करैरा का काला सच:जनता का फैसला हुआ है हर बार गलत, नहीं चुन पाए विकास करने वाला नेता - karera News

करैरा। यह करैरा का काला सच हैं,कि करैरा की कमान आज तक ऐसे प्रतिनिध के हाथ में नही आई जो करैरा का विकास करा सके। करैरा नगर में मूल भूत सुविधाओ की कमी है। करैरा नगर विकास की प्रतीक्षा कर रहा हैं,और इस प्रतीक्षा को लंबा खिचने का काम किया हैं भाजपा सरकार ने।

नगरीच चुनाव सिर पर खडे हैं करैरा नगर के पुराने मुददे हवा में आने लगे हैं। करैरा नगर परिषद के चुनाव में स्थाई मंडी और स्थाई बस स्टैंड का मुददा इस चुनाव में सिर चढकर बोलेगा। करैरा के नवीन बस स्टेंड और सब्जी मंडी के लिए प्रदेश में आई कांग्रेस सरकार ने 4.42 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था।

लेकिन उपचनुाव में यहां भाजपा को हराने की सजा करैरा के नगर वासियो को मिली,भाजपा सरकार ने भाजपा के प्रत्याशी के हार के बाद सरकार ने विकास की ये राशि वापस ले ली। इसके बाद इसे लौटाने के लिए मांग भी उठी, लेकिन कुछ हो नहीं पाया। कुल मिलाकर सीधे लिखे जनता का फैसला हर बार गलत हुआ हैं,जनता ने ऐसा प्रतिनिधि नही चुना जो जनता के हित के लिए या विकास के लिए लडकर कुछ लाया हो।

40 हजार आबादी, न स्थायी मंडी और न बस स्टैंड

40 हजार की आबादी वाली करैरा विधानसभा में न ही स्थायी सब्जी मंडी है और न ही बस स्टैंड है। बस स्टैंड होने के बाद भी सुविधाओं का अभाव होने के चलते झांसी शिवपुरी मार्ग की बसे बस स्टैंड के अंदर नहीं जाती हैं। करैरा पुलिस चौकी सहायता केंद्र को बस आपरेटरों ने अस्थायी बस स्टैंड बना दिया है।

इसके अलावा बसों का अंदर न जाना अतिक्रमण एक अहम मुद्दा है जो आज तक प्रशासनिक अधिकारियों ने हल नहीं किया। सब्जी विक्रेता हाथ ठेलों पर या फुटपाथ पर ही सब्जी की दुकानें लगाते हैं। सड़क पर सब्जी मंडी लगने से बस स्टैंड के अंदर से निकलने वाली बसों की यातायात व्यवस्था बाधित होती है।

यह परिवार वादो के भरोसे जीतता रहा,गलती किसकी नेता की या जनता की

नगर परिषद अध्यक्ष पद पर बीते 15 साल से कोमल साहू के परिवार का सदस्य रहा है। दो बार वह खुद तो एक बार उनकी पत्नी रजनी साहू यहां अध्यक्ष रही हैं। हर बार उन्होंने सब्जी मंडी और बस स्टैंड की व्यवस्था करने की बात भी कही, लेकिन जीतने के बाद आज तक सब्जी मंडी नहीं बन सकी और न ही बस स्टैंड। कोमल साहू इसका ठीकरा अधिकारियों के माथे पर फोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि सब्जी मंडी के लिए जगह चिन्हित की थी, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने साथ नहीं दिया।

सब्जी मंडी और स्थाई बस स्टैंड नही दिलवा सके चुने हुए प्रतिनिधि

थोक सब्जी और फल मंडी भी आढ़तिया अब अपनी खुद की जगह में न लगाकर सड़क पर लगाने लगे है, बस स्टैंड के बाहर अल सुबह 6 बजे से 8 बजे ताक मुख्य सड़क पर मंडी करने बालो का कब्जा हो जाता है।

तराजू कांटे सामान सब सड़क पर रख लिया जाता है इससे यहां दो घंटे के लिए पूरी तरह जाम लग जाता है और वाहन नही निकल पाते हैं। इस ओर न तो नगर परिषद प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही पुलिस। इससे इन सब्जी फल विक्रेताओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि ये वाहन चालकों से झगड़ने तक के लिए तैयार हो जाते हैं।

अब कांग्रेस इसको बनाऐगी चुनाव में हथियार

नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाने की तैयारी में है। कांग्रेस नेता गोपाल गोयल का कहना है कि जब प्रदेश में हमारी सरकार आई, तो सबसे पहले सब्जी मंडी, बस स्टैंड और रिंग रोड को पास कराया। इसके टेंडर होने की वाले थे कि सरकार बदल गई और विकास अधर में लटक गया। उपचुनाव के बाद आए हुए 4.42 करोड़ रुपये भी वापस चले गए। ये भी देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस मुद्दे को किस तरह से डील करती है।

इनका कहना है बस.........

नगर के विकास में हम कोई कसर नहीं रहने देंगे। जो धन नगर के विकास के लिए आया था वह वापस जरूर चलाया गया है क्योंकि भाजपा को करैरा की जनता ने बुरी तरह से हराया था। हार की बौखलाहट की वजह से शासन ने विकास की धनराशि को वापस ले लिया। इसे देने की मांग कर रहे हैं और इसे वापस लेकर आएंगे।
प्रागीलाल जाटव, विधायक करैरा।