बडा सवाल: प्रिंट मिडिया या प्रिंट माफिया, ऐसी पत्रकारता तो शहर हित में नही हो सकती | Shivpuri News

एक्सरे @ ललित मुदगल/शिवपुरी। आज भोपाल से प्रकाशित एक न्यूज पेपर ने शिवुपरी के जमीनो के मामले को लेकर एक खबर का प्रकाशन किया। अगर इस खबर की माने तो शहर के नजदीक ही विनेगा के पास स्थित भारत सरकार के अनुबंधता से 500 करोड की लगात से बन रहे सौर उर्जा प्लांट की जमीन के क्रय प्रक्रिया में गडबडी हुई हैं। इस खबर की शिवपुरी  समाचार डॉट कॉम ने जानकारी ली तो यह निर्णय निकाला कि ऐसी बिना तथ्यो वाली खबरो के प्रकाशन से शिवपुरी का विकास अवरूद्ध होता है, और यह पत्रकारता शहर हित में नही होगी। आईए इस पूरे मामले का एक्सरे करते हैं।

राज एक्सप्रेस की इस खबर में लिखा गया हैं शिवपुरी के पास ग्राम चंदनपुरा विनेगा में स्थित पटवारी हल्का क्रंमाक 37 में सर्वे नंबर 1225 का क्रय मप्र सिंलिंग अधियनियम से लेकर भू राजस्व संहिता की जमकर धज्जिया उडाई गई हैं। इस खबर में यह नही बताया गया है कि सर्वे नंबर 1225 के क्रय में मप्र सीलिंग अधिनियम और भू राजस्व की कैसे धज्जिया उडाई गई है। विद्वान पत्रकार ने यह नहीं बताया कि ऐसा क्या हो गया जो मप्र सीलिंग अधिनियम और भू राजस्व की धज्ज्यिां ही उड़ गईं। 

इस जमीन पर भारत सरकार से स्वीकृत 500 करोड की लागत से सौर उर्जा से बिजली बनाने का प्लांट लगाया जा रहा हैंं। इस प्लांट के अस्तिव में आते ही शिवपुरी के विकास के मार्ग खुलेंगें, शहर के करीब 2500 लोगो की नौकरी इस प्लांट में लगने का अनुमान हैं। इस प्रोजेक्ट लिए भारत सरकार और इस प्रोजेक्ट को लगाने वाली कंपनी के अनुबंध के तहत ही इसे लगाया जा रहा है।

जानकारी जुटाई गई तो पता चला जिस सर्वे क्रंमाक 1225 का उल्लेख किया गया हैं वह चंदनपुर विनेगा में नही चिटौरा में आता हैं। इस प्लांट का निर्माण देश की विख्यात कंपनी ग्रिनको ओर टाटा सौलर इंनर्जी मिलकर कर रही हैं,इस प्लांट को कंपनी के बैंको द्धारा मदद की जा रही हैं।

जिस भूमि का जिक्र किया जा रहा हैं वह मुढेरी निवासी राजा कोमल सिंह की पुस्तैनी भूमि हैं ओर उनके पुत्र देवेन्द्र सिंह ने शहर के अन्य लोगो को विक्रय किया था। शहर के कई सारे लोगो से सूरज रिन्यूएवल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड डारेक्टर, सुनील पुत्र आमेप्रकाश वीरा निवासी जयपुर राजस्थान ने क्रय की हैं।

इस खबर को लेकर कई सवाल खडे हो रहे है कि जब कंपनी ने इन गांवो में लगभग 497 बीघा जमीन क्रय की है तो वह आदिवासियो की जमीन क्यो खरीदेगी। दूसरा जब 500 करोड का  प्रोजेक्ट भारत सरकार की अनुबंधता से लग रहा है बैंक फायनैस किया जा रहा है तो बैंक लेंड की पिछली 5 रजिष्ट्री चैक करती हैं। अगर खबर को सत्य माने की यह लैंड गडबड है तो बैंक ने प्रोजेक्ट फायनैंस कैसे कर दिया।

खबर में यह भी लिखा गया है कि उक्त सर्वे 1225 क्रंमाक का डायवर्सन नही है। जानकारी मिली हैं कि शिवपुरी एसडीएम आफिस से पत्र क्रमांक 40-2018-19 अ-2 से इस भूमि का औद्योगिक परिवर्तन डायवर्सन किया गया है। कुल मिलाकर बिना तथ्यों के खबर के प्रकाशन से शिवपुरी के विकास अवरूद्ध करने की कोशिश की जा रही है।

इस तरह की खबरों से प्रोजेक्ट विवादित हो जाता है, उसके पूरा होने में देरी होती है और ऐसे विवादो को देखकर जो कंपनियो शिवपुरी जैसे शहर में अपने प्रोजेक्ट लगाने की तैयारी कर रही है वे अपने कदम वापस खींच सकती हैं। इससे शहर को नुकसान होगा। मीडिया का दायित्व होता हैं की खबरे ऐसी लगाई जाए जो शहर हित में हो न की शहर का विकास अवरुद्ध हो जाए।

शिवपुरी जैसे बेराजगारी वाले शहर में ऐसे कई प्रोजेक्टों की आवश्यकता हैं, जो शहर के बेराजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध कराए। राज एक्सप्रेस जैसे अखबार ने यह खबर बिना तथ्यों को जाने क्यों प्रकाशन किया गया समझ से परे है, क्या इस खबर में प्रकाशित नामों पर कोई दबाब बनाने के लिए इस खबर का प्रकाशन किया गया। यह खबर किस प्रकार समाज हित और शिवपुरी के हित में है यह आप स्वयं ही पढकर अंदाजा जाएगा। ।

यह है प्रिंट मिडिया द्धारा प्रकाशित खबर