मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन कर प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

जिसमें भारतीय किसान संघ तहसील बैराड़ के सभी पदाधिकारी व अन्नदाता किसान बंधु शामिल हुए। इस अवसर पर तहसील अध्यक्ष बृजेश धाकड़(कल्ले भैया),उपाध्यक्ष वाइसराम वर्मा, वीरेंद्र यादव भोराना, गणेश धाकड़, योगेश वर्मा, बीरेन्दर धाकड़ ऊंची बरोद, रमेश सिंह यादव पूर्व जनपद उपाध्यक्ष भोराना, परशुराम पटेल पटेवरी, मातादीन रायपुर, जगदीश आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

किसान संघ बैराड़ तहसील अध्यक्ष बृजेश धाकड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय किसान संघ समय समय पर किसानों के हित मे पूर्ण रूप से प्रयासरत रहता है अगर संघ की मांगो पर शीघ्र कार्रवाई कर निराकरण नही किया गया तो किसान समाज व किसान संघ आंदोलन करेगा। जिसका जिम्मेदार प्रशासन होगी।

यह है किसानों की मांगे

किसानों को लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिया जावे। शासन द्वारा घोषित समर्थन मूल्य कृषि उपज पर खरीदी सुनिश्चित की जावे। फ सल बीमा योजना किसान हित में बनाई जावे। पिछले वर्ष की धान एवं सोयाबीन बिक्री की 500 प्रोत्साहन राशि तुरंत दी जावे। शासन द्वारा घोषित 200000 तक की कर्ज माफी सभी किसानों की तुरंत की जावे।

शासन द्वारा समर्थन मूल की गई गेहूं की खरीदी पर 160 बोनस राशि तुरंत दी जावे। मध्य भारत प्रांत के समस्त स्वीकृत एवं प्रस्तावित सिंचाई डेमों का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जावे। गर्मी की उड़द मूंग की खरीदी तुरंत चालू की जाए। खसरा बी1 के रेट कम किए जाए। स्थाई कृषि पंप के लिए अनुदान योजना को यथावत रखी जाए।

सहकारी समितियों द्वारा किसानों को ऋण मान के अनुसार ऋण नहीं दिया जाता परंतु बीमा योजना में बीमा की राशि ऋणमान के अनुसार काटी जाती है जितना रिड उतनी बीमा प्रीमियम काटा जावे।

तहसील बैराड़ के ग्राम पंचायत एवं नगर परिषद में गौशाला बनाई जाए। तहसील बैराड़ क्षेत्र में पोती नामांतरण बटवारे की किसान समस्या पटवारी द्वारा बिना आवेदन के मौके पर हल कराई जावे जिससे किसानों को तहसील के बार.बार चक्कर न लगाने पड़ें इस स्थिति में किसान बहुत ही परेशान है दाखिला खारिज के लिए तहसील में फाइल बनाई जाती है इसमें किसानों का शोषण किया जाता है।