कौशल भार्गव करैरा। शिवपुरी जिले का करैरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरुवार को उस समय किसी जंग के मैदान में तब्दील हो गया, जब मरहम-पट्टी कराने आए दो पक्ष पुलिस की मौजूदगी में ही आपस में भिड़ गए। मर्यादा और कानून की धज्जियां उड़ाते हुए अस्पताल परिसर के भीतर ही जमकर कुर्सियां चलीं और तोड़फोड़ हुई, जिससे लाखों रुपये का सरकारी फर्नीचर खाक हो गया।
आलम यह था कि जान बचाने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ को कमरों में छिपना पड़ा, वहीं इलाज कराने आए मरीज दहशत के मारे अस्पताल छोड़कर भाग खड़े हुए। जमीन विवाद से शुरू हुई यह रंजिश अस्पताल की दहलीज पार कर गुंडागर्दी के चरम तक जा पहुंची, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मौके पर मौजूद पुलिस बल मूकदर्शक बना रहा।
जानकारी के अनुसार करैरा थाना क्षेत्र के ग्राम रमगढ़ा में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों में जमकर संघर्ष हुआ। खेत में जबरन जेसीबी मशीन चलाने का विरोध करने पर एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर लाठी, डंडों और कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पुलिस ने मामले में 8 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है,वही दूसरे पक्ष की रिपोर्ट पर पुलिस ने लगभग 10 लोगों पर मामला दर्ज किया था।
फरियादी महताव सिंह गुर्जर (60 वर्ष) ने बताया कि 30 जनवरी 2026 की सुबह करीब 10:30 बजे वह अपने भाई राजेन्द्र उर्फ भदौरिया, हटे सिंह और भतीजे विकास गुर्जर के साथ अपने खेत पर मौजूद थे। इसी दौरान गांव के ही पड़ोसी जितेन्द्र गुर्जर, हरचरन गुर्जर और उनके अन्य साथी जबरन उनके कब्जे वाली जमीन पर जेसीबी मशीन चलाने लगे,इसी बात पर विवाद हुआ और यह गुर्जर परिवार और भदौरिया परिवार के बीच आपस मे मारपीट हो गई। पुलिस ने इस मामले मे दोनो पक्षो पर का्ूस मामला दर्ज कर लिया।
इस मामले को लेकर करैरा पुलिस करैरा के स्वास्थ्य केंद्र पर दोनो पक्षो के घायलों की एमएलसी कराने के लिए लेकर आई थी। यह पर दोनो पक्षो के लोग आपस मे फिर उलझ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हिंसक माहौल इतना भयावह था कि अस्पताल का स्टाफ अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपने को मजबूर हो गया। दहशत के चलते कई मरीज बिना उपचार कराए ही अस्पताल छोड़कर भाग गए। यह करैरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी और गंभीर घटना बताई जा रही है।
घटना को लेकर बीएमओ की भूमिका संदेह के घेरे में है। आरोप है कि बीएमओ की घोर लापरवाही के चलते अस्पताल में अव्यवस्था फैली और हालात यहां तक पहुंचे। इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक न कोई ठोस कार्रवाई की गई है और न ही बीएमओ द्वारा कोई आधिकारिक बयान सामने आया है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर खुलेआम कुर्सियां चल रही हों, तो आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? वहीं, जिला व तहसील स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी भी पूरे मामले को और गंभीर बना रही है।
पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आया है, जिसमें अस्पताल के अंदर मचे उत्पात को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। वीडियो के वायरल होने के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है,फिलहाल अस्पताल में हुई तोडफोड को लेकर पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की है इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है।
आलम यह था कि जान बचाने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ को कमरों में छिपना पड़ा, वहीं इलाज कराने आए मरीज दहशत के मारे अस्पताल छोड़कर भाग खड़े हुए। जमीन विवाद से शुरू हुई यह रंजिश अस्पताल की दहलीज पार कर गुंडागर्दी के चरम तक जा पहुंची, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मौके पर मौजूद पुलिस बल मूकदर्शक बना रहा।
जानकारी के अनुसार करैरा थाना क्षेत्र के ग्राम रमगढ़ा में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों में जमकर संघर्ष हुआ। खेत में जबरन जेसीबी मशीन चलाने का विरोध करने पर एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर लाठी, डंडों और कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पुलिस ने मामले में 8 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है,वही दूसरे पक्ष की रिपोर्ट पर पुलिस ने लगभग 10 लोगों पर मामला दर्ज किया था।
फरियादी महताव सिंह गुर्जर (60 वर्ष) ने बताया कि 30 जनवरी 2026 की सुबह करीब 10:30 बजे वह अपने भाई राजेन्द्र उर्फ भदौरिया, हटे सिंह और भतीजे विकास गुर्जर के साथ अपने खेत पर मौजूद थे। इसी दौरान गांव के ही पड़ोसी जितेन्द्र गुर्जर, हरचरन गुर्जर और उनके अन्य साथी जबरन उनके कब्जे वाली जमीन पर जेसीबी मशीन चलाने लगे,इसी बात पर विवाद हुआ और यह गुर्जर परिवार और भदौरिया परिवार के बीच आपस मे मारपीट हो गई। पुलिस ने इस मामले मे दोनो पक्षो पर का्ूस मामला दर्ज कर लिया।
इस मामले को लेकर करैरा पुलिस करैरा के स्वास्थ्य केंद्र पर दोनो पक्षो के घायलों की एमएलसी कराने के लिए लेकर आई थी। यह पर दोनो पक्षो के लोग आपस मे फिर उलझ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हिंसक माहौल इतना भयावह था कि अस्पताल का स्टाफ अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपने को मजबूर हो गया। दहशत के चलते कई मरीज बिना उपचार कराए ही अस्पताल छोड़कर भाग गए। यह करैरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी और गंभीर घटना बताई जा रही है।
घटना को लेकर बीएमओ की भूमिका संदेह के घेरे में है। आरोप है कि बीएमओ की घोर लापरवाही के चलते अस्पताल में अव्यवस्था फैली और हालात यहां तक पहुंचे। इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक न कोई ठोस कार्रवाई की गई है और न ही बीएमओ द्वारा कोई आधिकारिक बयान सामने आया है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर खुलेआम कुर्सियां चल रही हों, तो आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? वहीं, जिला व तहसील स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी भी पूरे मामले को और गंभीर बना रही है।
पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आया है, जिसमें अस्पताल के अंदर मचे उत्पात को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। वीडियो के वायरल होने के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है,फिलहाल अस्पताल में हुई तोडफोड को लेकर पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की है इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है।