लाडली बहने टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर, 50 परिवार गंदा पानी पीने को मजबूर

करैरा। शिवपुरी जिले के करैरा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मुंगावली में 50 आदिवासी परिवार की बस्ती पानी,लाइट,रोड़ आदि मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लोगों का कहना हैं कि इस गांव में ना तो हमें कुटीर मिली हैं और ना ही वृद्ध पेंशन मिलती हैं। वहीं हम लोग इतने परेशान हैं कि बाथरूम ना होने के वजह से हमें 4 लकडियों लगाकर उसपर एक साड़ी बांधकर नहाते हैं और आज भी हम लोग शौच के लिए बाहर जाते हैं,सरकार की किसी भी योजना का लाभ हमें नहीं मिल रहा हैं। हम 50 परिवार बहुत ज्यादा परेशान हो चुके हैं। हम जब इस संबंध में गांव के सरपंच-सचिव के पास शिकायत लेकर जाते हैं तो वह हमें भगा देते है। और हमसे काम के नाम पर पैसे लूट लेते हैं।  

यह बोले आदिवासी परिवार
जानकारी के अनुसार पूनम आदिवासी निवासी ग्राम पंचायत मुगावली करैरा ने बताया कि हम यहां टपरियां में पिछले दो सालों से रह रहे हैं, हमें सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है हमने गांव के सरपंच-सचिव से भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो कुटीर मिलती हैं उसकी बोला था,लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुं, वह हमारी बात को सुनकर भी अनसुना कर देते हैं।

साबो आदिवासी निवासी ग्राम मुंगावली ने बताया कि मुझे ना ही पेंशन मिलती हैं, में बुजुर्ग महिला बहुत ज्यादा परेशान हूं मैं सरपंच, सचिव के पास जाती हूं तो वह अपने ही कामों में बहुत व्यस्त रहते हैं हमारी कोई भी सुनवाई नहीं की जाती। तथा ना ही यहां शौचालय की कोई व्यवस्था हैं। में बुजुर्ग महिला यहां टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर हूं।

वहीं एक बुजुर्ग पुरुष ने बताया कि हमसे गांव के सचिव गोवर्धन ने पैसे मांगे थे कि तुम पैसे दे दो तब तुम्हारी कुटीर आयेगी। और में बुजुर्ग हूं मुझे पेंशन भी नहीं मिलती हैं उसके लिए मैंने सचिव से बात की तो सचिव ने मुझसे 500 रुपये ले लिये, लेकिन फिर भी पेंशन नहीं मिल रही मुझे।

नारायण जू आदिवासी ने बताया कि हम गांव का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं, या ना ही बोर हैं और ना ही हेंडपंप हमें, हम गंदा पानी पीने को मजबूर हैं और एक हैंडपंप हैं उसके चारों तरफ गंदा पानी भरा हुआ हैं, जिसे पीने से हमारे बच्चे बीमार हो रहे हैं करीबन 50 परिवार से ज्यादा हैं,लेकिन शिकायत करने के बाद भी हमारी कोई सुनवाई नहीं की जाती हैं।

यह बोला सचिव
ग्राम मुंगावली के सचिव गोवर्धन रजक का कहना है कि वृद्धा पेंशन इसीलिए नहीं बन पाई, क्योंकि उनकी उस समय उम्र पूरी नहीं थी,वहीं पैसों के लेन देन के आरोप झूठे लगाये गये हैं।

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