सरकूला बांध: 2 से 4 साल में यह बांध हो सकता हैं क्षतिग्रस्त, बदला जा रहा है मूल स्वरूप: एक्स MLA प्रहलाद भारती - Shivpuri News

शिवपुरी। सरकूला बांध निर्माण को पोहरी के पूर्व विधायक प्रहलाद भारती ने एक प्रेस नोट रिजील किया है। इस प्रेस नोट के माध्यम से पूर्व विधायक ने बांध निर्माण पर सवाल खडे कर दिए है। यह सवाल विपक्ष को खडे करने थे लेकिन निर्माण में मूल स्वरूप को बदला गया जो जनहित में नही हैं इस कारण पक्ष ही विपक्ष की भूमिका में आ गया।

भारती ने बांध निर्माण में देरी और उसका स्वरूप बदलने पर आपत्ति उठाई है। उनका कहना है कि ठेकेदार अपने आर्थिक हित साधने के लिए मूल संरचना बदल रहा है। मुख्यमंत्री चौहान और सांसद सिंधिया ने सात महीने पहले जेसीबी चलाकर बांध निर्माण की शुरुआत कर दी थी, लेकिन ठेकेदार ने काम ठप कर दिया और सात महीने बाद भी धरातल पर बांध आकार नहीं ले पाया है।

मुख्यमंत्री और सिंधिया 5 अप्रैल को पोहरी दौरे पर आ रहे हैं। सरकूला बांध का टेंडर सीएसआर दर से केवल 10 पैसे कम रेट पर इंदौर के मैसर्स राजकुमार बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड को स्वीकृत किया गया। नदी के मुख्य हिस्से में पत्थरों का बांध बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रोजेक्ट का टेंडर टर्न की पद्धति के आधार पर है, जिसमें ठेकेदार कुछ जरूरी परिवर्तन करा सकता है।

सरकूला परियोजना अपने मूल स्वरूप में 'सेंट्रल स्पिल वे' में स्वीकृत हुई है, जिसमें बांध के मूल स्वरूप को ही बदलकर 'साइड स्पिल वे' कर दिया है। सर्वेक्षण, डिजाइन ड्राइंग कार्य फिर करा रहे हैं जिससे बांध बनने में देरी होगी। बता दें कि सरकूला परियोजना की साल 2018 में प्रदेश सरकार ने 226.62 करोड़ राशि के साथ स्वीकृति दी थी।

जो काम कराए ही नहीं, उनका भी करोड़ों का भुगतान हो गया

भारती ने आरोप लगाया है कि दोबारा सर्वेक्षण के नाम पर ड्राइंग और डिजाइनों के भुगतान के लिए बोधी के अनुमोदन के बिना नियमों की अनदेखी कर भुगतान किया गया है। ठेकेदार ने मौके पर जो कार्य आज दिनांक तक कराए ही नहीं हैं, उनके लिए भी ठेकेदार को करोड़ों का भुगतान ले लिया है। इसके लिए कई अधिकारियों के तबादले कराकर लाया गया है।

रैनफॉल के आंकड़े गलत, इसकी जांच होनी चाहिए

बोधी कार्यालय से हाइड्रो की गणना फिर से कराई है, जिसमें साल 1989 से 2019 तक के रैनफॉल डेटा में हेरफेर कर पानी की अधिक मात्रा दर्ज कराई है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट में अधिक बारिश वाले 3 साल बढ़ाकर कम वर्षा वाले 3 साल हटाए हैं, ताकि पानी की मात्रा अधिक दिखे। यमुना कछार के तहत अभी तक निर्मित किसी भी परियोजना में यह गणना लागू नहीं होती है। सरकूला सिंचाई परियोजना वाली नदी बारहमासी नहीं है, सिर्फ नवंबर तक प्रवाह रहता है। रैनफॉल गणना के आंकड़े भी मैदानी अधिकारियों से तैयार नहीं कराए हैं, जिसकी जांच होनी चाहिए।

2 से 4 साल में ही बांध के क्षतिग्रस्त होने का खतरा

पूर्व विधायक का कहना है कि प्रोजेक्ट के स्वीकृत मूल स्वरूप में नदी में कॉन्क्रीट का बांध बनाकर 150 फीट ऊंचाई से पानी गिरने पर कटाव रोकने आरसीसी बकेट पहले से प्रस्तावित था। यह तकनीकी व गुणवत्ता और बांध की मजबूती की दृष्टि से ठीक था। अब साइड स्पिल में इतनी ऊंचाई से पानी गिरने से 2 से 4 साल के भीतर ही यह बांध क्षतिग्रस्त होने का खतरा है।

ठेकेदार का प्रस्ताव विभाग को भेजा है। मंजूर होगा या नहीं, यह परीक्षण के बाद तय होगा। बांध निर्माण के लिए दूसरी बार सर्वे के लिए 6 करोड़ रु. मंजूर हुए थे, वह राशि सरेंडर कर दी है। -
गिरीश कुमार साहू, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन