जीवन में सत्संग से आएगा जीवन मे बदलाव, इसलिए करें प्रभु भक्ति: जुगलकिशोर जी महाराज - Shivpuri News

शिवपुरी। मनुष्य को यदि अपने जीवन में बदलाव करना है तो इसके लिए सबसे उत्तम मार्ग है सत्संग और प्रभु भक्ति, जहां ईश्वर की आराधना करने से ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है और जीवन में बदलाव भी आता है, अक्सर देखा गया है कि मनुष्य अपने जीवन में व्यस्तताओं को लेकर हमेशा तनाव महसूस करता है लेकिन यदि वह इसमें से कुछ पल प्रभु भक्ति और सत्संग के लिए निकाल लेगा तब उसे ना केवल तनाव से मुक्ति मिलेगी बल्कि वह ईश्वर के अधीन भी हो सकेगा, इसलिए प्रभु भक्ति करें,

भगवान श्रीकृष्ण ने यही संदेश दिया है कि अपने जीवन में बदलाव के लिए सत्संग और प्रभु भक्ति अवश्य करें ताकि जीवन को मोक्ष का मार्ग मिल सके। उक्त उद्गार प्रकट किए श्रीवृन्दावनधाम से पधारे संत श्री जुगलकिशोर जी महाराज ने जो स्थानीय जल मंदिर मैरिज हाउस परिसर में नत्थू हलवाई परिवार द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवथा के प्रसंग के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओ को भक्ति और सत्संग पर आधारित आशीर्वचन प्रदान कर रहे थे।

इस दौरान कथा प्रारंभ से पूर्व कथा यजमान राजेन्द्र भारद्वाज, महेन्द्र भारद्वाज व आदि के द्वारा सर्वप्रथम श्रीमद् भागवत कथा का पूजन किया गया तत्पश्चात संत श्रीजुगलकिशोर जी महाराज से आर्शीवाद प्राप्त कर उपस्थितजनों के साथ प्रभु की आरती की गई। इस अवसर पर कथा के प्रसंगों में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर पूरे प्रांगण को सजाया गया तो वहीं श्रीकृष्ण रूकमणी विवाह कार्यक्रम में आकर्षक झांकी ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया और संगीत के बीच श्रीकृष्ण-रूकमणी विवाह के गीत भी गाए गए।

साथ ही श्रीकृष्ण की लीलाओं के दौरान उनके बाल्यकाल से लेकर युवा अवस्था के बीच की पौराणिक कथाओं का वृतान्त भी संत श्री जुगलकिशोर जी महाराज ने श्रवण कराए और बताया कि आज के समय में हमें किसी का अनादर नहीं करना चाहिए बल्कि आगन्तुक जन का स्वागत करना चाहिए, अतिथि देवो भव: की परंपरा का सदैव निर्वाह करें, क्योंकि पता नहीं कब किस रूप में अतिथि देव के रूप में भगवान ही आपके द्वार आ जाए।

इसलिए अतिथियों के स्वागत सत्कार, ब्राह्मणों का आदर, स्वागत सम्मान जरूर करें ताकि ऐसे दैव्य स्वरूपों का आशीष सदैव इस मानव जाति ही नहीं बल्कि अन्य कीट-जीव जन्तु व वनस्पति प्राणियों पर भी बना रहे। आज श्रीमद् भागवत कथा प्रसंग के माध्यम से भी केवल आपजन श्रद्धालु ही नहीं बल्कि आसपास का संपूर्ण वातावरण भी इस प्रभु भक्ति में लीन है और सभी मिलकर ईश्वरीय भक्ति कर रहे है।

कथा के दौरान सुदामा-चरित के साथ श्रीमद् भागवत कथा का समापन होगा इसके पूर्व समस्त धर्मप्रेमीजनों से जल मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का पुण्य लाभ प्राप्त करने के लिए समस्तजनों से आग्रह किया गया हैकि वह दोप.1 बजे से सायं 5 बजे तक होने वाली श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने जल मंदिर मैरिज हाउस पधारें।