शिवपुरी। सात दिन से सिद्धेश्वर मंदिर के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा का आज समापन हो गया।जिसमें कथावाचक श्री श्री 1008 केशवाचार्य जी महाराज महंत गोपाल जी मंदिर,रंगजी मंदिर श्रीधाम वृन्दावन द्वारा श्री कृष्ण और सुदामा की दोस्ती का वर्णन किया गया।उनके द्वारा बताया गया कि सुदामा की पत्नी उनसे कहती है कि तुम अपने सखा से मिलने क्यों नहीं जाते और जब सुदामा श्री कृष्ण से मिलने उनके महल द्वारिका जाते है।
तो उनके पास श्री कृष्ण को उपहार में देने के लिए कुछ नही होता तो वह अपने घर से एक पोटली में चावल ले कर जाते है।जैसे ही सुधामा द्वारिका पहुँचते है तो वहां मोजूद द्वारपाल उनको अन्दर नही जाने देते और ये बात जैसे ही श्री कृष्ण को पता लगती है कि उनका बचपन का सखा सुधामा आया है तो वह दोड़ते हुए जाते है और सुधामा को गले लगा लेते है और अपने साथ ले आते है और अपने स्वयं के सिंघासन पर बैठकर सुधामा के चरण धुलाते है।
फिर श्री कृष्ण सुदामा से पूछते है मेरे लिए क्या लाये और सुदामा वह पोटली को छुपा लेते है।और श्री कृष्ण वह पोटली सुदामा से ले कर जैसे ही खेलते है उसमें चावल होते है और सुदामा रोने लगते है।श्री कृष्ण एक एक करके 3 मुट्ठी चावल खाते है और वो तीसरी मुट्ठी खा रहे होते है और रुकमनी उनको रोक देती हैं और श्री कृष्ण सुदामा को गले लगा लेते है।
इसी के साथ आज कथा का समापन हुआ वहाँ मोजूद सभी श्रद्धालुओं ने राधा कृष्ण क साथ फूलों की होली खेली और सभी श्रद्धालु भजनों पर थिरकते नज़र आये। अंत में कथावाचक श्री केशावाचार्य जी महाराज ने पंडित श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के लिए बताया कि 5 लाख हिन्दू सनातनी बुजुर्गों से ले कर छोटे छोटे बच्चो को अथवा सभी समाज के लोगो को एकत्रित करना ही सबसे बड़ा चमत्कार है।
तो उनके पास श्री कृष्ण को उपहार में देने के लिए कुछ नही होता तो वह अपने घर से एक पोटली में चावल ले कर जाते है।जैसे ही सुधामा द्वारिका पहुँचते है तो वहां मोजूद द्वारपाल उनको अन्दर नही जाने देते और ये बात जैसे ही श्री कृष्ण को पता लगती है कि उनका बचपन का सखा सुधामा आया है तो वह दोड़ते हुए जाते है और सुधामा को गले लगा लेते है और अपने साथ ले आते है और अपने स्वयं के सिंघासन पर बैठकर सुधामा के चरण धुलाते है।
फिर श्री कृष्ण सुदामा से पूछते है मेरे लिए क्या लाये और सुदामा वह पोटली को छुपा लेते है।और श्री कृष्ण वह पोटली सुदामा से ले कर जैसे ही खेलते है उसमें चावल होते है और सुदामा रोने लगते है।श्री कृष्ण एक एक करके 3 मुट्ठी चावल खाते है और वो तीसरी मुट्ठी खा रहे होते है और रुकमनी उनको रोक देती हैं और श्री कृष्ण सुदामा को गले लगा लेते है।
इसी के साथ आज कथा का समापन हुआ वहाँ मोजूद सभी श्रद्धालुओं ने राधा कृष्ण क साथ फूलों की होली खेली और सभी श्रद्धालु भजनों पर थिरकते नज़र आये। अंत में कथावाचक श्री केशावाचार्य जी महाराज ने पंडित श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के लिए बताया कि 5 लाख हिन्दू सनातनी बुजुर्गों से ले कर छोटे छोटे बच्चो को अथवा सभी समाज के लोगो को एकत्रित करना ही सबसे बड़ा चमत्कार है।
