"बीमार" एंबुलेंस आधे रास्ते में निढाल, अस्पताल की चौखट आते-आते महिला ने तोड़ा दम - Shivpuri News

शिवपुरी। कोरोना के इस भयंकर काल में लोग सिर्फ बीमारी से ही दम नहीं तोड़ रहे हैं बल्कि निढ़ाल व्यवस्था भी मौतों के लिए जिम्मेदार है। जिले के बदरवास कस्बे से शिवपुरी अस्पताल के लिए रैफर की गई बदरवास निवासी मालती नामदेव पत्नी बालकृष्ण नामदेव उम्र 44 रविवार देर शाम बदरवास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला चिकित्सालय शिवपुरी के लिए रेफर की गई थी लेकिन रास्ते में पडोरा पर एंबुलेंस का टायर फट गया और महिला की हालत बिगड़ गई जिसने अस्पताल की चौखट पर दम तोड़ दिया।

1 घंटे तक एम्बुलेंस की पंचर नहीं जुड़ पाई जिससे महिला एम्बुलेंस में तड़पती रही और 1 घंटे बाद जब शिवपुरी से दूसरी एंबुलेंस आई तब महिला को जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे तब तक काफी देर हो चुकी थी और महिला ने जिला चिकित्सालय में पहुंचते ही प्राण त्याग दिए।

बदरवास के वार्ड 5 निवासी बालकिशन नामदेव ने बताया की मेरी पत्नी को 5 दिन पहले बुखार था जिस पर जांच कराने पर टाइफाइड निकला था और उसका इलाज भी चल रहा था लेकिन कल रविवार को उसे सुबह से ही सांस लेने में दिक्कत आ रही थी जब मैं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचा तो डॉक्टर ने भांप दी उसके बाद उसे आराम मिल गया और मैं उसे घर लेकर आ गया।

उसके बाद शाम को 6:00 बजे फिर से उसे सांस लेने में समस्या होने लगी और मेंं तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचा तो वहां डॉक्टर ने मेरी पत्नी की गंभीर स्थिति को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की 108 एंबुलेंस से शिवपुरी के लिए रेफर कर दिया और मैं अपनी पत्नी को एंबुलेंस से लेकर शिवपुरी के लिए करीब 7:00 बजे निकला लेकिन बदरवास से 35 किलोमीटर दूर पडोरा पर एम्बुलेंस का टायर फट गया और वे वहां पर 1 घंटे एंबुलेंस की पंचर जुड़वाने के लिए खड़े रहे उसके बाद कोलारस और शिवपुरी भी एंबुलेंस के लिए फोन लगाया लेकिन कोई एंबुलेंस नहीं आई।

हद की बात तो यह है थी एंबुलेंस में ना तो ऑक्सीजन थी और ना ही स्टेपनी थी और जब 1 घंटे बाद शिवपुरी से दूसरी एम्बुलेंस पहुंची और जब वह मरीज को लेकर शिवपुरी जिला चिकित्सालय पहुंचा एंबुलेंस से उतारकर जैसे ही अपनी पत्नी को अंदर ले गया पत्नी ने चिकित्सालय के दरवाजे पर पहुंचते ही प्राण त्याग दिए।
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बालकिशन का दर्द, ऐसा किसी के साथ न हो

घटना से व्यथित बालकिशन का कहना था कि एम्बुलेंस मैं न तो ऑक्सीजन थी और न ही स्टेपनी। अगर एम्बुलेंस मेंं ऑक्सीजन होती तो मेरी पत्नी को ऑक्सीजन मिलती रहती या फिर टायर फटने ओर अगर उसमे स्टेपनी होती तो ड्राइवर दूसरा टायर बदल देता और हम जल्दी अस्पताल पहुच जाते और मेरी पत्नी की जान नहीं जाती हे ईश्वर जैसा मेरे साथ हुआ है वैसा किसी के साथ न हो ।