पारिवारिक प्रेम की प्रतिमूर्ति है श्रीराम का परिवार: आर्या - Shivpuri News

शिवपुरी। जब कैकई ने भगवान राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा तब हरेक व्यक्ति के मन में ख्याल आया होगा कि कैकई ने अपने निजी स्वार्थों के चलते ऐसा किया है लेकिन श्रीराम के परिवार में धैर्य, त्याग, तपस्या और समर्पण का भाव भी है जहां कौशल्या जैसी मॉं है तो सीता जैसी बहू भी जो परिवार को जोडऩे वाली प्रतिमूर्ति भी हैं।

जिसने अपना सर्वस्व राजपाट त्यागकर पति धर्म निभाते हुए ससुर आज्ञा मानी और अपने परिवार को एक साथ जोडऩे के लिए अपने देवरानी, जिठानी को भी पूर्ण रूप से अपने से जोड़कर पूरे राजमहल की जिम्मेदारी दी, ऐसा घर-परिवार आज के समय भी होना चाहिए ताकि हरेक घर में श्रीराम का वास हो।

यह बात हरियाणा से आई प्रसिद्ध वेदकथा वाचक दीदी अंजलि आर्या ने जो स्थानीय आर्य समाज मंदिर में आयोजित वाल्मीकि रामकथा का वाचन करते हुए भगवान राम के वन गमन कथा का प्रसंग श्रवण कराते हुए उपस्थित श्रोताओं से अपने घर-परिवार में जुड़कर रहने का संदेश दे रही थी।

इस अवसर पर कथा यजमान इन्द्रजीत- आरती व संजय- मोना ढींगरा परिवार के द्वारा सर्वप्रथम यज्ञ में भाग लिया गया तत्पश्चात वाल्मीकि रामकथा का वाचन किया गया। इसके साथ ही कथा में पारिवारिक जुड़ाव को लेकर दीदी अंजलि आर्या ने बताया कि आज के समय में परिवार को एकजुट और संगठित रहने की आवश्यकता है ताकि परिवार का जुड़ाव सदैव साथ बना रहे, आर्य समाज ने वेदों के पथ पर चलकर हमेशा एकजुटता का परिचय दिया हैं।

और यही कारण है कि भले ही आज कथा यजमान कोई हो लेकिन आयोजित कार्यक्रम में समस्त आर्य समाज की भागीदारी होती है यही कारण है कि ना केवल आर्य समाज वरन् अन्य धर्मप्रेमीजन भी आर्य समाज के पदचिह्नों पर चलकर अपने जीवन में बदलाव ला सकते है और जीवन जीने की कला को वेदों और कथाओं के माध्यम से जान सकते है। इस दौरान कथा में कई तरह की जिज्ञासाओं का समाधान भी दीदी अंजलि आर्या के द्वारा किया गया।