करैरा पुलिस ने आरोपियों को बचाने मानव वध की परिभाषा ही बदल दी, क्या प्रेशर था पढिए पूरी खबर - Shivpuri News

शेखर यादव@ शिवपुरी। मामला 2 वर्ष पुराना हैं,कि करैरा नगर पंचायत में एक टंकी निर्माण के दौरान एक टंकी पर चढ़कर कार्य कर रहे एक मजदूर की मौत हो गई। इस मामले में पूरे 2 साल बाद जांच के बाद मामला दर्ज किया गया हैं,लेकिन इस मामले की गलत विवेचना कारित की गई हैं संज्ञेय गंभीर अपराध के मामले में अज्ञात पर एफआईआर की गई हैं वह भी गलत धाराओं में कुल मिलाकर करैरा पुलिस ने मानव वध जैसे अपराध में जांच करते समय घोर लापरवाही बरती है।

यह था मामला
करैरा नगर पंचायत की सीमा में आने वाली एक पानी की टंकी का का निर्माण किया जा रहा था,इस टंकी का निर्माण रेयान वाटर टेक के द्वारा कराया जा रहा था। 14 फरवरी 2020 को पप्पू राम मेघवाल पुत्र हरी राम मेघवाल उम्र 25 साल निवासी मेरसर थाना जसरासर जिला बीकानेर की टंकी का निर्माण कार्य करते हुए गिरकर मौत हो गई। इस मामले की सूचना पुलिस को दी गई करैरा पुलिस ने मर्ग कायम करते हुए जांच शुरू कर दी।


मानव अधिकार के हस्तक्षेप के बाद किया गया मामला दर्ज
बताया जा रहा है कि जांच पूरे 2 साल में पूरी हुई वह भी जब मानव अधिकार आयोग में यह मामला पहुंचा और प्रेशर बना उसके बाद जांच पूरी की गई। जांच पर से करैरा पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धारा 304 ए के तहत मामला दर्ज कर लिया।

इस FIR के बाद सवाल हो रहे हैं खड़े

अज्ञात पर एफआईआर के बाद सवाल खडे हो रहे हैं,कि अज्ञात पर मामला दर्ज क्यो किया गया,अगर टंकी पर से मजदूर गिरा हैं तो सीधे सीधे ठेकेदार पर मामला दर्ज होना चाहिए यह था यह तो मजदूर था अगर कोई आम आदमी भी टंकी पर चढ़कर गिर जाता और उसकी मौत हो जाती ऐसी स्थिति में भी ठेकेदार पर मामला दर्ज होना चाहिए था।

पुलिस का अनुसंधान सही दिशा में चला लेकिन FIR दिशा बदल दी

इस जांच पर सवाल खड़े हो रहे हैं जांच में लिखा है कि अवलोकन में पाया गया था,कि मृतक मजदूर था कि नही के साक्ष्य के संबंध में मात्र मौखिक साक्ष्य हैं जबकि डायरी में नक्शा मौका में दर्शाये गये स्थान पर निर्माणाधीन पानी की टंकी भी दर्शित हैं। ऐसी स्थिति पर मर्ग की जांच के स्थान पर अनुसंधान किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है। अत:संबंधित ठेकेदार के खिलाफ अपराध धारा 304 ए का अपराध पंजीबद्ध कर अनुसंधान किया जाए,लेकिन मामला अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया गया।

मानव वध की परिभाषा बदल दी,पढिए धारा 304 की परिभाषा

सवाल यह बनता है कि ऐसी घटना में आईपीसी की धारा 304 में मामला दर्ज किया जाता हैं कानून की किताब में 304 को इस प्रकार से वर्णित किया हैं कि "जो कोई ऐसा आपराधिक मानव वध करेगा, जो हत्या की कोटि में नहीं आता है, यदि वह कार्य जिसके द्वारा मृत्यु कारित की गई है, मृत्यु या ऐसी शारीरिक क्षति, जिससे मृत्यु होना सम्भाव्य है, कारित करने के आशय से किया जाए, तो वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा,यह स्पष्ट कर दे कि ऐसी लापरवाही जिसे घटने पर जान जा सकती हैं टंकी के निर्माण में मजदूरों की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नही की,जबकि टंकी की ऊंचाई लगभग 100 फुट थी इतनी ऊंचाई से कोई गिरेगा तो मृत्यु होना लगभग तय हैं।

अब धारा 304 ए की परिभाषा पढ़िए

जब भी कोई, लापरवाही से, असावधानी से या उतावलेपन से ऐसा कोई भी कार्य करता है जिससे किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, लेकिन जो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 299 में दिए गए प्रावधानों के अनुसार "आपराधिक मानव वध" के अंतर्गत नहीं आता है। तब यहाँ इस दशा में उस व्यक्ति पर जिसके द्वारा मृत्यु कारित हुई है, भारतीय दंड संहिता की धारा 304 A के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया जा सकता हैं यह धारा अधिकांश सडक दुर्घटनाओ में गाडी चालक में लगती हैं इसका सरल भाषा में लिखा जाए तो कहा जा सकता हैं ऐसी लापरवाही जिससे किसी की जान भी जा सकती है और नही भी।

कंपनी मालिक और स्थानीय प्रोजेक्ट मैनेजर पर दर्ज होना चाहिए था मामला दर्ज

करैरा नगर पंचायत में इस टंकी का निर्माण रेयान वाटर टेक के द्वारा किया जा रहा था,अगर इस मामले में नियमानुसार जांच होती तो कंपनी के मालिक ऋषि अरोरा एवं स्थानीय प्रोजेक्ट मैनेजर जेडी गुर्जर के खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए।

जब पुलिस का अधिकारी अपनी जांच में लिख रहा है कि संबंधित ठेकेदार के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध होना चाहिए तो करैरा पुलिस एक नगर पंचायत को पत्र जारी कर यह पता नही करती थी कि इस टंकी का निर्माण किस कंपनी के द्वारा किया जा रहा हैं और इस कंपनी का मालिक कौन हैं।

इस मामले में आरोपियों को बचाने के लिए इस प्रकार के मानव वध की परिभाषा को भी बदला गया हैं। इस प्रकरण में पुलिस के अनुविभागीय स्तर से लेकर करैरा कोतवाली पुलिस ने गंभीर लापरवाही बरती हैं,इस मामले की जांच पुन:होनी चाहिए।