आरोप:भ्रष्टाचार मे लिप्त अधिकारी ने बदला कलेक्टर का आदेश, कलेक्टर भी चुप - Shivpuri news

शिवपुरी। जिले में भ्रष्टाचार अधिकारी कितने हावी और निरकुंश से हैं जो इस शिकायत से संज्ञान में आता हैं ओर शासन की जनहितैषी योजनाओ का पतीला अपने फायदे के लिए लगाया जा रहा हैं। एक भ्रष्टाचारी अधिकारी ने भ्रष्टाचार करने के लिए और अपने लोगो को फायदा पहुचाने के लिए पब्लिक को परेशान कर दिया। इसकी विधिवत शिकायत भी की गई हैं। इस पूरे मामले में जो सबसे बडी बात हैं कि अधिकारी ने कलेक्टर के आदेश तक को बदल डाला।

पढिए क्या हैं पूरा मामला क्या हैं शिकायत
जिले के पिछोर में पदस्थ रहे और वर्तमान में करैरा में पदस्थ कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी द्वारा जिला कलेक्टर के आदेश को भी ठेंगा दिखाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस संदर्भ में शिकायतकर्ता वीरेन्द्र कुमार राय पूर्व सरपंच ने बताया कि प्राथमिक वनोपज सह. समिति मर्या. वीरा के तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक शिवदयाल जाटव से मिलकर कनि.आपूर्ति अधिकारी श्री परमार ने प्रबंधक के फर्जी पत्र को आधार बनाकर प्रा.वनो.सह.समिति मर्या. वीरा के कार्य क्षेत्र की सभी 07 शासकीय उचित मूल्य की दुकानों को प्रा. वनोपज सहकारी समिति मर्या.वीरा से हटाकर अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए और पूर्व सरपंच से द्ववेषपूर्ण भावना रखते हुए दूसरी समितियों को दिलाया गया है जो कि वीरा से करीब 70-80 किमी दूर स्थित है।


यह कार्य कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी परमार द्वारा प्रा.सह.समिति मर्या.वीरा से द्वैष रखते हुए वीरा समिति को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की दृष्टि से कार्य किया गया। जिसकी जांच होना चाहिए और दोषी पाए जाने पर संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही भी हो। मामले में तत्कालीन एसडीएम उदयसिंह सिकरवार पर भी फरियादी द्वारा गंभीर आरोप लगाए है और अपने नौकर के नाम 06 शा.उ.मू.की दुकानें देने की बात कही गई।

मामले की शिकायत खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग संचालनालय भोपाल को भी की गई है। इसके साथ ही तत्कालीन एसडीएम से आदेश/खाद्य/2018/921-928 पिछोर दिनांक 31.5.2018 को यह आदेश पारित करा दिया गया और जब तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक शिवदयाल जाटव के 19.12.2017 के पत्र की जांच कराई गई तो मामले में सहकारिता निरीक्षक राकेश सिंह चौहान एवं उपायुक्त सहकारी संस्थाऐं शिवपुरी द्वारा प्रा.वनो.सह.समिति मर्या.वीरा के तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक जाटव को दोषी पाया गया उक्त प्रबंधक को पद से पृथक कर दिया गया और पुलिस में भी केस भी गया और यहां इस गड़बड़ी को देखते हुए कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी रूपेन्द्र पारमार का 5 सितम्बर 2018 को पिछोर से बदरवास तबादला भी कर दिया गया,

वहीं उसी जांच के आधार पर तत्कालीन एसडीएम द्वारा 07 शा.उ.मू.दुकानों जो कि वीरा समिति के कार्य क्षेत्र की है वीरा समिति को 6 अक्टूबर 2018 को पुन: वीरा समिति को सभी उक्त दुकानें संचालित करने को सौंपने के आदेश भी हो गए और यह दुकानें संचालित भी हो रही थी कि तभी कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी श्री परमार की सलाह से उक्त रामदयाल जाटव प्रबंधक द्वारा इस मामले को लेकर माननीय न्यायालय कलेक्टर के यहां अपील की गई इसके बाबजूद भी कलेक्टर द्वारा 4.9.2019 को पारित आदेश में भी सभी 07 शा.उ.मू.की दुकानों को संचालित करने के लिए प्रा.वनो.सह.समिति मर्या.वीरा के ही पक्ष में आदेश दिया गया।

यहां शिकायतकर्ता वीरेन्द्र कुमार राय ने बताया कि कलेक्टर के इस आदेश को ठेंगा दिखाते हुए तत्कालीन कांग्रेस की सरकार बनते ही कनि.आपू.अधिकारी परमार ने अपना तबादला 14.02.2019 को बदरवास से पिछोर करा लिया और पिछोर में पदस्थ होकर यहां तत्कालीन एसडीएम उदय सिंह सिकरवार से सांठगांठ करते हुए एक बार फिर से पुन: 07 दुकानों का संचालन वीरा संस्था से हटाकर अन्य समितियों को फिर से आदेश पारित करा दिया गया।

जिसमें आदेश क्रं./खाद्य/2020/114 दि.18.06.2020 लॉकडाउन के दिनों में जो कि एसडीएम उदय सिंह सिकरवार ने ग्राम खैरोना ग्रा पं कुम्हरौआ तह.पिछोर की शा.उ.मू. की दुकान जिला थोक उपभोक्ता सहकारी भण्डार जिला शिवपुरी को संचालन हेतु आदेश कर अपने नौकर अंशुल जाट निवासी ग्राम गिलटौरा परगना कोलारस को दिलवा दी गई।

पूर्व सरपंच वीरेन्द्र कुमार राय ने बताया कि एसडीएम उदय सिंह सिकरवार जब कोलारस में पदस्थ थे तब श्री सिकरवार द्वारा ग्रा.मोहम्मदपुर मौजा डुमैला तह.कोलारस के पास फार्म हाउस बना लिया है जिसका रकवा लगभग 100 बीघा है जिस पर नौकर यहां खेती करता है और अपने नौकर अंशुल जाट को कोलारस परगने में 06 शा.उ.मू.दुकानें पूर्व से ही दिलवा रखी थी जिनमें अकाझिरी, इचौनिया, धंधेरा, जरिया, पचावली व खरैह शामिल है यह सब नियम विरूद्ध है मामले की जांच की जाना चाहिए और दोषी पाए जाने पर संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही हो।