रामबाण साबित हो रही है प्लाज्मा थेरेपी, शिवपुरी में करनी चाहिए शुरुआत: कलेक्टर करे पहल प्लाज्मा डोनेट कैंप की - Shivpuri News

शिवपुरी। कोरोना के मरीजों लगातार सामने आ रहे हैं ऐसे में प्लाज्मा थैरेपी की मदद से मरीजों की जान बचाई जा सकती है खासकर उन मरीजों की जो अधिक गंभीर हैं। ऐसे में मेडीकल कॉलेज सहित जिला अस्पताल में अनुभवी डॉक्टरों की कमी नहीं है बावजूद इसके मरीजों को प्लाज्मा थैरेपी न दिया जाना कहां तक उचित है।

दिल्ली सहित कई राज्यों में प्लाज्मा थैरेपी से कई कोरोना मरीजों को जीवन दान मिला है ऐसे में हमारे जिले में भी मरीजों का प्लाज्मा थैरेपी से इलाज किया जा सकता हैं। वही प्रतिदिन एफबी पर पोस्ट देखते हैं कि ग्वालियर में शिवपुरी का या फिर यह व्यक्ति कोरोना से लड रहा हैं इसको प्लाज्मा की आवश्यकता हैं, प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आगे आए। ऐसी पोस्ट हम प्रतिदिन देख रहे हैं। शिवपुरी में भी लाउंस क्लव ने भी प्लाज्मा कैंप लगवाने की घोषणा की थी लेकिन अभी तक यह संभव नही हुआ हैं।

क्या है प्लाज्मा

प्लाज्मा रक्त में उपलब्ध एक तरल पदार्थ होता है। इसका 92 फीसदी भाग पानी होता है। प्लाज्मा में पानी के अलावा प्रोटीन, ग्लूकोज मिनरल, हार्मोन, कार्बन डाइ ऑक्साइड होते हैं। शरीर में कार्बन डाई आक्साइड का परिवन रक्त के प्लाज्मा के जरिए होता है। कोरोना के अटैक के समय शरीर वायरस से लडता है और यह लडाई एंटीबॉडी लडती है। जो प्लाज्मा की मदद से ही बनती है। कोरोना मरीज के शरीर में एंटीबॉडी बनाने के लिए प्लाज्मा थैरेपी कारगर है।

किन किन राज्यों में हुआ ट्रायल

कोरोना थैरेपी का सबसे पहले ट्रायल दिल्ली में शुरू हुआ और उसके बाद कर्नाटक, केरल सहित महाराष्ट्र और देश के कई अन्य राज्यों ने इस थैरेपी को अपनाकर कई गंभीर कोरोना मरीजों को स्वस्थ किया।

कैसे होता है इलाज

कोरोना मरीज जब स्वस्थ होता है तो उसके शरीर में एंटीबॉडी बनती हैं और यहीं एंटीबॉडी उसे स्वस्थ होने में मदद करती है। जब यह मरीज स्वस्थ हो जाता है तो वह रक्तदान कर सकता है और उसके रक्त से प्लाज्मा निकालकर गंभीर मरीजों को दिया जा सकता है जिससे उनके शरीर में एंटीबॉडी का बन सकें और वह कोरोना से लडकर स्वस्थ हो सकें।

क्या है एंटीबॉडी

एंटीबॉडी हमारे शरीर में पाया जाने वाले एक प्रोटीन है जो एंटीजिन नामक बाहरी हानिकारक चीजों से लडने में मदद करता है।

2 हफ्ते बाद कर सकते हैं रक्तदान

कोरोना मरीज की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद वह दो हफते के बाद रक्तदान कर सकता है और उसके रक्त से प्लाज्मा निकालकर गंभीर मरीजों का उपचार किया जा सकता है। एक कोरोना मरीज के प्लाज्मा से करीब दो मरीजों का उपचार किया जा सकता है।

कौन कर सकता है प्लाज्मा दान

कोरोना मरीज ठीक होने के 14 दिन बाद रक्तदान कर प्लाज्मा डोनेट कर सकता है और उसकी उम्र 18 से 60 साल होना चाहिए और वजन 50 किलो से कम नहीं होना चाहिए। डायविटीज और शुगर सहित हार्ट पेंशेंट व हाईपरटेंशन के शिकार लोग प्जाज्मा डोनेट नहीं कर सकते हैं। साथ ही ब्लड प्रेशर के मरीज भी प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा लिवर व किडनी की बीमारी से पीडित लोग भी प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकते हैं।