SHIVPURI NEWS- गायत्री कॉलोनी में अवैध कब्जे के खिलाफ मगरमच्छ का धरना, 3 घंटे चला

शिवपुरी शहर में नदी और तालाब पर अतिक्रमण करके कॉलोनी काट दी गई है। भू माफिया के साथ मिलकर प्रशासनिक अधिकारियों ने इन कॉलोनियों को लीगल करार दे दिया है परंतु मगरमच्छ नगरपालिका के नक्शे नहीं मानते। यही कारण है कि शिवपुरी शहर की कुछ कॉलोनियों में नियमित रूप से मगरमच्छ निकल रहे हैं। वार्ड क्रमांक 7 की गायत्री कॉलोनी में सुबह 6:00 बजे एक मगरमच्छ आ गया। 3 घंटे तक बैठा रहा।

प्रकृति सभी प्रकार के जानवरों को रहने के लिए उनकी जगह आरक्षित करती है। जैसे चीता के लिए कूनो नेशनल पार्क का जंगल आरक्षित था। भारत में 106 नेशनल पार्क है। कई नेताओं ने अपने इलाके में चीता प्रोजेक्ट ले जाने की कोशिश की परंतु संभव नहीं हो सका। 70 साल बाद भी चीता अपनी जमीन को नहीं बोला और 8500 किलोमीटर दूर आकर भी खुद को कंफर्टेबल फील कर रहा है।

मगरमच्छों के साथ भी यही है। शिवपुरी के तालाब और नाले मगरमच्छों का प्राकृतिक घर है। भू माफिया ने अतिक्रमण किया और अधिकारियों ने लैंड रिकॉर्ड बदल दिया। मगरमच्छों के घर को इंसानों का रिहायशी इलाका घोषित कर दिया, लेकिन मगरमच्छ ना तो नगरपालिका की सीमाएं मानते हैं और ना ही कलेक्टर से डरते हैं। प्रकृति ने उनके लिए जो आरक्षित किया है वह उस जमीन पर नियमित रूप से आ रहे हैं। यदि उन्हें उनका घर वापस नहीं लौटाया गया तो अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि शिवपुरी को क्या कीमत चुकानी होगी, लेकिन इतिहास में कुछ पुरानी घटनाएं दर्ज हैं जिनसे शपथ लिया जा सकता है।