गांव छोड़कर शहर में रहने की जिद, टूटा परिवार, बिछड़ गई 15 माह की बेटी: काउंसलिंग से टूटने से बचा एक परिवार - Shivpuri News

शिवपुरी। एक छोटी सी जिद एक परिवार को तबाह कर सकती हैं,ऐसी ही एक जिद के कारण विवाहिता का घर टूट गया बल्कि उससे 15 महिने की बेटी भी अलग हो गई,लेकिन उचित काउंसलिंग के कारण एक परिवार टूटने से बच गया,महिला ने अपनी गलती स्वीकार की और पति के साथ रहने उसके गांव चली चली गई

कुछ माह पूर्व एक विवाहिता ने एक जनसुनवाई में एक आवेदन कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में दिया था। महिला के आवेदन के अनुसार,मेरा पति पति उसके साथ मारपीट करता है और मेरी 15 महीने की बेटी को मुझ से छीन कर मुझे घर से निकाल दिया है। पति सास की बात मानता है, जो कमाता है वह रुपये भी सास को दे देता है। मै बीमार हो जाती हूँ तो इलाज भी नहीं कराता। मुझे अब उसके साथ नहीं रहना है। जनसुनवाई में आए इस आवेदन से इस मामले को वन स्टाप सेंटर को भेज दिया गया।

इसके बाद महिला, उसके पति और सास को परामर्श के लिए बुलाया गया। जब परामर्शदाताओं ने दोनों पक्षों से बात की तो सामने आया कि महिला अपनी सास के साथ नहीं रहना चाहती है। वह चाहती है कि उसका पति उसे और बेटी को साथ लेकर शहर में रहे। यही बात पति-पत्नी के बीच विवाद वजह बनती है। इसे लेकर वह अपनी बेटी को तक छोड़कर आ गई।

वहीं महिला के पति ने कहा कि मैं खेती और मजदूरी का काम करता हूं। शहर में रहकर क्या करूंगा। कैसे परिवार का पालन- पोषण होगा। काउंसलर्स के द्वारा जब महिला को समझाया गया कि तुम्हारे पति का पूरा काम खेती और मजदूरी का है। शहर में रहने से खर्चा कैसे चलेगा। शहर में मकान का किराया, दूध, सब्जी, आटा- दाल सब खरीदना पड़ेगा। जबकि गांव में आपको किराया नहीं देना, दूध घर पर होता है। अनाज, सब्जियां घर पर होतीं है।

जब तुम्हारी बेटी बड़ी हो जाये, पढ़ाई करने लगे फिर शहर में रहकर उसे पढ़ाना। अभी शहर में रहने की कोई खास वजह भी तो नहीं है। विधवा सास की देखभाल भी तो तुम्हारी जिम्मेदारी है। तुम अगर उनकी सेवा नहीं करोगे तो कल तुम्हारे बच्चे जो दिखेगा वही सीखेंगे। सास को भी उसे बेटी की तरह से रखने के लिए प्रेरित किया गया।

समझाने से महिला को अपनी गलती का अहसास हुआ और वह परिवार के साथ रहने को तैयार हो गई। वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी प्रशासक अंगूरी बाथम, काउंसलर श्वेता गुप्ता, केस वर्कर गुंजन खेमरिया, आरती शर्मा एवं शुद्धि शुक्ला के समन्वित प्रयासों से एक परिवार टूटने से बच गया।