ABVP स्थापना दिवस- विजयजी के बिना कहानी पूरी नहीं होती

दिनांक 9 जुलाई भारत के सबसे बड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का स्थापना दिवस है। उल्लास और उमंग के साथ स्थापना दिवस मनाया जा रहा है और भविष्य में विचारधारा को और अधिक वनवासी क्षेत्रों तक पहुंचाने का संकल्प लिए जा रहे हैं। स्थापना दिवस का समारोह शिवपुरी में अधूरा है यदि कहानी में विजय जी भारद्वाज का जिक्र नहीं आता।

शिवपुरी भारत के उन शहरों में से एक है जहां पर भगवा ध्वज उस समय भी लहराता था जब भारत की ज्यादातर भूमि पर विदेशियों की क्रूरता कहर बरपा रही थी। ऐसे शिवपुरी में एक वक्त ऐसा भी आया जब विद्यार्थियों में देश प्रेम की भावना जागृत करने वाले संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का एक भी कार्यकर्ता नहीं था। 

बात सन 1980 की है। स्थिति कुछ ऐसी बनी की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का काम करने के लिए शिवपुरी में कोई नेता नहीं था। पूरे 9 साल तक यही हालात रहे। सन 1989 में खनियाधाना से शिवपुरी पढ़ने आए विजय भारद्वाज ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का ध्वज उठाया। जिस ऊर्जा और जुनून के साथ विजय जी ने अकेले काम शुरू किया, वह आज भी याद किया जाता है। देखते ही देखते सैकड़ों विद्यार्थियों के अलावा शिवपुरी नगर के वरिष्ठ और संभ्रांत नागरिकों का आशीर्वाद भी प्राप्त हो गया। 

इसी प्रक्रिया के दौरान कोलारस से अपने परिवार के साथ शिवपुरी आए सुरेंद्र शर्मा को विजय जी भारद्वाज ने अपनी टीम में शामिल किया। सुरेंद्र शर्मा की उर्जा भी कम नहीं थी। स्कूल और कॉलेज के दरवाजों पर खड़े होकर सदस्यता करने वाले सुरेंद्र शर्मा का कई बार कांग्रेस पार्टी और उन दिनों एक्टिव कम्युनिस्ट पार्टी के छात्र संगठनों के नेताओं द्वारा मजाक उड़ाया गया। लेकिन सुरेंद्र शर्मा के हाथ से सदस्यता की किताब गायब नहीं हुई। 

अखिलेश शर्मा, शैलेंद्र गुप्ता, उपदेश अवस्थी, ऋषभ जैन, मनोज लक्षकार, गोविंद अवस्थी, जगदीश जादौन, प्रताप भानु जाट, आशुतोष शर्मा कुछ ऐसे नाम है जिन्होंने उन दिनों विजय भारद्वाज और सुरेंद्र शर्मा के साथ मिलकर संगठन के लिए उल्लेखनीय काम किए। आज यदि शिवपुरी के क्षितिज पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का ध्वज लहराता है तो इसकी नीव में विजय भारद्वाज और सुरेंद्र शर्मा एक पत्थर की तरह स्थापित हैं।