कोलारस। कोलारस अनुभाग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यहाँ गरीबों को मिलने वाले राशन की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले कनिष्ठ खाद्य आपूर्ति अधिकारी गौरव कदम पर आंकड़ों की बाजीगरी और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगे हैं। पीओएस (POS) मशीन और ऑनलाइन प्रक्रिया, जिसे पारदर्शिता के लिए लागू किया गया था, अब भ्रष्टाचार का नया हथियार बन गई है।
रिश्वत की पुताई और डिजिटल वसूली
तिलातिली उचित मूल्य की दुकान के विक्रेता हरपाल जाटव ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि गौरव कदम ने स्टॉक शून्य करने के बदले न केवल नगद 20 हजार रुपये ऐंठे, बल्कि अपने सरकारी क्वार्टर की रंगाई-पुताई और अन्य घरेलू खर्च भी विक्रेता की जेब से करवाए।
भ्रष्टाचार का आलम यह है कि रिश्वत की राशि सीधे फोन-पे के जरिए अधिकारी के करीबियों और ऑपरेटरों के खातों में ट्रांसफर कराई गई। 11 सितंबर 2025 को ऑपरेटर इमरान खान के खाते में 2500 रुपये और फिर 26 दिसंबर को एक अन्य व्यक्ति के खाते में 5000 रुपये डलवाए गए। विडंबना देखिए कि सब कुछ लुटाने के बाद भी विक्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई, जबकि बड़े मगरमच्छो को संरक्षण दिया जा रहा है।
आंकड़ों की बाजीगरी, जितना था नहीं, उससे ज्यादा घटाया
खाद्य विभाग के रिकॉर्ड में जो हेरफेर सामने आया है, वह किसी के भी होश उड़ा सकता है। विभाग ने पीओएस मशीन से राशन घटाने के नाम पर विक्रेताओं को सीधा लाभ पहुँचाने के लिए जादुई खेल खेला हैं।
मकरारा पीडीएस (कोड: 505066): यहाँ भौतिक सत्यापन में जितना स्टॉक था, उससे कहीं अधिक स्टॉक कागजों में घटा दिया गया। मशीन में 11149 किलो चावल था, लेकिन घटाया गया 11991 किलो। इसी तरह गेहूं और शक्कर में भी ओवर-कटिंग कर विक्रेता को बड़ा अवैध लाभ पहुँचाया गया।
रिजौदा पीडीएस (कोड: 505032): यहाँ का खेल और भी बड़ा है। स्टॉक में 23486 किलो गेहूं दर्ज था, लेकिन कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की मेहरबानी से 30112 किलो गेहूं 'गायब' कर दिया गया। यानी वितरण के लिए आए नए राशन को भी डकार लिया गया।
टेबल के नीचे से चल रहा खेल
शासन के निर्देश थे कि भौतिक सत्यापन के बाद विसंगति मिलने पर रिकवरी की जाए, लेकिन गौरव कदम ने इसे उगाही का जरिया बना लिया। कोलारस की 133 दुकानों का संचालन भगवान भरोसे है। अधिकारी कार्यालय में बैठकर ऑनलाइन मॉनिटरिंग के बजाय 'सेटिंग' के खेल में व्यस्त हैं।
इस पूरे मामले ने पीओएस मशीन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब भौतिक स्टॉक से ज्यादा स्टॉक पोर्टल से हटा दिया गया, तो वह राशन कहाँ गया? यह साफ तौर पर गरीबों के निवाले की कालाबाजारी का संकेत है, जिसे सरकारी संरक्षण प्राप्त है।
रिश्वत की पुताई और डिजिटल वसूली
तिलातिली उचित मूल्य की दुकान के विक्रेता हरपाल जाटव ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि गौरव कदम ने स्टॉक शून्य करने के बदले न केवल नगद 20 हजार रुपये ऐंठे, बल्कि अपने सरकारी क्वार्टर की रंगाई-पुताई और अन्य घरेलू खर्च भी विक्रेता की जेब से करवाए।
भ्रष्टाचार का आलम यह है कि रिश्वत की राशि सीधे फोन-पे के जरिए अधिकारी के करीबियों और ऑपरेटरों के खातों में ट्रांसफर कराई गई। 11 सितंबर 2025 को ऑपरेटर इमरान खान के खाते में 2500 रुपये और फिर 26 दिसंबर को एक अन्य व्यक्ति के खाते में 5000 रुपये डलवाए गए। विडंबना देखिए कि सब कुछ लुटाने के बाद भी विक्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई, जबकि बड़े मगरमच्छो को संरक्षण दिया जा रहा है।
आंकड़ों की बाजीगरी, जितना था नहीं, उससे ज्यादा घटाया
खाद्य विभाग के रिकॉर्ड में जो हेरफेर सामने आया है, वह किसी के भी होश उड़ा सकता है। विभाग ने पीओएस मशीन से राशन घटाने के नाम पर विक्रेताओं को सीधा लाभ पहुँचाने के लिए जादुई खेल खेला हैं।
मकरारा पीडीएस (कोड: 505066): यहाँ भौतिक सत्यापन में जितना स्टॉक था, उससे कहीं अधिक स्टॉक कागजों में घटा दिया गया। मशीन में 11149 किलो चावल था, लेकिन घटाया गया 11991 किलो। इसी तरह गेहूं और शक्कर में भी ओवर-कटिंग कर विक्रेता को बड़ा अवैध लाभ पहुँचाया गया।
रिजौदा पीडीएस (कोड: 505032): यहाँ का खेल और भी बड़ा है। स्टॉक में 23486 किलो गेहूं दर्ज था, लेकिन कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की मेहरबानी से 30112 किलो गेहूं 'गायब' कर दिया गया। यानी वितरण के लिए आए नए राशन को भी डकार लिया गया।
टेबल के नीचे से चल रहा खेल
शासन के निर्देश थे कि भौतिक सत्यापन के बाद विसंगति मिलने पर रिकवरी की जाए, लेकिन गौरव कदम ने इसे उगाही का जरिया बना लिया। कोलारस की 133 दुकानों का संचालन भगवान भरोसे है। अधिकारी कार्यालय में बैठकर ऑनलाइन मॉनिटरिंग के बजाय 'सेटिंग' के खेल में व्यस्त हैं।
इस पूरे मामले ने पीओएस मशीन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब भौतिक स्टॉक से ज्यादा स्टॉक पोर्टल से हटा दिया गया, तो वह राशन कहाँ गया? यह साफ तौर पर गरीबों के निवाले की कालाबाजारी का संकेत है, जिसे सरकारी संरक्षण प्राप्त है।