Ads 720 x 90

पूर्व विधायक के 3 अवैध डंपर पकड़े, प्रेशर आया तो छोड़ दिए | SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। संरक्षित वन क्षेत्र शिवपुरी में रेत का अवैध परिवहन करते हुए बीते रोज दो डम्परों को वन विभाग की टीम द्वारा पकड़ा गया। इन डम्पर चालकों के पास खनिज विभाग द्वारा दी जाने वाली रॉयल्टी की रसीदें भी उपलब्ध नहीं थी। तीन घंटे तक डम्परों को वन विभाग की टीम द्वारा रोके रखा गया।  दबंग राजनैतिज्ञों का दवाब पडऩे के उपरांत वन विभाग की टीम द्वारा उन पर हल्की फुल्की कार्यवाही कर उन्हें छोड़ दिया गया। वन विभाग की टीम द्वारा पकड़े गए उक्त डम्पर पूर्व विधायक के भाई का होना बताया गया हैं। 

वन विभाग को वनों की तथा खनिज विभाग को शासकीय संपदा की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया हैं लेकिन वन विभाग तथा खनिज विभाग के आला अधिकारी से लेकर छोटे कर्मचारी तक शासन को चूना लगाने पर अमादा हैं ऐसी स्थिति में वन संपदा व खनिज संपदा कैसे सुरक्षित रह पाएगी। हालात यह बन चुके हैं कि उक्त विभागों के कर्मचारियों द्वारा अवैध रूप से उत्खनन करने वाले वन माफिया तथा खनिज माफियाओं को खुला संरक्षण  दे रखा हैं। जिसकी बजह से इन लोगों के हौंसले बुलंद बने हुए हैं। विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही एवं उपेक्षा पूर्ण रवैये के चलते शासन को करोड़ों रूपया प्रतिमाह की आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही हैं।

रॉयल्टी थी तो डम्फर पकड़े क्यों?

संरक्षित वन क्षेत्र से अवैध रूप से रेत का उत्खनन कर परिवहन करते हुए वन विभाग की टीम ने झांसी रोड़ पर गत दिवस ओवर लोड दो डम्फरों को पकड़ा गया। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस समय वन विभाग की टीम ने डम्परों को पकड़ा था तब वाहन चालक के पास कोई रॉयल्टी नहीं थी। चालक द्वारा अपने आकाओं को तत्काल फोन लगाकर डम्पर पकड़े जाने की सूचना दी गई।

लगभग आधा घंटे में रॉयल्टी बनकर आ गई। नियमानुसार एक डम्पर में अधिकतम 10 घन मीटर रेत का परिवहन किया जा सकता हैं, लेकिन जो रॉयल्टी आई वह 12 घन मीटर की थी। सवाल उठता हैं कि जब डम्पर चालक के पास रॉयल्टी थी तो डम्फर पकडक़र क्यों खड़े किए? साथ ही डम्परों ओवर लोड होने पर उनके विरूद्ध कार्यवाही क्यों नहीं की गई? जिससे यह साफ जाहिर होता है कि वन विभाग व खनिज विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों की मिली भगत से संरक्षित वन क्षेत्र में रेत का अवैध उत्खन्न धड़ल्ले से जारी हैं और जारी रहेगा?  

ऊपर से आया फोन और छूट गए डम्फर

जब डीएफओ उडऩदस्ते ने पूर्व विधायक के विश्वसनीय चालक के नाम डम्पर क्र. 1967 को पकड़ा गया तो डम्पर चालक के आका द्वारा ऊपर फोन किया गया। ऊपर से वन विभाग के जिला अधिकारी को फ़ोन किया और  फ़ोन के बाद अधिकारी के निर्देश से उडऩदस्ता प्रभारी द्वारा तत्काल डम्पर को छोडऩा पड़ा इतना ही नहीं वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी डम्पर पकडऩे के लिए डांट भी खानी पड़ी।