श्री बांकडे मंदिर पर धर्म प्रवाह, 9 कुंडीय यज्ञ और अष्टोत्तरशत 108 श्रीमद् भागवत कथा

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। धर्म और आध्यात्म की नगरी शिवपुरी में आगामी 7 फरवरी से एक भव्य धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन होने जा रहा है। श्री बांकड़े शिक्षा एवं विकास समिति के तत्वावधान में 'श्रीमद भागवत कथा ज्ञानयज्ञ एवं नव कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ' का आयोजन किया जाएगा, जो 7 फरवरी से 14 फरवरी 2026 तक चलेगा।

भव्य कलश यात्रा से होगा शुभारंभ कार्यक्रम का श्रीगणेश शनिवार, 7 फरवरी को सुबह 9:00 बजे भव्य कलश यात्रा के साथ होगा। यह यात्रा नगर के प्रतिष्ठित श्री राज राजेश्वरी मंदिर से प्रारंभ होकर श्री विष्णु मंदिर तक पहुंचेगी। कथा के मुख्य वक्ता बांकड़े हनुमान सिद्ध क्षेत्र के महंत श्री गिरीश महाराज होंगे, जो अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को भागवत रसपान कराएंगे।

विशेष उत्सव और यजमान कथा के दौरान विभिन्न प्रसंगों पर भव्य उत्सव आयोजित किए जाएंगे।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: मुख्य यजमान श्रीमती प्रेमदेवी एवं श्री महेश शिवहरे होंगे।
गोवर्धन पूजन: मुख्य यजमान श्रीमती हेमलता एवं पंडित मुकेश पाराशर होंगे।

रुक्मणी मंगल (विवाह): मुख्य यजमान श्रीमती प्रियंका एवं श्री गिरजेश श्रीवास्तव होंगे।

108 भागवत पाठ और महायज्ञ इस आयोजन की विशेषता यह है कि इसमें 108 अष्टोत्तर श्रीमद भागवत मूल पाठ किए जाएंगे। साथ ही, नौ कुंडीय विष्णु महायज्ञ का आयोजन होगा, जिसमें विश्व कल्याण की कामना के साथ आहुतियां दी जाएंगी।

पूर्णाहूति और भंडारा सप्ताह भर चलने वाले इस ज्ञानयज्ञ का समापन शनिवार, 14 फरवरी 2026 को होगा। इस दिन श्री बांकड़े हनुमान सिद्ध क्षेत्र में महायज्ञ की पूर्णाहूति दी जाएगी और एक विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें शहर भर के श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जाएगा।

श्री बांकडे हनुमान की कथा
शिवपुरी। पूरे भारत में कलयुग के देवता श्री हनुमान जी महाराज का जन्मोत्सव बडे धूमधाम से मनाया जाता रहा है। जिसके चलते पूरे देश में श्रद्धालु श्री हनुमानजी के अवतरण की खुशियां पूरे धूमधाम से मनाते। शिवपुरी जिले में कई हनुमान मंदिरों पर हनुमान उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।

श्री बांकडे हनुमान मंदिर शिवपुरी का सबसे प्रसिद्ध मंदिर हैं, इस मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। यहां अनंत काल से ही श्री बांकडे सरकार की मूर्ति विराजमान है। उन्हें भी इतिहासकारों से पता चला है कि यह मंदिर श्री बलारी मां के मंदिर से भी पुराना है। जिसे लेकर पौराणिक मान्यता है कि मां बलारी जगल के रास्ते से श्री बांकडे सरकार के दर्शन करने आ रही थी। और वह दर्शन कर लौटते समय जंगल में ही विराजमान हो गई। जहां आज मां बलारी का मंदिर है वहां मां को लाखा बंजारा लेकर आया। परंतु मां के विराजमान का सही स्थान और अंदर है।

श्री गिरीश महाराज ने बताया है कि बांकडे हनुमान से कोई भी हारा हुआ व्यक्ति आकर अपनी पूरी इच्छा के साथ बाबा के दरबार में अपनी फरियाद लगा दे। और पलक झपकते ही बाबा श्रद्धालुओं को दुख हर लेते है। यहां प्रति मंगलवार और शनिवार शहर से लगभग 5 हजार श्रद्धालु पैदल बाबा के दरबार में पहुंचकर अपनी अर्जी लगाते है और बाबा सभी की मनों कामना पूरी करते है। श्री गिरीश महाराज ने बताया है कि भगवान का मनमोहन बाला रूप देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर भगवान की आराधना करते है। श्री हनुमान प्रकटोत्सव के दौरान श्री यहां मेला लगता है।

कल्याण नामक पुस्तक के अनुसार
ग्वालियर-चंबल अंचल का सबसे पुराना हनुमान मंदिर है। गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित कल्याण नामक पुस्तक के अनुसार इस मंदिर का निर्माण लगभग 934 ईस्वी में हुआ था। पुस्तक में इसे ग्वालियर-चंबल का सबसे पुराना मंदिर बताया गया है। स्टेट काल में सिंधिया घराने के राजा-महाराजा भी यहां पूजा-अर्चना करने और सवामणी का भोग लगाने के लिए आया करते थे।