BJP में नपाध्यक्ष की कुर्सी के लिए गुटबाजी शुरू: यह आंकड़े बना और बिगाड़ रहे हैं दीप्ति भानू दुबे का गणित- Shivpuri News

शेखर यादव@ शिवपुरी। निकाय चुनाव में शहर ने अध्यक्ष पद की कुर्सी के लिए तस्वीर साफ हैं,बहुमत भाजपा के पास है,लेकिन भाजपा में गुटबाजी शुरू हो चुकी हैं,अभी स्पष्ट रूप से सामने कोई नहीं हैं लेकिन राजनीतिक गोटिया बिछाना दावेदारों ने शुरू कर दी है। शह और मात का खेल शुरू हो चुका हैं।

भाजपा का काफी हद तक अध्यक्ष पद का चेहरा साफ हैं,ऐसा माना जा रहा हैं की वार्ड क्रमांक 3 से निर्वाचित पार्षद दीप्ति भानू दुबे को प्रथम दृष्टया ही अध्यक्ष पद का दावेदार माना जा रहा हैं। यह शहर के हित में होगा अगर दीप्ति भानू दुबे नपाध्यक्ष बनती हैं तो शहर के विकास में रुकावट नहीं आएगी,योजनाओं की कमी नहीं होगी और दीप्ति दुबे के पति भानू दुबे को नगर पालिका का लगभग 15 वर्षों का अनुभव हैं वह 2 बार पार्षद और नपा उपाध्यक्ष रहे है और सबसे बडी और अहम बात यह है कि भानू दुबे शिवपुरी विधायक और प्रदेश की कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के काफी नजदीक हैं और राजे भी यह चाहती हैं कि शहर के विकास के लिए उनके पसंद का अध्यक्ष बने।

राजनीति में पद की लालसा सभी को होती हैं,इस कारण यह लालसा बगावत भी कर देती हैं। वार्ड क्रमांक 26 से जीतीं सरोज रामजी व्यास को भी अध्यक्ष पद का दावेदार माना जा रहा हैं राम जी व्यास नरेन्द्र सिंह तोमर खेमे से माने जाते हैं, रामजी व्यास का कहना है कि संगठन स्तर पर अपनी बात रखी है। शीर्ष नेतृत्व पार्षदों की इच्छा जान ले और रायशुमारी करे। मैं खुले मंच पर बहस के लिए तैयार हूं और मेरे पास विकास का विजन भी है,वही भानू दुबे का कहना है कि संगठन स्तर से यह तय होगा की अध्यक्ष कौन बनेगा,हम संगठन के निर्णय के साथ है।

लेकिन अंदर ही अंदर भाजपा की गुटबाजी शुरू हो चुकी हैं और यह गुटबाजी खुलकर सामने नहीं आ रही है लेकिन यह तय है कि रामजी व्यास ने अपनी अध्यक्ष पद के लिए राजनीतिक गोटिया बिछाना शुरू कर दी हैं। नरेन्द्र सिंह तोमर के खेमे से शिवपुरी के 5 पार्षद चुनकर आए हैं यह संख्या बल सीधे सीधे अध्यक्ष तो नहीं बन सकता लेकिन किसी को अध्यक्ष बनने की राह में बड़ा रोड़ा अटका सकता है।

वर्तमान राजनीति की बात करें तो इस समय कांग्रेस संगठन दिशा हिन हैं 10 पार्षद होते हुए भी एक भी बयान नही आया कि हम अध्यक्ष बना रहे हैं या हम कोशिश कर रहे है कांग्रेस पार्षद पार्टी की गाइड लाइन से बहार जाकर कही भी वोट कर सकते हैं,साथ में निर्दलीय स्वतंत्र है वे किसी पार्टी की गाइड लाइन मं नहीं हैं वे व्यक्तिगत संबंधों पर जा सकते है,यह गणित दूसरे गुट की सबसे मजबूत ताकत बनता दिख रहा है। हालकि राजनीति में कोई भी गणित नहीं चलता है लेकिन संभावना राजनीति का आधार होती हैं,इसे भी झुठलाया नही जा सकता है।

नगर पालिका मे महिला शक्ति भारी

इस बार नगर पालिका अध्यक्ष के लिए महिला अनारक्षित सीट है। जो भी महिला पार्षद अध्यक्ष पर पर चुनी जाएंगी उनका पुराना राजनीतिक अनुभव शून्य ही है। ऐसे में महिला अध्यक्ष रबर स्टांप ही साबित होंगी और अध्यक्षी पति के द्वारा ही की जाएगी। हालांकि नगर परिषद में 20 महिला पार्षद रहेंगी। इनमें भी अधिकांश के पति पूर्व में पार्षद रह चुके हैं।

यह स्पष्ट दिख रही है एक अलग तस्वीर

भाजपा के 22 पार्षद हैं जिनमें से अधिकांश कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के समर्थक हैं। ऐसे में उनका पक्ष भानु दुबे की ओर रहना तय है। हालांकि भाजपा में सिंधिया समर्थक इस्माइल खान की पत्नी भी चुनाव जीती हैं। सांसद कोटे से वार्ड 19 और 38 में टिकट था और वे जीत गए हैं। वार्ड 31 से सोनू बिरथरे का टिकट था और वहां भी प्रत्याशी ने जीत हासिल की है।

इसके अलावा वार्ड 5 सहित कुछ अन्य वार्ड संगठन स्तर के टिकट हैं जो खेमा बदल सकते हैं। ऐसे में यदि भाजपा कुछ पार्षद खेमा बदलते हैं और कांग्रेस पार्षदों का समर्थन कोई अन्य प्रत्याशी जुटा लेता है तो उसे फिर निर्दलीयों की भूमिका अध्यक्ष तय कर सकती है। गुरुवार को कुछ राम जी व्यास सहित कुछ पार्षदों का केंद्रीय सिंधिया समर्थकों से मुलाकात भी चर्चा का विषय रही।