Shivpuri News- संसार में आकर कुछ बनो या न बनो बस इंसान बन जाओ तो जीवन सार्थक: बाल मुनि

शिवपुरी। संसार में आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है? इसका एक ही जवाब है बस अपनी सांसारिक यात्रा में इंसान बन जाओ। इससे बढ़कर उपलब्धि क्या हो सकती है। जो इंसान बन गया उसका जीवन सार्थक हो गया। यह विचार है प्रसिद्ध जैन संत कुलदर्शन विजय जी के जो आराधना भवन में विशाल धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।

धर्मसभा में उन्होंने कहा कि मरने के बाद स्वर्ग मिलेगा या नहीं मिलेगा यह निश्चित नहीं है। लेकिन आप चाहें तो जीते जी अपने जीवन को स्वर्ग बना सकते हैं। धर्मसभा में तपस्वियों का सम्मान भी श्वेताम्बर जैन समाज द्वारा किया गया।

आचार्य कुलचंद्र सूरि जी महाराज के शिष्य पंन्यास प्रवर कुलदर्शन विजय जी ने बताया कि बदलाव जीवन का नियम है] जो समय के साथ-साथ अपने आप को नहीं बदलता वह खत्म हो जाता है और यह नियम चाहे सांसारिक क्षेत्र हो] चाहे व्यापार का क्षेत्र हो या चाहे धर्म का क्षेत्र हो, हर क्षेत्र में प्रभावी है।

व्यापारिक क्षेत्र की बात करते हुए उन्होंने इस संदर्भ में मोबाइल बनाने वाली कम्पनी नोकिया और कैमरे रील बनाने वाली कम्पनी कोडेक का उदाहरण देते हुए कहा कि बदलाव की मानसिकता न होने से दोनों कंपनियों का ह्रास हुआ है। विकास और उत्थान के लिए बदलाव अनिवार्य शर्त है।

आध्यात्मिक क्षेत्र की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन यदि बचाना है तो बदलना अनिवार्य शर्त है। लेकिन यह बदलाव कैसे हो, कहां से प्रारंभ करें, इसे भी जैन संत कुलदर्शन जी ने बखूबी तर्कसंगत अंदाज में स्पष्ट किया।

जीवन बचाने के लिए चार कदम उठाना आवश्यक
संत कुलदर्शन विजय जी ने बताया कि जिस तरह से हर 6 माह में हम अपने शरीर का चैकअप कराते हैं, ठीक उसी तरह से अपने मन का चैकअप भी आवश्यक है और यह चैकअप 3 माह] 6 माह और साल भर में नहीं बल्कि हर तीन घंटे में होना चाहिए।

क्या हो इसकी प्रक्रिया? उन्होंने स्पष्ट करते हुए बताया कि निर्णय लीजिए आपने इतने सालों में क्या किया, क्या मिला और आप क्या बने। अपने दादा गुरु प्रेम सूरि जी के उपदेश का हवाला देते हुए जैन संत कुलदर्शन विजय जी ने कहा कि वह कहा करते थे कि चेक करना है तो अपने मन के राग और द्वेष को चेक करो। अपनी बुराईयों को पहचान कर फिर अपने आप को बदलो।

बदलाव भी धीरे-धीरे नहीं बल्कि एक झटके में आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलाव की प्रक्रिया में आपको चुनौती का सामना भी करना पड़ेगा। अच्छे कामों में विघ्न आते ही हैं लेकिन उन विघ्रों से विचलित नहीं होना है और जब यह स्थिति बन जाएगी तो जीवन आनंद से परिपूरित हो जाएगा। यह जीवन का बचाव, संरक्षण और सार्थकता है।

धर्मसभा में तपस्वी बहन रूचि सांखला का हुआ सम्मान
आचार्य कुलचंद्र सूरि जी महाराज साहब की प्रेरणा से समाजसेवी तेजमल सांखला की पुत्रवधू श्रीमती रूचि रितेश सांखला ने 8 उपवास की तपस्या पूर्ण की। आज आठवें उपवास के दिन आचार्य श्री जी ने तपस्वी बहन रूचि सांखला को उपवास के पच्चक्कान कराए और उन्हें आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर श्वेताम्बर जैन समाज की ओर से तपस्वी बहन रूचि सांखला का सम्मान किया गया। जैन संत की प्रेरणा से श्वेताम्बर जैन समाज के भाई और बहन बड़ी संख्या में चार्तुमास काल में तपस्या कर रहे हैं।