राजगद्दी को आदिकाल से ही व्यासगद्दी ने दिया है सर्वोत्तम मार्गदर्शन: पाराशर- Shivpuri News

संजीव जाट @बदरवास। आदिकाल से संत राष्ट्र की दिशा और दशा तय करते आ रहे हैं और आज भी हम अपनी संस्कृति और प्राचीन ऋषि मुनियों के बताए मार्ग पर चलकर ही राष्ट्र को परम वैभव के शिखर पर ले जा सकते हैं, उक्त बात बदरवास आए अंतरराष्ट्रीय भागवताचार्य डॉ श्याम सुन्दर पाराशर ने पत्रिका को दिए विशेष साक्षात्कार में कही। देश विदेश में लगभग बारह सौ भागवत कथा कर चुके अंतरराष्ट्रीय भागवत कथाकार श्याम सुंदर पाराशर बदरवास में आयोजित अष्टोत्तरशत भागवत एवं शतचंडी महायज्ञ में पधारे हैं।

वर्तमान परिदृश्य में संतों की भूमिका के प्रश्न के जवाब में डॉ श्यामसुंदर पाराशर ने कहा की प्रारंभ से ही राजगद्दी को व्यास गद्दी सदैव उचित मार्गदर्शन और दिशा देती आ रही है जिससे सुखी और सदमार्ग के रास्ते पर राज चलते रहे।

पश्चिमी सभ्यता के भारत और सनातन धर्म पर हो रहे हमले पर जवाब देते हुए पाराशर ने बताया कि पश्चिमी देश भले ही सुख सुविधा और आर्थिक संपन्न हैं लेकिन वहां शांति नहीं है और अधिकांश लोग डिप्रेशन में हैं और हमारी भारतीय सनातन धर्म में ही शांति का मार्ग खोज रहे हैं। आज अनेक देशों में संस्कृत के श्लोकों से कार्यक्रमों का प्रारंभ किया जाता है। इसलिए हमें हमारी संस्कृति और धर्म पर गर्व होना चाहिए तथा अंधी पश्चिमी दौड़ से बचते मर्यादित रहते हुए राष्ट्र उन्नति में सदैव लगे रहना चाहिए।

कथा से धार्मिक प्रभाव के अलावा राष्ट्र को क्या फायदा है, इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भागवत कथा हमेशा संदेश देती है की संपूर्ण दुनिया शांति,प्रेम और आपसी भाईचारे को ह्रदय में धारण कर सदा कल्याण की भावना रखनी चाहिए। कथा के माध्यम से व्यक्ति का कल्याण होगा और जब व्यक्ति का कल्याण होगा तो राष्ट्र कल्याण निश्चित है।

वेदों का अनुसरण भारत को विश्व गुरु बना सकता है तो विज्ञान को किस रूप में देखते हैं के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि आदिकाल से भारत वेद भूमि है और आदि ऋषि मुनियों ने विभिन्न प्रकार के कला कौशल के प्रयोग करके उन्नत तकनीकी दी थी और आज का विज्ञान भी उसी का परिष्कृत रूप है। आधुनिक विज्ञान की अच्छी बातें हैं उन्हें हमें जानना और मानना चाहिए तथा प्राचीन उन्नत तकनीकी और धर्म की जो सीख है उसे भी मानना चाहिए। धर्म और विज्ञान एक दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करते हैं।