व्यापार में सेवा धर्म का फार्मूला लगाकर अपने प्रतिष्ठान को लैंडमार्क बना दिया, पढिए भाइयों की कहानी

शिवपुरी। ऐसे ही कोई ब्रांड नही बन जाता अपने आप को ब्रांड बनाने के लिए या अपने प्रतिष्ठान को शहर में लैंडमार्क बनाने के लिए वर्षों की मेहनत और कर्म पथ रूपी तपस्या का परिणाम होता हैं। हम बात रहे हैं कि शहर में दो भाईयो के व्यक्तित्व की,हो सकता है कि आप उन्हें व्यक्तिगत रूप से या नाम से नही जानते होंगे,लेकिन इनके द्वारा स्थापित अपनी दुकान आज शहर में एक लैंडमार्क हैं।

इस दुकान पर व्यापार से अधिक सेवा धर्म होता रहा है, आज भी अनवरत जारी हैं। या यूँ कह लो कि व्यापारी और ग्राहक के बीच एक विश्वास का मजबूत पुल इनके संस्कार ने जीवंत किया है जो आज भी उनके नहीं होने के बाद भी जारी हैं। हम बात कर रहे है शहर में अपनी दुकान को लैंडमार्क के रूप में स्थापित करने वाले दो भाइयों की। अब इस लैंडमार्क को गोयल मेडिको एवं विष्णु एजेंसी ने उन्हें जीवित रखा हैं।

बडे भाई स्वः श्री वल्लभ दास गोयल, छोटे भाई स्वः श्री विष्णुदास गोयल की इनके द्वारा गोयल मेडिको एंव विष्णु एजेंसी को जब खोला गया था जब शहर की आबादी कुल हजारो में होगी। गोयल मेडिका शहर की मेडिकल सबसे पुरानी दुकान हैं। बड़े भाई श्री स्वः श्री वल्लभ दास गोयल राजस्थान के बिटस (BITS) प्लानी से बी फार्मा कर के शिवपुरी आए थे। छोटे भाई स्वःश्रीविष्णु दास गायेल रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट थे इसलिए सेवा कार्य हेतु मेडिकल की दुकान संचालित करने का काम किया था।

आज का युवा वर्ग शायद उन्हें नहीं जानता होगा,लेकिन यह वह चेहरे थे या यूँ कह लो की यह वह दुकान थी जो इमरजेंसी में तत्काल याद आती थी,इस दुकान की शटर को काट-कर एक खिडकी बनाई गई थी। जिसमें रात्रिकालीन सेवा अर्थात इमरजेंसी में दवा दी जाती थी बस आपको एक बार शटर का बजाना था अंदर से किसी फौजी के तरह अपनी ड्यूटी पर तैनात स्वः श्री वल्लभ दास गोयल एवं विष्णुदास गोयल तत्काल आपको दवा उपलब्ध करा देते थे।

वर्षो छोटी खिडकी, जीवन की रक्षा करती रही

अपने लिए व्यापार या नौकरी सभी लोग करते हैं। लेकिन इन दोनो भाईयो ने अपना और अपने परिवार के जीविका के लिए ऐसा मार्ग चुना,जिससे लोगों की सेवा होती रहे। गोयल मेडिको पर इमरजेंसी में जीवन रक्षक के रूप में आमजन को रात में दवाएं उपलब्ध कराई जाती थी। रात में दवा वही लेने जाता हैं जिसकी जान पर बन रही हो या असहनीय दर्द है रात में दवा देने का क्रम यह अनवरत जारी रहा।

नाम मात्र के पैसो में मौसमी बीमारियों का इलाज

गोयल भाईयो की यह सोच थी सबको सस्ता इलाज मिले। श्री स्वः गोयल ब्रदर्स फार्मासिस्ट थे और दवाइयों का लंबा अनुभव और ज्ञान था। इस कारण प्रतिदिन आमजन अपनी बीमारी बताकर दवा लेने आते थे। दवाओं का मूल्य कम से कम होता था। ऐसे सैकड़ों लोग प्रतिदिन दवा लेते थे और दवाओं के प्रभाव से सही भी होते थे। एक विश्वास था लोगो काश् की गोयल साहब से गोली ले लेलो सही हो जाओगें। कुल मिलाकर कम से कम मूल्य में इलाज की सुविधा देने का एक संकल्प मन में था। साथ में शिवपुरी जैसे छोटे शहर में में दवा बनाने की फैक्ट्री खोली थी,जिसका नाम नियो केम लेबोरेटरी था जिसमें बनी दवा पूरे मप्र में एवं देश की राजधानी दिल्ली तक जाती थी।

सेवा भाव में लीन.भाइयो ने आदर्श जीवन जिया

वैसे तो शिवपुरी के गोयल परिवार के सभी सदस्यों से पूरा शहर परिचित हैं समाज में उच्च सामाजिक स्थान के साथ साथ यह परिवार सेवा एवं भक्ति मार्ग पर हमेशा चला हैं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण शहर के बीचो बीच गांधी चौक पर स्थित गोयल परिवार के मुखिया स्वर्गीय श्री रामजीदास गोयल ने लगभग 100 वर्षो पूर्व लक्ष्मीनारायण मंदिर का निर्माण कराया। इसलिए परिवार में ईश्वर की प्रति आज भी अगाध श्रद्धा है।

शिवपुरी को बसाने में अहम भूमिका रही है गोयल परिवार की

राजस्थान के टीवा बसई गांव से इस परिवार के मुखिया सेठ सुआलाल जी गोयल 1888 में शिवपुरी आए थे और इसमें सबसे खास बात यह रही की यह अपने साथ गांव से पुरोहित और वैदय भी अपने साथ लाए थे। स्वर्गीय श्री मंत माधौ महाराज से चौराहे का एक कार्नर लेकर नई शिवपुरी बसाने मे पहला कदम रखा था। वही सेठ सुआलाल जी गोयल वह शख्सियत रहे जो इस शिवपुरी शहर के प्रथम नगर पालिका अध्यक्ष सिंधिया राजवंश ने नियुक्त किया था।