वायरल फोटो पर बन रहे पोहरी विधानसभा के चुनावी समीकरण, तीसरी शक्ति के रूप में ताकतवर है कैलाश- Shivpuri News

एक्सरे @ ललित मुदगल। जिले की जातिवाद से श्रापित पोहरी विधानसभा के आगामी समीकरण एक वायरल फोटो से बन रहे है। फोटो है प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ और बसपा नेता कैलाश कुशवाह की एक छोटी सी मुलाकात का। माना जा रहा है कि कैलाश कुशवाह कांग्रेस में शामिल हो सकते है और पोहरी से कांग्रेस विधानसभा के टिकट पर चुनाव लड सकते है,कैलाश कुशवाह पोहरी विधानसभा में ताकतवर प्रत्याशी है लेकिन कब, यह बड़ा सवाल है बन रहा है प्रत्येक व्यक्ति या नेता का एक समीकरण या यूँ कह लो एक सूत्र होता है जब वह ताकतवर होता है कैलाश कुशवाह कब शक्तिमान हो सकते है पोहरी के रण में आईए इस समीकरण का एक्सरे करते है।

कैलाश कुशवाह लड़ चुके है दो चुनाव, दोनो पर दूसरे नंबर पर

2018 के चुनाव में कैलाश कुशवाह ने भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद भारती को पीछे धकेलने का काम किया था तब कैलाश को बसपा से 52 हजार 736 मत मिले थे। जबकि सुरेश खेडा उनसे मात्र मतो से विजयी रहे थे।

उप चुनाव में कैलाश की हार का अंतर भले हो बड़ा हो मगर वे दूसरे क्रम पर बने रहे। कैलाश कुशवाह ने 2020 के विधानसभा उपचुनाव में दूसरे नम्बर पर रह कर काँग्रेस उम्मीदवार से अधिक मत हासिल किए थे, उन्हें बसपा के चुनाव चिन्ह पर 43 हजार 848 मत मिले थे।

जातिवाद के श्राप से श्रापित है विधानसभा

पोहरी विधानसभा में विकास के मुद्दे से बड़ा मुद्दा है जातिवाद का यह विधानसभा जातिवाद के श्राप से श्रापित है। कैलाश कुशवाह भी जाति के गणित से विधानसभा के रण तीसरी जाति तीसरा गणित के रथ पर सवार होकर उतरे थे। पोहरी विधानसभा के परिसीमन में नरवर क्षेत्र के कुछ गांव पोहरी विधानसभा में शामिल हो गए थे इस कारण कुशवाह मतदाताओं का प्रतिशत बढ गया था। एक सम्मानीय संख्या बल के कारण यह तीसरी जाति तीसरा गणित बन रहा था।

पोहरी में यह है जातियों का आकड़ा

पोहरी विधानसभा में धाकड़, ब्राह्मण, यादव, कुशवाह और आदिवासी वोटरों का संख्याबल हैं,अभी तक पोहरी विधानसभा में ब्राह्मण और धाकड़ समुदाय से पोहरी में विधायक बनते है,भाजपा और कांग्रेस दोनो ही दल इन दोनो की जातियों के नेताओं को टिकिट देना पंसद करते है। अब यहां पिछले 2 विधानसभा चुनाव में तीसरी ताकत के रूप में बसपा के प्रत्याशी कैलाश कुशवाह एक तीसरी शक्ति के रूप में उभरे है।

अब कैलाश कुशवाह की शक्ति की बात करते है। बसपा एक ऐसा दल है जो चुनाव जीतने का बैस अर्थात तैयार करता है। बसपा को फिक्स वोट बैंक है वह कैलाश को दोनों चुनाव मे मिला वही कुशवाह वोट भी कैलाश कुशवाह को दोनों चुनावों में मिला है। वही 2018 के चुनाव की बात करे तो भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी धाकड़ समाज से थे। पोहरी विधानसभा का ब्राह्मण मतदाता फ्री था इसके साथ ब्राह्मण मतदाता के साथ अन्य समाज का मतदाता भी साथ आ जाता है। इस कारण सन 2018 के चुनाव में कैलाश कुशवाह ने रनिंग विधायक के पीछे धकेल दिया था और दूसरे नंबर पर आए थे हार का अंतर भी 7918 था।

अब कैलाश कुशवाह के दूसरे अर्थात उपचुनाव की बात करते है। उपचुनाव में भाजपा के प्रत्याशी थे मंत्री सुरेश राठखेडा कांग्रेस से प्रत्याशी पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला। यहां जंग फिर हो रही थी ब्राह्मण और धाकड प्रत्याशी के बीच यहां ब्राह्मण मतदाता हरिवल्लभ की ओर चला गया। इस चुनाव में कैलाश कुशवाह का दूसरे नंबर पर रहे लेकिन हार का अंतर अधिक था इस बार कैलाश कुशवाहा को 42 हजार वोट मिले थे और पहले चुनाव में 52 हजार वोट प्राप्त हुए थे। सीधे सीधे लिख सकते है कैलाश कुशवाह को अपने पहले चुनाव से 10 हजार वोट कम प्राप्त हुए है। कारण स्पष्ट था की इस बार मैदान में 2 धाकड नहीं थे। एक ब्राह्मण और दूसरा धाकड प्रत्याशी,इस कारण ब्राह्मण वोटर खुल कर कैलाश की पक्ष में नही आ सका और कैलाश के वोट का अंतर अधिक आ गया।

अब क्या कांग्रेस में शक्तिशाली हो जाऐगे कैलाश

इस फोटो से क्या मायने निकाले जा सकते है कि कैलाश कुशवाह कांग्रेस की सदस्यता लेकर कांग्रेस के टिकिट पर चुनाव लड सकते है कैलाश कुशवाहा दमदार प्रत्याशी है इसमें कोई संदेह नही है लेकिन कैलाश कुशवाह जब ही शक्तिशाली है जब दो धाकड आपस में चुनाव लडे। वर्तमान परिदृश्य की बात करे भाजपा में टिकट की दावेदारी करने के लिए रनिंग विधायक सुरेश राठखेड़ा का नंबर एक पर आता है। दूसरे नंबर पर पूर्व विधायक और राज्य मंत्री प्रहलाद भारती इसके बाद भी एक लंबी लिस्ट है।

यह तय है कि भाजपा से यह दोनो ही दावेदार होगें। अब कांग्रेस की बात करे तो ब्राह्मण दावेदारी में कोई नेता का नाम दूर दूर तक नहीं दिखाई दे रहा है। धाकड नेताओं में सबसे ऊपर नाम आता है पूर्व जनपद अध्यक्ष प्रदुमन वर्मा इसके बाद भी कई नाम है। अब कैलाश कुशवाह फिर तीसरी जाति तीसरा गणित के रथ पर चुनाव मैदान में आते है तो एक ताकत के रूप में नजर आएंगे क्यो कि ब्राह्मण,यादव और अन्य समाज खुलकर कैलाश के लिए वोट दे सकती है और मांग सकती है कैलाश कुशवाह तीसरी शक्ति के रूप में सबसे अधिक ताकतवर नजर आते है।

अब राजनीति आगे क्या करवट लेती है यह तो समय ही बता सकता है, संभावना पर ही चुनावी राजनीति के समीकरण बनते है। अब यह कैलाश की अपनी स्वयं के गणित पर तय होगा की आगे वह क्या करेंगे दल बदलेंगे या अपने हाथी पर ही सवारी करेंगे यह तो समय ही बता सकता है। इस बार 2023 के चुनाव में बड़े पैमाने पर नेताओं का पाला बदलने का यह खेल जोर पकड़ेगा जिसमें ना केवल कांग्रेस और भाजपा बल्कि बसपा सहित अन्य दलों से भी लोग पाला बदलकर एक दल से दूसरे दल में खड़े दिखाई देंगे।

गलती ने करे कैलाश दल बदल कर हस्ती खो चुके है शिवपुरी में नेता

पोहरी के पराजित बसपा प्रत्याशी कैलाश कुशवाह की कॉंग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से गत दिनों हुई मुलाकात के वायरल फोटो ने इस चर्चा को और हवा दी है कि वे पाला बदल कर कांग्रेस का दामन थामने की तजवीज में हैं। माना जा रहा है कि शिवपुरी के पोहरी विधानसभा क्षेत्र से 2 मर्तबा बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़े और दोनो ही मर्तवा अच्छा खासा वोट प्रतिशत हासिल करने में सफल रहे बसपा नेता कैलाश कुशवाहा इस बार कांग्रेस से दावेदारी जता सकते हैं,लेकिन दल बदल के खेल में केवल शिवपुरी जिले में वीरेन्द्र रघुवंशी अपनी मंशा के अनुरूप ही राजनीति कर रहे है लेकिन अब उसने टिकिट पर भी संकट के बादल छाए हुए है क्यो कि एक कहावत वीरेन्द्र रघुवंशी पर फिट बैठ गई कि जिससे न्यारे भये वही बट में आ गए।