Shivpuri News- माधव नेशनल पार्क को मिली सैटेलाइट कनेक्टिविटी, टाइगर नए साल में आएंगे

शिवपुरी।
शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में योजना के अनुसार 15 जनवरी तक बाघ आ सकत हैं। प्रोजेक्ट फायनल की ओर हैं नए साल में शिवपुरी को यह सौगात मिल सकती है। माधव नेशनल पार्क में मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करते हैं इस कारण जंगल के अंदर बाघो पर नजर रखने के लिए कम्युनिकेशन की समस्या आ रही थी। 

बाघों की सुरक्षा और गतिविधि जानने के लिए माधव राष्ट्रीय उद्यान को केंद्र सरकार से सैटेलाइट कनेक्टिविटी की अनुमति मिल गई है। अब पुलिस की तरह नेशनल पार्क के कर्मचारी भी वायरलेस सेट पर कनेक्ट रहेंगे और संवाद करेंगे। इसके लिए पार्क के अंदर एक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।

कनेक्टिविटी के लिए राष्ट्रीय उद्यान की रेंज में सात टावर पहले से मौजूद हैं और इन्ही के जरिये वायरलेस को ऑपरेट किया जाएगा। इन्हें दोबारा प्रचलित करने का काम किया जा रहा है। दूसरी ओर शिवपुरी में लाए आने वाले बाघो को भी चिन्हित कर लिया गया है। 

हालांकि अभी कोई भी अधिकारी पुष्ट रूप से इसकी जानकारी नहीं दे रहा हैए लेकिन अभी तक पन्नाए भोपाल और बांधवगढ़ से एक.एक बाघ लाने पर मुहर लग चुकी है। इसमें एक मादा और दो नर वाघ हैं। सूत्रों के अनुसार बाघ भी चिन्हित कर लिए गए हैं और तय टाइमलाइन के अनुसार इन्हें 15 जनवरी तक शिवपुरी में बसा दिया जाएगा।

18 कर्मचारी रखेंगे बाघो पर नजर

वाघों को 15 दिन तक बाड़े में रखे जाने के बाद खुले में विचरण के लिए छोड़ा जाएगा। इस तरह यदि वाघ 15 जनवरी को आए तो उन्हें 31 जनवरी को खुले में छोड़ने की योजना है। खुले में छोड़े जाने के वाद वाघों की 24 घंटे निगरानी की जाएगी। तीन वाहन और 18 कर्मचारियों की इसमें ड्यूटी लगाई जाएगी जो अलग.अलग शिफ्ट में वाघों पर नजर रखेंगे। इससे शुरुआत में वाघों के व्यवहार की निगरानी होगी। फिर राष्ट्रीय उद्यान में आने वाले पर्यटकों को उनकी लोकेशन भी उपलब्ध कराई जा सकेगी।

बाघों को रेडियो कॉलर लगाई जाएगी

24 घंटे एक टीम इन सिमलों का पीछा करते हुए बाघों की लोकेशन की जानकारी अपडेट करती रहेगी। इससे एकत्रित डेटा से यह भी पता चल सकेगा कि बाघ किस क्षेत्र में टेरिटरी बना रहे हैं। अमूमन मादा बाघ ऐसी जगह पर टेरिटरी बनाती है जहां पर इंसानों और तेंदुआ, लकड़बग्घा जैसे जंगली जानवरों की पहुंचते हो । दिनभर विचरण के बाद वह यहीं आराम करना पसंद करती है और नर बाघ भी इसी के आसपास रहते हैं।