डकैती काण्ड में 11 साल बाद फैसला: 3 डकैतो को 10 साल की सजा, माल खरीदने वाले को 3 साल की जेल - Shivpuri News

करैरा। विशेष न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने सोमवार को दिए एक महत्वपूर्ण फैसले में 11 साल पहले मगरौनी के एक कारोबारी के यहां डकैती डालने वाले तीन आरोपितों को दस-दस साल के सश्रम कारावास एवं डकैती का सोना-चांदी खरीदने वाले सुनार को तीन साल के सश्रम कारावास सहित अर्थदंड से दंडित किया है। शासन की ओर से पैरवी एजीपी हर्षवर्धन दुबे द्वारा की गई। न्यायालय ने इस घटना के संबंध में टिप्पणी करते हुए इसे बेहद संगीन गुनाह करार दिया है

अभियोजन के अनुसार मगरौनी के नगर सेठ कपूरचंद जैन के यहां 2 अप्रैल 2011 को आधी रात को करीब 10 अज्ञात बदमाशों ने डकैती डालते हुए वहां से डेढ़ क्विंटल चांदी, तीन किलो सोना व 2 लाख 75 हजार रुपये नकदी लूट लिए थे। पुलिस ने मामले में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ डकैती का प्रकरण कायम कर लिया।

विवेचना के दौरान आरोपितों की शिनाख्त बृखभान उर्फ घोड़ा पुत्र रामचरण गुर्जर, उदयवीर पुत्र दाताराम गुर्जर, बलवीर उर्फ बल्लो पुत्र बदन सिंह गुर्जर, मनोज पुत्र बदनसिंह गुर्जर, जगदीश उर्फ करूआ गुर्जर, शिवचरण पुत्र शोभरण गुर्जर निवासीगण ग्राम लक्ष्‌मणगण थाना महाराजपुरा, जिला ग्वालियर एवं रमेश पुत्र जगदीश निवासी थाना विश्वविद्यालय जिला ग्वालियर, रमेश पुत्र मदन सिंह गुर्जर निवासी थाना पनिहार जिला ग्वालियर व जोगेंद्र पुत्र भरतसिंह के रूप में की, इसके अलावा विष्णु सोनी विट्ठलदास सोनी निवासी थाना मुरार को डकैती का सामान खरीदने के मामले में आरोपी बनाया गया।

पुलिस ने मामले की विवेचना उपरांत प्रकरण सुनवाई के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय में मामले में आए समस्त तथ्यों एवं साक्ष्‌यों पर विचारण उपरांत विष्णु सोनी विट्ठलदास सोनी निवासी थाना मुरार को लूट का माल खरीदने पर तीन साल की सजा व दो हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। कोर्ट ने विष्णु को सजा सुनाते हुए टिप्पणी की कि आपके द्वारा डकैती का सामान खरीद कर कहीं न कहीं अपराध को बढ़ावा देने का काम किया है।

इसके अलावा आज न्यायालय में हाजिर हुए रमेश पुत्र मदन, रमेश पुत्र जगदीश, शिवचरण को दस-दस साल के कठोर कारावास एवं पांच-पांच हजार रूपये के जुर्माने से दंडित किया है। न्यायालय ने टिप्पणी की है कि अदालत ने आरोपीगण के अपराध पर तल्ख टिप्पणी कर आधीरात में डाली गयी डकैती को संगीन गुनाह बताकर उन्हें किसी भी रियायत देने से इंकार किया। न्यायालय ने आरोपित जोगेंद्र पुत्र भरत सिंह को साक्ष्‌यों के अभाव में बरी कर दिया।