शिवपुरी। शिव की नगरी शिवपुरी में श्रीराम नवमी की पूर्व संध्या पर शिवपुरी के प्रसिद्ध खेड़ापति हनुमान मंदिर परिवार ने 11 कन्याओ का नि:शुल्क विवाह वैदिक रीति रिवाज से संपन्न कराया। इस विवाह आयोजन में सबसे खास बात यह थी कि सात समंदर पार से आए विदेशी मेहमानों ने हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों मे एक विवाह संस्कार के सात वचनो को संत के समागम किया। इस आयोजन मे जहां समिति सहित खेड़ापति सरकार के भक्त और 11 वधु पक्ष और 11 वर पक्ष सहित तमाम मेहमान शामिल हुए वह इस कार्यक्रम में 2 दर्जन विदेशी सनातन प्रेमी विदेशी महिलाओं ने हिंदू धर्म की विवाह पद्धति और संस्कारों को बारीकी से देखा और शादी के तमाम रस्मो मे कई रस्मों को अदा किया जिसमे से प्रमुख था कन्या दान से पूर्व होने वाले कन्या के पांव पखारने' की रस्म में हिस्सा लिया
खेडापति सरकार के महामंडलेश्वर श्री नीलमणि महाराज के साधिन्य मे हुए 11 कन्याओ का विवाह बीते रोज संपन्न हुआ। यह एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं और दिल जीत लिया। एक ही मंडप के नीचे 11 जोड़े अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरों के बंधन में बंध गए। यह आयोजन उन बेटियों के लिए था, जिनके सिर से पिता का साया उठ चुका था। इस पुनीत कार्य में खेड़ापति दरबार की टीम ने अभिभावक की भूमिका निभाते हुए बेटियों के हाथ पीले किए।
सात फेरे और मर्यादा का पाठ
महामंडलेश्वर नीलमणि महाराज और मुख्य पुजारी मोहनदास महाराज के सानिध्य में संपन्न हुए इस विवाह में संस्कारों पर विशेष जोर दिया गया। नवदंपतियों को गृहस्थी के सामान के साथ श्रीरामचरितमानस की प्रति भेंट की गई। इसके पीछे का उद्देश्य यह है कि वर भगवान राम के मर्यादित आचरण को अपनाएं और वधू माता सीता के पदचिन्हों पर चलकर सुखी परिवार का निर्माण करें।
सात समंदर पार से आए मेहमान बने बाराती
इस विवाह का सबसे आकर्षक का सबसे अधिक आकर्षण का केन्द्र विदेशी मेहमान रहे। इस शादी समारोह मे यूक्रेन की निवासी और पिछले 5 साल से वृंदावन मे निवास कर रही विदेशी मूल की सनातन धर्म मे आस्था रखने वाली स्वामिनी कृष्णा प्रिया राधा जी ने बताया कि हिंदू धर्म के इस विवाह समारोह मे सभी रस्मो का एक अर्थ होता है। खासकर अग्नि के समक्ष लिए सात फेरो के समय सात वचनो का,हमने कुवांरी कन्याओं के पैर पखारे,विवाह समारोह से पूर्व इन कन्याओं की शादी से पूर्व आयोजित होने वाली रस्मे जैसे हल्दी और मेहंदी मे भाग लिया था।
यूक्रेन से आई इंग्लिश टीचर ईलोना और उनके साथी रहे। पारंपरिक भारतीय परिधानों में सजे इन विदेशी मेहमानों ने न केवल बारात में जमकर नृत्य किया, बल्कि भारतीय रस्मों को गौर से देखा। ईलोना ने पांव पखारने की रस्म में हिस्सा लिया और कहा, भारतीय शादियां सिखाती हैं कि विश्वास और संस्कार ही रिश्तों की असली नींव हैं। दाल-बाटी का स्वाद और सात फेरों की पवित्रता अद्भुत है।
टूटे सपनों को मिली नई उड़ान
नंदनी और राजेंद्र: नंदनी के पिता का निधन कैंसर से हो गया था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार शादी के खर्च से डरा हुआ था, लेकिन खेड़ापति समिति ने जिम्मेदारी उठाकर इस परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी।
अंजली और महेंद्र: बचपन में पिता को खो चुकी अंजली का सपना था कि उसकी शादी धूमधाम से हो। खेड़ापति सरकार ने अंजली के पिता की कमी को पूरा करते हुए उसे गरिमामय विदाई दी,वही इस आयोजन में पूरा शहर के ने इन कन्याओं का साथ दिया। इन वधुओ मे एक सोनम राठौर ने बताया कि हमारे पिता अगर घर से शादी करते तो शायद इतना दहेज नहीं दे सकते थे। नीलमणि महाराज ने जो व्यवस्था की है वह बहुत ही अच्छी है,इस शादी समारोह मे कन्याओं को दहेज मे पलंग,कूलर,बर्तन,रसोई गैस सहित सोने के जेवरात दिए गए थे।
खेडापति सरकार के महामंडलेश्वर श्री नीलमणि महाराज के साधिन्य मे हुए 11 कन्याओ का विवाह बीते रोज संपन्न हुआ। यह एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं और दिल जीत लिया। एक ही मंडप के नीचे 11 जोड़े अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरों के बंधन में बंध गए। यह आयोजन उन बेटियों के लिए था, जिनके सिर से पिता का साया उठ चुका था। इस पुनीत कार्य में खेड़ापति दरबार की टीम ने अभिभावक की भूमिका निभाते हुए बेटियों के हाथ पीले किए।
सात फेरे और मर्यादा का पाठ
महामंडलेश्वर नीलमणि महाराज और मुख्य पुजारी मोहनदास महाराज के सानिध्य में संपन्न हुए इस विवाह में संस्कारों पर विशेष जोर दिया गया। नवदंपतियों को गृहस्थी के सामान के साथ श्रीरामचरितमानस की प्रति भेंट की गई। इसके पीछे का उद्देश्य यह है कि वर भगवान राम के मर्यादित आचरण को अपनाएं और वधू माता सीता के पदचिन्हों पर चलकर सुखी परिवार का निर्माण करें।
सात समंदर पार से आए मेहमान बने बाराती
इस विवाह का सबसे आकर्षक का सबसे अधिक आकर्षण का केन्द्र विदेशी मेहमान रहे। इस शादी समारोह मे यूक्रेन की निवासी और पिछले 5 साल से वृंदावन मे निवास कर रही विदेशी मूल की सनातन धर्म मे आस्था रखने वाली स्वामिनी कृष्णा प्रिया राधा जी ने बताया कि हिंदू धर्म के इस विवाह समारोह मे सभी रस्मो का एक अर्थ होता है। खासकर अग्नि के समक्ष लिए सात फेरो के समय सात वचनो का,हमने कुवांरी कन्याओं के पैर पखारे,विवाह समारोह से पूर्व इन कन्याओं की शादी से पूर्व आयोजित होने वाली रस्मे जैसे हल्दी और मेहंदी मे भाग लिया था।
यूक्रेन से आई इंग्लिश टीचर ईलोना और उनके साथी रहे। पारंपरिक भारतीय परिधानों में सजे इन विदेशी मेहमानों ने न केवल बारात में जमकर नृत्य किया, बल्कि भारतीय रस्मों को गौर से देखा। ईलोना ने पांव पखारने की रस्म में हिस्सा लिया और कहा, भारतीय शादियां सिखाती हैं कि विश्वास और संस्कार ही रिश्तों की असली नींव हैं। दाल-बाटी का स्वाद और सात फेरों की पवित्रता अद्भुत है।
टूटे सपनों को मिली नई उड़ान
नंदनी और राजेंद्र: नंदनी के पिता का निधन कैंसर से हो गया था। आर्थिक तंगी के कारण परिवार शादी के खर्च से डरा हुआ था, लेकिन खेड़ापति समिति ने जिम्मेदारी उठाकर इस परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी।
अंजली और महेंद्र: बचपन में पिता को खो चुकी अंजली का सपना था कि उसकी शादी धूमधाम से हो। खेड़ापति सरकार ने अंजली के पिता की कमी को पूरा करते हुए उसे गरिमामय विदाई दी,वही इस आयोजन में पूरा शहर के ने इन कन्याओं का साथ दिया। इन वधुओ मे एक सोनम राठौर ने बताया कि हमारे पिता अगर घर से शादी करते तो शायद इतना दहेज नहीं दे सकते थे। नीलमणि महाराज ने जो व्यवस्था की है वह बहुत ही अच्छी है,इस शादी समारोह मे कन्याओं को दहेज मे पलंग,कूलर,बर्तन,रसोई गैस सहित सोने के जेवरात दिए गए थे।