Shivpuri News: सचिव निलंबन के बाद तीन मंडियों में ताला बंदी जैसे हालात, करोड़ों का कारोबार ठप

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी।  शिवपुरी जिले में कृषि व्यापार एक बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है। पिछले चार दिनों से जिले की तीन महत्वपूर्ण कृषि उपज मंडियों (शिवपुरी, बैराड़ और खतौरा) में कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा है। इस समस्या का मुख्य कारण 27 जनवरी को मंडी सचिव रामकुमार शर्मा का निलंबन है, जिनके पास इन तीनों मंडियों का प्रभार था। उनके जाने के बाद विभाग ने अब तक किसी नए सचिव की नियुक्ति नहीं की है और न ही किसी अधीनस्थ कर्मचारी को चार्ज सौंपा है।

राजस्व और व्यापार पर बड़ा असर
मंडी सचिव की आईडी (ID) के बिना न तो मंडी टैक्स जमा हो पा रहा है और न ही गेट पास (अनुज्ञा पत्र) बन रहे हैं। शिवपुरी मंडी में रोजाना करीब 3 हजार बोरी सरसों और सोयाबीन की आवक होती है। टैक्स और गेट पास की प्रक्रिया रुकने से व्यापारियों के लिए माल को मंडी से बाहर अपने गोदामों या दूसरे शहरों में भेजना असंभव हो गया है। अनुमान के मुताबिक, इस गतिरोध से शासन को प्रतिदिन 5 लाख रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

गोदाम फुल, ऑर्डर पेंडिंग
व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि मंडियों के अंदर मौजूद गोदामों में अब जगह नहीं बची है। बैराड़ मंडी में 3500 बोरी और खतौरा में 800 बोरी तक की दैनिक आवक हो रही है। व्यापारियों के पास बाहर भेजने के लिए बड़े ऑर्डर लंबित हैं, लेकिन कानूनी दस्तावेजों (अनुज्ञा पत्र) के अभाव में वे वाहन रवाना नहीं कर पा रहे हैं।

कर्मचारियों का वेतन भी अधर में
मंडी में कार्यरत करीब आधा सैकड़ा (50) से अधिक कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। माह का अंत होने के कारण वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू होनी है, लेकिन सचिव के हस्ताक्षर और आईडी के बिना वेतन और अन्य निर्माण कार्यों का भुगतान अटक गया है।

अधिकारियों और व्यापारियों का पक्ष
व्यापारी सुनील जैन के अनुसार, मंडी बोर्ड को तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए ताकि व्यापार सुचारू हो सके। वहीं, मंडी बोर्ड ग्वालियर के डीएस डीके शर्मा ने आश्वासन दिया है कि ई-मंडी चालू करने की व्यवस्था की जा रही है और शनिवार तक इस समस्या का समाधान हो जाएगा।