SHIVPURI NEWS -गोपलजी के मंदिर की जमीन हड़पने के लिए वनकर्मी ने बदला अपने पिता का नाम, पढ़िए मामला

शिवपुरी। शिवपुरी तहसील के ग्राम धौलागढ के ग्रामीणों ने गांव के प्राचीन मंदिर की कीमती जमीन हथियाने के लिए एक सेवानिवृत्त वनकर्मी पर अपने पिता का नाम बदलने का आरोप लगाते हुए थाने और तहसील में शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों ने शिकायती आवेदन में उल्लेख किया है कि गांव में गोपाल जी का मंदिर है, जो कि 500 वर्ष पूर्व जब गांव बसा था तभी से यहां स्थित है। ग्रामीणों के अनुसार इस मंदिर पर सांवल दास बाबा रहते थे और इसकी पूजा अर्चना करते थे।

ग्रामीणों का कहना है कि सांवल दास बाबा से प्रभावित होकर ऐंचवाड़ा गांव के नारायण दास पुत्र दुर्गा प्रसाद ने उनसे दीक्षा ली और उन्हें गुरु मानकर वह घर छोड़कर मंदिर पर ही रहने लगे तथा उनका नाम बदलकर नारायण दास पुत्र सांवल दास हो गया। सांवल दास बाबा की मौत के बाद मंदिर की पूजा नारायण दास बाबा करने लगे। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1972-73 में गोपाल जी मंदिर के लिए शासन ने पुजारी नारायण दास के नाम पर 10 बीघा का पट्टा दिया गया था, उस जमीन से होने वाली आय को मंदिर पर खर्च किया जाता था। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1992 में पुजारी नारायण दास बाबा का देहांत हो गया।


ग्रामीणों का आरोप है कि बाबा के देहांत के बाद नारायण दास बाबा के भाई सेवानिवृत्त वनकर्मी रामचरण दास ने पटवारी से सांठगांठ कर राजस्व दस्तावेजों में अपने पिता के नाम में हेराफेरी कर उक्त जमीन अपने नाम पर दर्ज करवा ली है। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त हेराफेरी का खुलासा जांच करने पर हो जाएगा।

रामचरण के नौकरी के दस्तावेजों सहित अन्य शासकीय दस्तावेजों को खंगाला जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सेवानिवृत्त वनकर्मी ने जमीन हथियाने के लिए यह पूरी हेराफेरी की है। वहीं इस संबंध में जब रामचरण दास से संपर्क करने का प्रयास किया तो फोन पर उनके बेटे गोपाल शर्मा से बात हुई। गोपाल के अनुसार उनके दादाजी का नाम दुर्गा प्रसाद उर्फ सांवल दास था। जमीन का पट्टा उनके ताऊ जी नारायण दास के नाम पर मिला था।

इसका मंदिर से कोई लेना देना नहीं है। बकौल गोपाल, उनके ताऊजी नारायण दास के यहां पर कोई संतान नहीं थी। ऐसे में यह जमीन बाद में उनके पिता रामचरण और चाचा माखनलाल के नाम पर चढ़ी। माखनलाल जी के यहां भी कोई संतान न होने के कारण यह जमीन उनके पिता के नाम पर दर्ज है। अधिकारी मामले की जांच उपरांत उचित कार्रवाई की बात कह रहे हैं।