जेल में मिला मोबाइल पिंकी का नहीं ​बल्कि साक्षी का है, डॉ. पूनम के जरिए हुआ था खुलासा - Shivpuri News

शिवपुरी। बीते दो दिन से चल रही चर्चाओं के बीच आज जो खबर निकल कर सामने आई है वह चौंकाने वाली है। दरअसल बीते दिनों खबर आई कि शिवपुरी सर्किल जेल में महिला सेल से जेल पुलिस ने एक मोबाइल बरामद किया है। इस खबर के बाहर आते ही जेल में हड़कंप मच गया। इस मामले में जब जेलर का पक्ष जानने का प्रयास किया तो उन्होंने यह तो स्वीकार किया कि महिला सेल में एक चार्जर मिला है। अब चार्जर जब मिलेगा तो मोबाईल मिलना तो स्वभाविक है।

परंतु इसी बीच खबर आई कि यह मोबाइल शिवपुरी जेल में बंद बैंक घोटाले की आरोपी पिंकी का है। अब पिंकी पर आकर यह मामला थम गया और जेल प्रबंधन ने इस मामले में जेल में मोबाइल की खोजबीन की बात कहकर पल्ला झाड लिया। परंतु इसी बीच आज जो खबर सामने आई है वह चौंकाने बाली है। खबर है कि जेल में जो मोबाइल मिला है वह पिंकी का नहीं बल्कि सिद्धि विनायक भ्रूण हत्याकांड के ब्लैकमेलिंग के मामले में बंद नोएडा की साक्षी का है।

सूत्रों की माने तो यह मामला उस समय सामने आया जब जेल में ब्लैकमेलिंग के आरोप में बंद साक्षी सक्सैना और इसी मामले में बंद पूनम खान के बीच जेल में ही विबाद हो गया। इसी विवाद के बाद पूनम ने ही इस मामले का खुलासा करते हुए साक्षी के मोबाइल पर आपत्ति दर्ज कराई। बस इसी के चलते यह मोबाइल बाहर आ गया।

सूत्रों की माने तो यह मोबाईल साक्षी बीते कई दिनों से उपयोग कर रही थी। जो इस मोबाईल से जेल से अपने खास मित्र जो कि उत्तराखंड के किसी मोबाइल नंबर xxxxxx9091 से बात करती थी। सूत्रों की माने तो साक्षी इन दिनों जेल में बंद होने के बाद भी अपने पूरे ऐसो आराम से रह रही है। बताया यह भी गया है कि जेल में ही साक्षी के किसी शासकीय बंगले से भी संबंध बन गए है। हालांकि यह मामला पूरी तरह से सस्पेंस से भरा है।

बताया गया है कि इन दिनों जेल में गेट पर जिस कैदी को तैनात किया गया है वह भोजा गडरिया है जो चंदन गड़रिया का साथी है और न्यायालय से अभी विचाराधीन है। इसे जेलर ने जेल मेें खास संत्री के रूप में तैनात कर रखा है। यहां बता दे कि जेल में जो आरोपी सजायाफ्ता मुजरिम होते है उन्हें ही यहां रखा जाता है। परंतु भोजा को यहां रखा गया है जिसके चलते यह अनुमान लगाया जा रहा है कि साक्षी को मोबाइल भी भोजा के जरिए भिजवाया गया है। सच्चाई क्या है यह तो जेल विभाग और अधीनस्थ अधिकारियों के बीच का मामला है। जो जांच के बाद ही स्पष्ठ हो सकेगा।