बाढ की ताबाही: धान की पौध दूसरे के खेतो में मिली, सर्वे के लिए टीमे गठित - Shivpuri News

शिवुपरी। जिले भर में 36 घंटे तक लगातार बारिश होने के कारण हजारों किसानों के खेतों ने तालाब की शक्ल ले लिए हैं। हालात यह हैं कि नदियां उतर गईं, बारिश थम गई लेकिन खेतों में भरा पानी अभी तक नहीं निकला पाया है। किसानों के अनुसार खेतों में बोई गई उड़द, तिल और सोयाबीन सहित अन्य फसलें पानी के सैलाब के साथ बह गई हैं। वही थान के रोपे गए पौधे दूसरे के खेतो में पहुंच गए।

कृषि विभाग ने अनुमान लगाया है, जिले भर के 125 गांवों के 4500 हेक्टेयर यानि करीब 22 हजार 500 बीघा भूमि पर बोई गई फसल खराब हो गई है। यह फसल का 30 से 35 प्रतिशत हो सकता है। हालांकि कृषि विभाग के उप संचालक यूएस तोमर का कहना है कि सर्वे के बाद नुकसान का यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है।

उनके अनुसार एसडीएम ने सर्वे के लिए टीमें गठित कर दी हैं। इसमें पटवारी, आरएईओ और पंचायत सचिव को शामिल किया गया है। यह तीनों अपने-अपने क्षेत्र में सर्वे करने के बाद नुकसान का वास्तविक आंकलन करके बताएंगे।

धान की फसल में भी नुकसान

जिले में नदी किनारे बसे कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता के कारण हजारों किसान पानी की फसल भी करते हैं। बताया जा रहा है कि नदियों में आए सैलाब के कारण धान की फसल पूरी तरह से बह गई क्योंकि खेतों में तीन दिन तक लगातार पानी का सैलाब बना रहा था।

सर्वे के बाद बढ़ भी सकता है आंकड़ा

उप संचालक कृषि यूएस तोमर का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर अनुमान लगाया गया है कि साढ़े चार हजार हेक्टेयर भूमि पर फसल का नुकसान हुआ है, लेकिन सर्वे के बाद नुकसान का यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है। नुकसान के आंकलन के लिए एसडीएम ने टीमें गठित कर दी हैं।