धनतेरस पर बाजार में जमकर बरसा धन,बर्तन सर्राफा और इलेक्ट्रोनिक बाजार रहे गुलजार,वाहनों की बाजार में NO ENTRY

Bhopal Samachar

शिवपुरी। पिछले वर्ष कोरोना के कारण बाजारों में दीपावली के अवसर पर सन्नाटा छाया रहा था। लेकिन अब कोरोना की लगभग विदाई से बाजारों में रौनक लौट आई है। धनतेरस से एक दिन पहले शिवपुरी के बाजारों में बहुत भीड़ देखी गई। खासकर कोर्ट रोड और सदर बाजार में तो पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा था। इसे देखते हुए प्रशासन ने आज से कोर्ट रोड़ और सदर बाजार में चार पाहिया और दो पहिया वाहनों के निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया।

इस बार धनतेरस पर खासतौर पर सराफा बाजार और बर्तन मार्केट में अच्छी भीड़ उमड़ रही है। सर्राफा बाजार में विशेष तौर पर चांदी के सिक्कों की खरीददारी हो रही है। इन्हेंं खरीदना धनतेरस पर शुभ माना जाता है। मध्यम और निम्र मध्यम वर्ग के लोग धनतेरस पर बर्तनों की खरीद के लिए बाजारों में उमड़ रहे । धनतेरस पर सोना-चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा भी है। इस दिन शाम को प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि के साथ कुबेर और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। अकाल मृत्यु से बचने और अच्छी सेहत की कामना से घर के बाहर यमराज के लिए दक्षिण दिशा में एक बत्ती का दीपक जलाया जाता है।

धनतेरस के साथ आज से दिवाली की रौनक बाजार में शुरू हो जाएगी इसके लिए व्यापारियों ने जहां उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए उन पर धन की वर्षा करने की घोषणा की है। वही रेडीमेड, इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्राफा व्यवसायियों ने देशभर में प्रचलित लोकप्रिय वैरायटी को अपनी दुकान पर बिक्री के लिए स्टॉक किया है, ताकि जिले भर के उपभोक्ताओं को हर तरह की वैरायटी और रेंज उपलब्ध करा सके। धनतेरस पर्व पर त्रिपुष्कर योग बन रहा है।

यानी इस शुभ योग में किए गए निवेश, खरीदारी और शुरुआत में तीन गुना फायदा मिलेगा। ये सुबह 6.35 से दोपहर तकरीबन 12 बजे तक रहेगा। लेकिन खरीदारी का अबूझ मुहूर्त होने के कारण खरीदी के लिए पूरा दिन शुभ है। आज चंद्रमा अपने ही नक्षत्र में है और उस पर बृहस्पति की दृष्टि पड़ रही है। ये स्थिति भी सुख-समृद्धि और शुभ फल देने वाली रहेगी।

सोना और बर्तन खरीदने की परंपरा क्यों
समुद्र मंथन करने पर भगवान धन्वंतरि हाथ में सोने का कलश लेकर प्रकट हुए। जिसमें अमृत भरा हुआ था। उनके दूसरे हाथ में औषधियां थी और उन्होंने आयुर्वेद का ज्ञान दिया। यही वजह है कि इस दिन आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि की पूजा की जाती है। धन्वंतरि के हाथ में सोने का कलश था इसलिए इस दिन बर्तन और सोना खरीदने की परंपरा शुरू हुई। बाद में आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए चांदी और अन्य धातुओं की खरीदी होने लगी। तब से परिवार में समृद्धि बनाए रखने की कामना से इस दिन चांदी के सिक्के, गणेश व लक्ष्मी जी की मूर्तियां और ज्वेलरी की खरीदारी की जाती है। साथ ही पीतल, कांसे, स्टील व तांबे के बर्तन भी खरीदने की परंपरा है।


समुद्र मंथन का फल, धन्वंतरि...
देवताओं और दानवों ने समुद्र मंथन किया था। जिससे लक्ष्मी, चंद्रमा और अप्सराओं के बाद त्रयोदशी तिथि पर धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर निकले, यानी समुद्र मंथन का फल इसी दिन मिला था। इसलिए दीपावली का उत्सव यहीं से शुरू हुआ। वाल्मीकि ने रामायण में लिखा है कि अमावस्या को भगवान विष्णु-लक्ष्मी जी का विवाह हुआ था। इसलिए दीपावली पर लक्ष्मी पूजा होती है।