आधुनिक युग में भी छैले के पत्तो से आग बुझाने का कर रहा हैं प्रयास नेशनल पार्क: आग काबू में नही - Shivpuri News

शिवपुरी। माधव नेशनल पार्क पर्यटक स्थलों में शुमार है और यहां बाहर से पर्यटक इसकी प्राक्रतिक छटा और सौंदर्य सहित वन्य प्राणियों को निहारने के लिए आता है लेकिन बडे भाग में फैले इस माधव नेशनल पार्क में आग हर साल गर्मियों के दिनों में लगती है और इस आग से निपटने के लिए वन महकमें के पास कोई आधुनिक संसाधन नहीं हैं। छैले के पत्तों का झाड बनाकर उसे आग पर मारते हैं और इस तरह से पुरानी तकनीक के सहारे जंगल की आग पर काबू पाते हैं।

बलारपुरा और सरदारपुरा वीट में लगी आग

बीते रोज ही बलारपुर और सरदारपुरा वीट में आग लग गई थी जिसे बुझाने का प्रयास वन महकमें ने किया है। वन महकमें के अधिकारी ही स्वीकार कर गए थे कि दमकल जंगल में नहीं पहुंच सकती है इसलिए आग पर काबू पाने में समय लगेगा।

नरवर इलाके में आग से हुई थी तबाही

कुछ साल पहले नरवर इलाके के माधव नेशनल पार्क की सीमा में एक बडे भाग में आग लग गई जिससे कई वन्य प्राणियों की मौत भी हुई और तब अधिकारियों ने बडे बडे दावे कर आग पर काबू पाने के लिए उन्नत तकनीक का सहारा लेने की बात कही थी लेकिन आज भी वन अमला पुरानी तकनीक पर ही जीवित है।

खूबत घाटी की आग पर पत्तों से पाया था तीन दिन में काबू

करीब 3 सवाल पहले खूबत घाटी क्षेत्र में आग लगी तो वन अमला छैले के पत्तों के सहारे आग को बुझाता देखा गया था और तीन दिन की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका था।

जंगल में पेड पौधों और रास्ता न होने से नहीं पहुंच पाती दमकल

पार्क क्षेत्र में आवागमन सुगम नहीं हैं यहां जो निश्चित रास्ते है उन पर ही वाहन से जाया जा सकता है लेकिन जंगल में पहुंचने के लिए पगडंडी है और उन पर बाइक से ही जाया जा सकता है ऐसे में दमकल के वन क्षेत्र में न पहुंचने से आग से तबाही होती है और उस पर काबू पाने में वन अमले को मशक्कत करनी होती है।