शिवपुरी। शिवपुरी के सरकारी स्कूलों में नीति आयोग की टीम ने जमीनी निरीक्षण में अव्यवस्थाओं का अंबार पाया। अब नए शिक्षण सत्र 2026-27 के आगाज से पहले, लोक शिक्षण संचालनालय ने भ्रष्टाचार और लापरवाही की गुंजाइश खत्म करने के लिए डिजिटल नाकाबंदी शुरू की है। जिले के सैकड़ों स्कूलों को अब शिक्षक एप पर न केवल फोटो, बल्कि परिसर का लाइव वीडियो अपलोड कर अपनी असलियत साबित करनी होगी। नीति आयोग की तीखी फटकार के बाद शुरू हुआ यह सत्यापन अभियान उन अधिकारियों के लिए चेतावनी है, जिन्होंने अब तक कागजों पर ही स्कूलों को आदर्श बना रखा था।
नए शिक्षण सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की असली स्थिति जानने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने विस्तृत सत्यापन अभियान शुरू किया है। विभाग ने सभी शासकीय स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि हमारे शिक्षक एप पर पेयजल, शौचालय, कक्षाओं, परिसर से जुड़े फोटो और वीडियो अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएं।
जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक को भेजे निर्देशों में कहा गया है कि स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं का सत्यापन शाला प्रभारी करेंगे। जिन स्कूलों में एक ही शिक्षक है या नियमित शिक्षक नहीं हैं, वहां सत्यापन विकासखंड स्तर पर पदस्थ एमआईएस अधिकारी करेंगे। यह अभियान केवल स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन संचालित स्कूलों तक सीमित रहेगा।
निर्देशों के अनुसार एप पर बालक शौचालय, बालिका शौचालय, पेयजल आपूर्ति, स्कूल के मुख्य द्वार की फोटो अपलोड करनी होगी। मुख्य द्वार पर स्कूल का नाम और डाइस कोड अंकित होना चाहिए। एक लघु वीडियो भी अपलोड करना होगा। वीडियो में मुख्य द्वार से अंदर जाते हुए परिसर की स्थिति साफ दिखनी चाहिए।
सत्यापन के दौरान कक्षाओं की संख्या और स्थिति, स्कूल में बिजली कनेक्शन, इंटरनेट सुविधा, पेयजल की गुणवत्ता, स्कूल समय जैसी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। पूरा सत्यापन 25 मार्च तक करना है। विभाग ने कहा है कि किसी स्तर पर त्रुटि या विसंगति मिलने पर संबंधित सत्यापनकर्ता अधिकारी की जवाबदेही तय होगी। कार्रवाई की जाएगी। जानकारी मिल रही है कि अब सरकारी स्कूलों की जानकारी एप पर अपलोड की जा रही है,इससे नए सत्र शुरू होने तक स्कूलों मे अधिकतम जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास रहेगा।
पेयजल और शौचालय की खराब स्थिति पर नीति आयोग ने जताई थी नाराजगी
शिक्षा विभाग के दावों के बावजूद कई स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। अनेक विद्यालयों में शुद्ध पेयजल की कमी बनी हुई है, वहीं शौचालयों में रनिंग वाटर उपलब्ध नहीं है। 10 मार्च को नीति आयोग की टीम ने राज्य नोडल अधिकारी शांभवी सिंह के नेतृत्व में आंगनबाड़ी और स्कूलों का निरीक्षण किया था, जिसमें पेयजल और साफ-सफाई की स्थिति पर नाराजगी जताई गई थी।
इसके बाद भी कई स्कूलों में सुधार नहीं हो सका है। इन कमियों का असर छात्रों की उपस्थिति और पढ़ाई पर पड़ रहा है, जिससे ड्रॉपआउट की समस्या बनी हुई है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अधिक चिंताजनक हैं। अब विभागीय सत्यापन अभियान से उम्मीद है कि खामियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाएगा। नए सत्र से पहले स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि छात्रों को बेहतर वातावरण मिल सके।
नए शिक्षण सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की असली स्थिति जानने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने विस्तृत सत्यापन अभियान शुरू किया है। विभाग ने सभी शासकीय स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि हमारे शिक्षक एप पर पेयजल, शौचालय, कक्षाओं, परिसर से जुड़े फोटो और वीडियो अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएं।
जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक को भेजे निर्देशों में कहा गया है कि स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं का सत्यापन शाला प्रभारी करेंगे। जिन स्कूलों में एक ही शिक्षक है या नियमित शिक्षक नहीं हैं, वहां सत्यापन विकासखंड स्तर पर पदस्थ एमआईएस अधिकारी करेंगे। यह अभियान केवल स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन संचालित स्कूलों तक सीमित रहेगा।
निर्देशों के अनुसार एप पर बालक शौचालय, बालिका शौचालय, पेयजल आपूर्ति, स्कूल के मुख्य द्वार की फोटो अपलोड करनी होगी। मुख्य द्वार पर स्कूल का नाम और डाइस कोड अंकित होना चाहिए। एक लघु वीडियो भी अपलोड करना होगा। वीडियो में मुख्य द्वार से अंदर जाते हुए परिसर की स्थिति साफ दिखनी चाहिए।
सत्यापन के दौरान कक्षाओं की संख्या और स्थिति, स्कूल में बिजली कनेक्शन, इंटरनेट सुविधा, पेयजल की गुणवत्ता, स्कूल समय जैसी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। पूरा सत्यापन 25 मार्च तक करना है। विभाग ने कहा है कि किसी स्तर पर त्रुटि या विसंगति मिलने पर संबंधित सत्यापनकर्ता अधिकारी की जवाबदेही तय होगी। कार्रवाई की जाएगी। जानकारी मिल रही है कि अब सरकारी स्कूलों की जानकारी एप पर अपलोड की जा रही है,इससे नए सत्र शुरू होने तक स्कूलों मे अधिकतम जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास रहेगा।
पेयजल और शौचालय की खराब स्थिति पर नीति आयोग ने जताई थी नाराजगी
शिक्षा विभाग के दावों के बावजूद कई स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। अनेक विद्यालयों में शुद्ध पेयजल की कमी बनी हुई है, वहीं शौचालयों में रनिंग वाटर उपलब्ध नहीं है। 10 मार्च को नीति आयोग की टीम ने राज्य नोडल अधिकारी शांभवी सिंह के नेतृत्व में आंगनबाड़ी और स्कूलों का निरीक्षण किया था, जिसमें पेयजल और साफ-सफाई की स्थिति पर नाराजगी जताई गई थी।
इसके बाद भी कई स्कूलों में सुधार नहीं हो सका है। इन कमियों का असर छात्रों की उपस्थिति और पढ़ाई पर पड़ रहा है, जिससे ड्रॉपआउट की समस्या बनी हुई है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अधिक चिंताजनक हैं। अब विभागीय सत्यापन अभियान से उम्मीद है कि खामियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाएगा। नए सत्र से पहले स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि छात्रों को बेहतर वातावरण मिल सके।