शिवपुरी के 20 आदिवासी परिवारों से जबरन मजदूरी करा है सोलापुर का ठेकेदार, सांसद और पुलिस ने किया हस्तक्षेप- khaniyadhana News

खनियाधाना।
खबर शिवपुरी जिले के पिछोर अनुविभाग के खनियाधाना थाना क्षेत्र से आ रही हैं कि खनियाधाना क्षेत्र से 20 आदिवासी परिवारों को महाराष्ट्र के सोलापुर जिले स्थित पंढरपुर गांव में बंधक बनाकर मजदूरी कराई जा रही हैं। मजदूरी करने गए लोगों ने अपने परिजनों को यह बात फोन पर बताई। इस पर परिजनों ने थाना खनियाधाना थाना प्रभारी से इस मामले की शिकायत भी है। वही शिवपुरी गुना के सांसद डॉ केपी यादव ने सोलापुर एसपी से इस मामले की फोन पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि अब यह परिवार ट्रेन से शिवपुरी वापस आ गए है।

450 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से गन्ना काटने गए थे

450 रुपए मजदूरी की बात तय कर जिले के खनियाधाना से 20 आदिवासी परिवार महाराष्ट्र के सोलापुर जिले स्थित पंढरपुर गांव गन्ना कटाई को गए थे। परिजनों ने पुलिस को आवेदन देकर कहा कि उन्हें वहां बंधक बना लिया और हफ्ते में 5 किलो आटा दिया जा रहा हैए रात . दिन कुल्हाड़ी लेकर कटाई कराई जा रही है। ऐसे में मजदूरों की हालत बदतर हो गई है। और उन्हें वापस शिवपुरी बुलाया जाए।

SP से बात की, अब मजदूर वापस आ रहे हैं

दरअसल खनियाधाना थाना क्षेत्र के ग्राम शिवनगर के निवासियों ने थाना प्रभारी को आवेदन देकर कहा कि उनके साथियों को 2 महीने पहले कल्लू आदिवासी का बहनोई 450 रुपए महीने प्रतिदिन की मजदूरी पर 20 मजदूर गए थे, जिनके साथ बच्चे भी थे। इस संबंध में जब मजदूरों को परेशानी होने लगी तो उन्होंने इसकी शिकायत अपने परिजनों से खनियाधाना पर मोबाइल के माध्यम से की।

जिस पर परिजनों ने खनियाधाना थाने में शिकायत की और थाना प्रभारी तिमेष छारी ने इस संबंध में सोलापुर पुलिस कंट्रोल रूम से बात कर आदिवासी मजदूरों को छुड़वाने की बात कही। वहीं

सांसद ने महाराष्ट्र DGP और सोलापुर SP से बात की

इस मामले का शिकायती आवेदन सांसद डॉ केपी यादव के पास पहुंचा था संसद ने महाराष्ट्र के डीजीपी और सोलापुर एसपी से बात कर इन्हें छोड़ने की बात कही ताकि ट्रेन से यह आदिवासी शिवपुरी जिले में आ सके। इस मामले में खनियाधाना प्रभारी तिमेश छारी ने कहा कि शिकायती आवेदन आने पर हमने पता किया, जिसमें बताया गया कि आदिवासी परिवार के सदस्य मजदूरी करने गए थे।

जिन्होंने पैसे पूरे लेने के बाद मजदूरी पूरी नहीं की जिसके चलते ठेकेदार से उनका कुछ विवाद हुआ। हमने ठेकेदार से बात करने की कोशिश की लेकिन ठेकेदार का फोन नहीं उठा। हमने पुलिस कंट्रोल रूम से बात कर इन आदिवासियों को वहां से शिवपुरी भेजने की बात कही। अब यह लोग यहां आ गए हैं।