9 करोड़ का बिल का 90 लाख का सेटल करने वाले CMO को मिली सस्पेंड की सजा @ एक्सरे ललित मुदगल

शिवपुरी
। सीएम के चौपर वाले दौर में अधिकारियों का चटकना तय हो चुका हैं। शिवपुरी में कुछ ऐसा ही हुआ है सीएम ने मंच पर टहलते हुए शिवपुरी नगर पालिका सीएमओ शैलेष अवस्थी और कोलारस फूड इंस्पेक्टर मांझी को सस्पेंड कर दिया। सीएमओ शैलेष अवस्थी पर कार्य में लापरवाही और फूड इंस्पेक्टर पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा था। जानकारों का कहना है कि सीएमओ शैलेष अवस्थी पर जलावर्धन योजना और सीवर प्रोजेक्ट की लापरवाही का आरोप लगाया था, लेकिन जलावर्धन के पाइप को 8 साल पूर्व डले चुके है और सीवर प्रोजेक्ट नगर पालिका के कार्यक्षेत्र में न आकर पीएचई में आता है, सीएमओ राजनीति का शिकार हुए हैं।

सीएमओ शैलेष कुमार अवस्थी की कार्यप्रणाली शिवपुरी में आए लगभग 80 प्रतिशत सीएमओ से भिन्न थी यह आकडे बोल रहे हैं। शहर को पानी पिलाने के लिए या जो जल मडीखेडा से आता है या फिर चांदपाठा से और बोरवेल से आता है। सीधे शब्दों में लिखे तो नगर पालिका शिवपुरी जल संसाधन से पानी खरीदती है। मडीखेडा और चांटा पाठा तालाब से पानी का बिल जल संसाधन विभाग का नगर पालिका शिवपुरी पर 9 करोड़ रुपए का चल रहा था।

यह बिल पिछले कई सीएमओ के कार्यकाल से लंबित था, लेकिन सीएमओ शैलेष कुमार अवस्थी ने इस बिल पर आपत्ति दर्ज की और सेटलमेंट किया यह बिल मात्र 90 लाख रुपए में सेटलमेंट किया। यह लाभ होता है कि शिवपुरी जैसे शहर को फ्रेश सीएमओ मिलने का, इससे पूर्व नगर पालिका शिवपुरी में प्रभारी सीएमओ ने कार्यकाल अधिक रहा हैं।

अवस्थी के कार्यकाल में 5 गुना बड़ा है राजस्व

कंगाल हो चुकी नगर पालिका शिवपुरी का सीएमओ शैलेष अवस्थी ने 5 गुना राजस्व बढा दिया या यूँ कह लो की नगर पालिका शिवपुरी का आत्मनिर्भर बना दिया इससे पूर्व कर्मचारियों को वेतन देने के लाले पड़ रहे थे। वर्तमान की बात करे तो इस समय नगर पालिका शिवपुरी के लगभग 20 करोड़ रुपए के टेंडर प्रक्रिया में हैं यह कार्य नगर पालिका स्वयं अपनी आमदनी पर करा रही हैं। वही सीएमओ शैलेष  अवस्थी ने डीजल की बडी चोरी नगर पालिका में रोकी है।

इससे पूर्व प्रत्येक माह में डीजल की 20 लाख रुपए की खपत थी जिसे 11 लाख रुपए पर लेकर आए साल भर का आंकड़ा निकाले तो 1 करोड़ रुपए का डीजल की बचत नगर पालिका शिवपुरी अब करने लगी हैं, पैसे बचत की बात करे तो सिद्धेश्वर मेला जिसे लगाने में नगर पालिका शिवपुरी को 25 से 30 लाख रूपए खर्च करना होता था लेकिन सीएमओ शैलेष कुमार अवस्थी ने मॉडल चेंज किय और ठेकेदार से मेला लगवाने का निर्णय लिया और इस बार 18 लाख रुपए की आय हुई। 25 लाख बचे और 18 लाख रुपए प्राप्त भी हुए कुल मिलाकर 40 लाख रुपए की आय हुई हैं।

नामांतरण प्रक्रिया में सुधार

शिवपुरी नगर पालिका में कोरोना काल से पूर्व की नामांतरण की फाइल लटकी थी। इन नामांतरण  फाइल  को पूर्ण करने के लिए कलेक्टर शिवपुरी अक्षय कुमार सिंह के मार्गदर्शन में प्रशासक काल में कैंप लगवाए गए वर्षो से लटक रहे नामांतरण की प्रकरणो का निराकरण किया गया। नगर पालिका के इतिहास में पहली बार नामांतरण के मामले के कैंप लगाए गए थे इस परिणाम स्वरूप  लगभग 250 फाइलों का निपटारा किया। वही मप्र के वह निकाय जो नगर निगम की श्रेणी में आती है उन्हें छोड़कर शिवपुरी जैसी नगर पालिकाओ की बात करे तो अभी तक शिवपुरी नगर पालिका सी या डी जैसी रैंकिंग पर थी,लेकिन अब बी या ए रैंकिंग पर हैं। स्वच्छता की राष्ट्रीय रेंक में 400 से 79 वे नंबर पर रही इससे पूर्व शिवपुरी की नेशनल बैंक 94 थी।

वही पीएम आवास योजना में शिवपुरी विधायक ओर मप्र की कैबिनेट मंत्री के आशा के अनुरूप सीएमओ शैलेष अवस्थी ने कार्य किया मप्र की नगर पालिका में सबसे बड़ी रकम बाटने वाली शिवपुरी नगर पालिका रही है शिवपुरी ने 13 करोड़ रुपए हितग्राहियों को प्रदान किए है जो सर्वोच्च स्कोर हैं।

यहां से शुरू हुआ सीएमओ का विरोध

शिवपुरी नगर पालिका में आकडे बताते है कि सीएमओ स्तर से एक एक लाख रूपए की फाइल मंजूर करा ली जाती थी। यह फाइल निर्माण समान खरीदी की होती थी लेकिन सीएमओ शैलेष कुमार अवस्थी ने इस प्रक्रिया को रोका और एक एक लाख की फाइलों को टेंडर प्रक्रिया मे ले कर आए यहां नगर पालिका का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार रोका गया वही सबसे बड़ा भ्रष्टाचार प्रत्येक वार्ड में मुरम और कत्तलो के बिल रोके गए इनको भी टेंडर प्रक्रिया में लाया गया। प्रत्येक वार्ड में हर साल मुरम और कत्तलो को लाखों के बिलों का भुगतान होता आया हैं।

वही अवैध कॉलानी मामलो के 13 कॉलोनाइजरो पर एफआईआर भी सीएमओ के लिए संकट बना हैं। सीएमओ शैलेष अवस्थी ने 5 कॉलोनियो को वैदधा प्रदान की है इससे पूर्व संतुष्टि को छोड दे शिवपुरी में एक भी वैद कालोनी नही थी। वही नगर पालिका में ठेकेदारों के घर पर फाइल रहती थी इसमें सुधार करते हुए नगर पालिका के 5 कर्मचारियों को एफआईआर कराने की नोटिस भेजे गए। कुल मिलाकर लिख सकते है कि शिवपुरी की नगर पालिका की कार्यप्रणाली सुधार जा रही थी और इसे लिखने में कोई अतिशयोक्ति नही होगी।

सीमएओ हुए है राजनीति का शिकार

सीएमओ शैलेश अवस्थी राजनीति का शिकार हुए हैं। शिवपुरी नगर पालिका में भाजपा पार्षदों की बात करे तो 2 धडे सक्रिय हें एक यशोधरा राजे सिंधिया समर्थक दूसरा सांसद केपी यादव समर्थक सक्रिय है। सांसद केपी यादव ने ही मंच से नगर पालिका शिवपुरी के सीएमओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था। सीएम ने टहलते हुए सीएमओ के सस्पेंड की घोषणा कर दी। गलत जानकारी सीएमओ की दी गई इसलिए मंच से सीएमओ शैलेष अवस्थी को सस्पेंड कर दिया गया। दो बाते जो सबसे बडी हैं,सीएमओ के हस्ताक्षर से 90 हजार की फाइलो को टेंडर की प्रक्रिया में लाना यह नगर पालिका का छोटे से एमाउंट में बड़ा भ्रष्टाचार था और अवैध कॉलोनियों का मामला सीएमओ की सस्पेंड होने का कारण बना हैं।