बधाई हो कलेक्टर साहब: 24 घंटे में फिर टूटा दूसरी बार संविधान, प्रशासन सीमा विवाद की लड़ाई में उलझा - Shivpuri News

एक्सरे ललित मुदगल @ शिवपुरी। शिवपुरी के लोकप्रिय कलेक्टर को बधाई कि जिले में महापुरुषों की अवैध प्रतिमा स्थापित करने के रिकॉर्ड में एक और कड़ी जुड़ गई कि जिले में पिछले 24 घंटे में महापुरुषों की दूसरी अवैध प्रतिमा स्थापित हो गई। शुक्रवार की आधी रात में करैरा में संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा संविधान तोडते हुए स्थापित कर दी। वही पिछोर में क्रांतिकारी बिरसा मुंडा की प्रतिमा शनिवार की रात में रातो रात प्रकट हो गई। प्रशासन सिर्फ भाजपा शासन की गुलामी में हाथ बांधे खडा हैं। देश सर्वोपरि की बात करने वाली भाजपा जातिवाद का विरोध नहीं कर पा रही है।

भाजपा क्या कोई भी राजनीतिक दल जातिवाद का विरोध नही सकती,आखिर जाति वोट रूपी दुधारू गाय है विरोध किया तो लात पड़ जाऐगी। शिवपुरी प्रशासन ने बीच का रास्ता निकाल लिया है अज्ञात पर मामला दर्ज.......किसी पर भी कार्रवाई नहीं, इस कारण अवैधानिक रूप से महापुरुषों की प्रतिमा स्थापित करने वाले लोगों को बल मिल रहा हैं।

करैरा के मामले की बात करे तो  करैरा में शुक्र-शनिवार की दरम्यानी रात अज्ञात असामाजिक तत्वों ने डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कर दी है। इससे पूर्व यहां पर पखवाड़े भर पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा स्थापित कर दी थी। इस मामले में ADM से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा स्थापित की गई है वह राजस्व की जमीन नहीं है उक्त जमीन वन विभाग की जमीन है उन्हें पत्र लिख दिया है। वही संविधान निर्माता की प्रतिमा संविधान तोड कर स्थापित की गई इस वह चुप्पी साध गए।

पिछोर विधानसभा में शनिवार रविवार की रात पिछोर विधानसभा के बदरवास पंचायत के सोनी खेडा गांव में क्रांतिकारी बिरसा मुंडा की अवैधानिक रूप से प्रतिमा स्थापित कर दी। इससे पूर्व इसी गांव में एक माह पूर्व संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा की प्रतिमा अवैध रूप से स्थापित कर दी। जैसे करैरा में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा में शिवपुरी प्रशासन सीमा की लड़ाई लडने का बहाना बनाया है ऐसे ही सोनी खेडा गांव में निजी और सरकारी भूमि का विवाद बनाकर पीछे हट गया।

पुनः पिछोर की बात करते हैं कि अवैध रूप से अवैध स्थापित करने की परंपरा बना चुके पिछोर से क्रम अब करैरा भी पहुंच गया हैं। पिछोर में लगभग 1 दर्जन से अधिक महापुरुष की प्रतिमा अवैधानिक रूप से स्थापित की जा चुकी है सभी मामलों में अज्ञात पर मामला दर्ज हो चुका हैं। किसी भी मामले में अज्ञात ज्ञात नहीं हो सके हैं।

राजनीति के साथ षड्यंत्र से इंकार नहीं
जिले में लगातार स्थापित की जा रही मूर्तियों को लेकर जब पुलिस और प्रशासन से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो यह पूरी राजनीति मूर्ति स्थापना की नहीं बल्कि समाज को बांटने की राजनीति है। एक ओर जहां इससे समाज को कई हिस्सों में बांटने का प्रयास किया जा रहा हैं।

वहीं दूसरी ओर शासन और प्रशासन को भी एक समाज का पक्षधर और दूसरे समाज का विरोधी बताने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में प्रशासन का खुफिया विभाग रिपोर्ट एकत्रित करने में भी लगा हुआ है। वहीं दूसरी ओर कुछ मूर्तियां इसलिए  स्थापित की जा रही हैं ताकि महंगी जमीनों न पर अतिक्रमण किया जा सके। इस कारण तनाव की स्थिति भी निर्मित हो रही है।

लेकिन इस पूरे में हमारे कलेक्टर शिवपुरी भी बधाई के पात्र हैं,शासन के प्रत्येक नियम ओर कानून का पालन करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी हैं,जिले में लगातार सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन टूट रही हैं। लेकिन सत्ता के दबाव में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। एक दिन ऐसा भी दूर नही होगी कि किसी के घर के आगे रास्ता बंद कर कोई रातो रात किसी महापुरुष की प्रतिमा स्थापित कर दे और जय जयकार के नारे लगाना शुरू कर दे इस स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाएगा,वही दूसरी ओर यह भी लिखना प्रासंगिक होना धर्म प्रधान देश में नेशनल हाईवे के बीच में आने वाले मंदिरों को स्थान बदल दिया गया,लेकिन धर्म के आगे अब जातिवाद हावी होने लगा है मजाल क्या है प्रशासन की वह एक भी अवैध रूप से स्थापित प्रतिमा रखने वाले असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई कर मूर्तियों का स्थान परिवर्तन करा दे।