5 दिन से खून से लथपथ हैं महिला, डॉक्टर के बोल वचन....जहर का इंजेक्शन लगा देते हैं - Shivpuri News

शिवपुरी। एक महिला को पिछले 5 दिनो से ब्लीडिंग हो रही हैं,लेकिन सरकारी अस्पताल के डॉक्टर उसका आपरेशन नही कर रहे,बल्कि उसकी मौत होने की सूचना परिजनो को भी दे दी। परिजन रोते-रोते अस्पताल भी पहुंच गए,लेकिन बाद में पता चला कि महिला जिंदा हैं। इस बात पर वह डॉक्टर पर भडक गए तो डॉक्टर ने गाली ग्लोच करते हुए कहा कि डॉक्टर जहर का इंजेक्शन भी लगा देता हैं।

अब परिजन डर गए और महिला को प्राईवेट अस्पताल में ईलाज के लिए भर्ती कर दिया गया है। जहर से भरा इंजेक्शन देने वाले डॉक्टर का नाम डॉक्टर राजपूत बताया जा रहा हैं।

जानकारी के अनुसार गीता जाटव उम्र 40 वर्ष पत्नि अशोक जाटव निवासी सेसई सडक की बच्चेदानी में इंफेक्शन की शिकायत के चलते 23 फरवरी को सुबह 11 बजे जिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया। बताया जा रहा था कि गीता की बच्चेदानी में इंफेक्शन होने के कारण लगातार ब्लीडिंग हो रही थी।

अस्पताल में मौजूद डॉक्टरो ने की इस केस को आपरेट किया जाऐगा और बच्चेदानी को निकालना होगा। परिजन आपरेशन के लिए तैयार हो गए,लेकिन आज दिनांक तक उक्त महिला का आपरेशन नही किया गया।

गीता के बहनोई ने मानसिंह जाटव निवासी अमरपुर पडौरा ने बताया कि गीता का अल्ट्रासाउंड होना था लेकिन आज दिनांक तक अल्ट्रासाउंड नही किया गया,इस कारण आपरेशन नही किया गया,आपरेशन में देरी होने के कारण लगातार ब्लेडिंग हो रही थी इस कारण मरीज की हालत गंभीर हो गई।

आज सुबह जब नर्सो ने कहा दिया कि तुम्हारे मरीज की मौत हो गई। हम सब परिजन रोते रोत अस्पताल पहुंच गए,लेकिन उसकी सांसे चल रही थी डॉक्टरो ने फिर ईलाज शुरू किया तो उसमे सुधार हो गया।

हमने डूयुटी डॉक्टर राजपूत से बातचीत की आप 5 दिन से आपरेशन की तारिख दे रहो हो लेकिन आपरेशन नही कर रहे हो। इस पर डॉक्टर साहब भडक गए हमे भला बुरा कहने लगे,और कहने लगे मेरी मंत्री तक पकड हैं आप को जो करना है कर लो,डॉक्टर तो जहर का इंजेक्शन भी लगा देता है।

बतया जा रहा है कि गीता की आर्थिक हालत ठीक नही हैं उसका पति कारीगरी करता हैं,5 दिन से उस पर पैसे न होने के कारण उसे टरकाया जा रहा था। डॉक्टर की धमकी के कारण परिजन डर गए और गीता को प्राईवेट नर्सिग हॉम में भर्ती कराया गया है,अब उसका वहां ईलाज चल रहा है।

इस पूरे मामले पर गौर करे तो स्पष्ट दिख रहा हैं कि गीता का आपरेशन सिर्फ पैसो के कारण नही किया जा रहा हैं। गीता के परिजनो ने बताया कि उन पर आयुषमान कार्ड भी है। यह मामला स्पष्ट करता हैं कि अस्पताल प्रबंधन मरीजो के साथ क्या सलूक करता हैं।

एक डॉक्टर की गलती के कारण एक गरीब परिवार सरकारी लाभ लेने से वंचित हो गया और अब आयुष्मान कार्ड के भरोसे प्राईवेट ईलाज कराने प्राईवेट हॉस्पिटल चला गया अब उसके पैरो से जमीन फिर खिसकने वाली हैं जब उसे पता चलेगा कि सरकार ने आयुष्मान कार्ड से एस्टोटॉमी की सुविधा बहार कर दी है।