Shivpuri News - करोडो रूपए की लागत के मेडिकल कॉलेज की CR को डुबो रही है 200 रुपए की पर्ची

Bhopal Samachar

शिवपुरी। शिवपुरी के मेडिकल कॉलेज में एक फर्जीवाड़ा सामने आया है। मेडिकल कॉलेज की एक 200 रुपए की शुल्क पर्ची वायरल हो रही है,यह शुल्क माइनर ओटी के नाम पर वसूला गया है। मध्यप्रदेश सरकार के करोडो रूपए की लागत से बना यह सरकारी संस्था मरीजो से शुल्क वसूल रहा है। इस पर्ची की विशेषता यह है कि इस शुल्क पर्ची पर तारिख अंकित नही है,इसका पैसा किस मद में जाएगा और इस पर कोई अधिकृत सील और हस्ताक्षर नहीं है। कुल मिलाकर इस रशीद की किसी भी प्रकार की प्रमाणित नहीं है,यह रशीद उस मरीज से वसूली गई है कई बार अपने मरीज का उपचार फ्री में कराकर आया है।

पहले समझे आप मामले को

शिवपुरी शहर के कमालगंज क्षेत्र में घोसीपुरा निवासी हैदर खान की 75 वर्षीय बुजुर्ग मां खातुन बेगम की तबीयत खराब रहती है। ऐसे में डाक्टरों ने उनके यहां टायलेट बैग लगा रखा है, जो हर महीने बदला जाता है। हैदर खान के अनुसार वह बीते रोज अपनी मां का बैग बदलवाने के लिए मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में पहुंचे। वहां उन्हें डा पुलकित शर्मा ने देखा और माइनर ओटी के नाम पर टायलेट बैग बदलने के लिए 200 रुपये की पर्ची कटवाने के लिए कहा।

हैदर के अनुसार उन्होंने डॉक्टर को बोला कि उनकी मां का टायलेट बेग वह पहले भी यहां से बदलवा चुके हैं, परंतु किसी भी प्रकार का कोई चार्ज नहीं लगता। इस पर डाक्टर ने कहा कि अब यह चार्ज दिए बिना टायलेट बैग चेंज नहीं होगा। हैदर के अनुसार उसने पर्ची नहीं कटवाई तो उनकी मां का टायलेट बैग नहीं बदला गया। उन्हें अपनी मां को बिना टायलेट बैग बदलवाए ही घर लेकर आना पड़ा।

इस पर्ची को वायरल और साथ में भारी भरकम खबर भी वायरल हो रही है। खबर के साथ डीन का वर्जन भी वायरल हो रहा है इस मामले में शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के डीन परमहंस का कहना है, महिला को मेरे पास भेज दीजिए, मैं काम करवा दूंगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आयुष्मान कार्डधारी बुजुर्ग से यह शुल्क किस आधार पर लिया जा रहा था।

यह 200 रुपए की पर्ची करोडो रूपए के मेडिकल कॉलेज की साख को बट्टा लगा रही है। शिवपुरी के जिला अस्पताल में भी कई प्रकार की शुल्क मरीजों से वसूले जाते है यह शुल्क रेड क्रॉस और रोगी कल्याण समिति के मद में जाते है लेकिन यह शुल्क किस मद में और किसके आदेश से लिया जा रहा है यह बात अभी तक मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नहीं बताई है।