शिवपुरी की सिलाई क्रांति: 7 करोड़ की लागत से तैयार हुई हाई-टेक टेक्सटाइल फैक्ट्री

Bhopal Samachar

शिवपुरी। शिवपुरी जिले में महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी नींव रखी गई है, जो आने वाले समय में जिले की आर्थिक तस्वीर बदल देगी। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों और अडानी फाउंडेशन के सीएसआर (CSR) फंड के सहयोग से बदरवास के बूढ़ा डोंगर गांव में 7 करोड़ रुपये की लागत से एक विशाल कपड़ा फैक्ट्री बनकर तैयार हो गई है। नेशनल फोरलेन हाईवे के किनारे 2 बीघा क्षेत्र में फैली यह फैक्ट्री मार्च 2026 से पूरी तरह क्रियाशील हो जाएगी।

आधुनिक तकनीक और वैश्विक मानक
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यहाँ उपयोग होने वाली तकनीक है। महिलाओं को पारंपरिक सिलाई से ऊपर उठाकर औद्योगिक स्तर की सिलाई सिखाने के लिए जापानी ब्रांड की अत्याधुनिक मशीनें और सिंगापुर से विशेष फ्यूजिंग मशीन मंगवाई गई हैं। जहाँ महिलाएं अब तक केवल सिंगल धागे वाली मशीनों पर काम करती थीं, वहीं अब वे 11 धागों वाली एडवांस मशीनों से अंतरराष्ट्रीय स्तर के परिधान तैयार करेंगी।

रोजगार का रोडमैप: 1500 महिलाओं का लक्ष्य
प्रशासन ने इस परियोजना के लिए कुल 8 बीघा जमीन आवंटित की है। फैक्ट्री का विस्तार तीन चरणों में किया जाएगा,पहले चरण में मार्च 2026 तक इस कारखाने में 380 प्रशिक्षित महिलाएं काम शुरू करेंगी,वही दूसरे चरण में यह आंकड़ा 500 महिलाओं तक पहुंच जाएगा और तीसरे चरण में यह  1500 महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़कर उनके परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

बिजनेस मॉडल: बी-टू-बी पर फोकस
फैक्ट्री केवल कपड़े नहीं बनाएगी, बल्कि एक मजबूत बिजनेस नेटवर्क भी तैयार करेगी। बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) मॉडल के तहत यह फैक्ट्री पैंट, शर्ट, पजामा और जैकेट जैसे कपड़े तैयार करेगी। अडानी ग्रुप की अपनी कंपनियां यहाँ से कपड़े की खरीदारी करेंगी। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और अन्य बड़े ब्रांड्स के साथ भी अनुबंध की बातचीत अंतिम दौर में है।

प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचा
वर्तमान में कोलारस और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं को कपड़े काटने, डिजाइन करने, पैकेजिंग और प्रेसिंग की प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जा रही है। फैक्ट्री परिसर में केवल प्रोडक्शन यूनिट ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक रूम, सेप्टिक टैंक और आधुनिक टॉयलेट जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।

मार्च से काम शुरू हो जाएगा। हम कॉर्पोरेट हाउसेस और सरकार से बड़े ऑर्डर लेने की प्रक्रिया में हैं। अडानी ग्रुप से भी निरंतर सहयोग मिलेगा।
अजीत जैन (प्रोजेक्ट मैनेजर, अडानी फाउंडेशन)

स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है। हम 1500 महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अरविंद भार्गव (डीपीएम, आजीविका मिशन)