करैरा। करैरा में जमीनो की रिकॉर्ड मे किस प्रकार की हेराफेरी की जा रही है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हमारे सामने आया है। करैरा तहसील हल्के के पटवारी और तहसील के बाबू ने मिलकर एक विक्रय से वर्जित जमीन के सरकारी रिकॉर्ड में प्रतिबंधित शब्द को विलोपित कर दिया,इसके बाद इस जमीन को 2 बार बेचा गया,लेकिन दूसरी बार जमीन के विक्रय पर नामांतरण नहीं हुआ तो यह मामला उजागर हो गया।
जानकारी के मुताबिक कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने शुक्रवार को करैरा तहसील के सेमरा हल्का पटवारी बृजेश यादव और लोकेंद्र श्रीवास्तव, सहायक ग्रेड-3 (प्रवाचक), को निलंबित कर दिया। जमीनों के फर्जीवाड़े करने वाले बाबू व पटवारी दोनों को कलेक्ट्रेट मुख्यालय शिवपुरी अटैच कर दिया गया।
करैरा तत्कालीन बीएमओ डॉ. प्रदीप शर्मा की पत्नी श्वेता शर्मा ने जरगवां अब्बल गांव में वर्ष 2025 में दिनारा के मंगल सरपंच से चार बीघा जमीन खरीदी थी, जिसका विधिवत नामांतरण भी उनके नाम पर हुआ था। बाद में 13 फरवरी 2025 को उन्होंने यह जमीन उमेश पुत्र चतुर्भुज गुप्ता निवासी दिनारा को बेच दी। रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए करैरा तहसील कार्यालय में फाइल पहुंची। पहले नामांतरण रोककर रखा गया। बाद में जमीन को विक्रय से वर्जित बताकर नामांतरण निरस्त कर दिया गया।
दिनारा के व्यापारी ने बीएमओ की पत्नी श्वेता शर्मा के खिलाफ करैरा थाने में एफआईआर दर्ज करा दी। श्वेता शर्मा ने मामले की कलेक्टर से शिकायत की। कलेक्टर चौधरी ने डिप्टी कलेक्टर शिवदयाल धाकड़ को जांच सौंपी। जांच में पटवारी बृजेश यादव और बाबू लोकेंद्र श्रीवास्तव प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए। इसी आधार पर कलेक्टर ने उन्हें निलंबित कर दिया।