बज गया बैंड का बैंड, फूलों से गायब महक, अब पकवान भी फीके: कुछ करने नहीं दे रहा है ये - Shivpuri News

मनोज भार्गव शिवपुरी। बज गया बैंड का बैंड,फूलो से महक गायब,अब लगेंगें पकवान भी फीके,कुछ करने नही दे रहा हैं ये कोरानो। पिछले साल मार्च में लॉकडाउन लगने के कारण शादियो पर ग्रहण लग गया था। शादी से जुडे कारोबार ठप्प हो गए थे,लेकिन धीरे-धीरे शादियो में रौनक लौटने लगी थी। कोरोना का ग्राफ नीचे की ओर जा रहा था,कोरोना के नियमो मे बदलाव होने लगे थे,लेकिन अचानक कोरोना संक्रमण देश में तेजी से बड रहा हैं और यह पिछले साल से अधिक घातक दिख रहा हैं। ऐसे में फिर हमारे जीवन पर पांबदिया लगने लगी हैं।

इन नियमो में सबसे ज्यादा असर शादी और शादियों से जुडे कारोबार पर पडेगा। प्रशासन ने शादी समारोह में 200 लोगों की अनुमति दी है। ऐसे में शादी समारोह के कारोबार से जुडे लोगों का कहना है कि उनके सामने एक बार फिर रोजगार का संकट गहरा गया है। शादियों के चलते हलवाई, बैटर, बैंड सहित मैरिज हॉल से लेकर फूल वालों और आतिशबाजों को काम मिलता था लेकिन अब उनके सामने रोजगार का संकट खडा हो गया है।

बंद करना पड सकता है फोटोग्राफी का काम

शहर के फोटोग्राफरों की माने तो शादी समारोहों में पहले वह फोटो वीडियोग्राफी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते थे लेकिन अब शादी समारोह में संख्या सीमित होने से उनका बजट भी घट गया है ऐसे में लेवर को पैसा तो देना है और काम कम होने के चलते उनके सामने रोजगार का संकट गहरा गया है।

बैंड वालों की भी संख्या हुई कम

बैंड कारोबार से जुडे लोगों का कहना है कि बैंड कारोबार में बघघी, घोडा से लेकर लाइट व डीजे में लोगों को रोजगार मिलता था लेकिन शादियों पर पिछले साल कोरोना ने काम बिगाडा तो इस बार सहालग चलने की उम्मीद थी लेकिन इस बार फिर से कारोना का संकट गहराने लगा है ऐसे में कारोबार से अच्छी उम्मीद नहीं हैं।

3 से 4 लाख का मैरिज हॉल अब कम में हो रहा बुक

पहले लोग शादी समारोह धूमधाम से आयोजित करते थे लेकिन कोरोना की बंदिशों के चलते लोगों की संख्या कम हुई है ऐसे में अब लोग भी मैरिज हॉलवालों को कम पैसा दे रहे हैं जो मैरिज हॉल पहले 3 से 4 लाख में बुक होते थे वह अब कम पैसों में अपनी बुकिंग कर रहे हैं।

हलवाई भी नाखुश

शादियों में हलवाई को भी काम मिलता था और वह अपने साथियों को भी रोजगार देते थे लेकिन कोरोना के चलते जहां मेहमान घटे तो लजीज खाने का स्वाद भी घटा ऐसे में हलवाईयों को अब उनके मुहं मांगे दाम तक नहीं मिल रहे हैं।