पिछोर के किसानों के लिए मोदी सरकार ने सिंचाई परियोजना मंजूर की - Pichhore News

शिवपुरी
। शिवपुरी जिले के लिए 2021 साल जाते जाते जिले केे पिछोर क्षेत्र की प्यासी जमीन के लिए नवजीवन दे गया। 19 साल से अटकी एक योजना को मंजूरी मिल गई हैं यह मंजूरी देश केबिनेट में भारत के प्रधानमत्री की अध्यक्षता में दी स्वीकृति हैं। साथ ही नादियो को जोडने वाली यह देश की पहली योजना हैं और इसकी लागत 44605 करोड बताई जा रही है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण केन-बेतवा नदी लिंक योजना को मंजूरी दे दी। कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना की कुल लागत 44,605 करोड़ रुपये है। इसमें से केंद्र सरकार 39,317 करोड़ रुपये देगी। उन्होंने बताया कि केन-बेतवा नदी जोड़ो योजना से बुंदेलखंड क्षेत्र का तेजी से विकास हो सकेगा। इससे क्षेत्र के लोगों की सामाजिक व आर्थिक दशा सुधरेगी। 

केन, बेतवा एवं इनकी सहायक नदियों पर बांधों का निर्माण कर जल संग्रहित होगा। बुंदेलखंड क्षेत्र की जनता को सिंचाई व पेयजल की सुविधा मिलेगी। राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के तहत केन-बेतवा लिंक देश की पहली राष्ट्रीय परियोजना है।

निवेश व पर्यटन बढ़ेगा, रोजगार के अवसर मिलेंगे

मप्र में 8.11 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा मिलने से उत्पादन बढ़ेगा। शिवपुरी 76 हजार व दतिया 14 हजार हेक्टेयर सहित पन्ना जिले का 70 हजार हेक्टेयर, छतरपुर 311151, दमोह 20101, टीकमगढ़ व निवाड़ी जिले का 50112, सागर 90 हजार, रायसेन 6 हजार, विदिशा 20 हजार हेक्टेयर रकबा सिंचित होगा।

परियोजना से 103 मेगावॉट बिजली उत्पादन होगा, जो पूरी तरह से मप्र में उपयोग होगी। औद्योगीकरण व निवेश बढ़ेगा, पर्यटन को बढ़ेगा, रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और पलायन रुकेगा। पानी के संकट से प्रभावित प्रदेश की 41 लाख आबादी को लाभ होगा।

2005 से परियोजना अटकी थी,19 साल बाद मिली योजना को हरी झंडी

विभाग का मंत्री बनने के बाद पहली समीक्षा बैठक में परियोजना की समीक्षा की। अब विस्तृत डीपीआर के लिए दोनों राज्य सरकार व भारत सरकार के बीच पीएम मोदी की मौजूदगी में त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं।

बता दें कि केन-बेतवा लिंक परियोजना साल 2005 में मप्र, उत्तर प्रदेश व भारत सरकार के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। लेकिन मप्र व उप्र के बीच जल बटवारे व कुछ अन्य मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण परियोजना प्रारंभ नहीं हो सकी थी।