कांग्रेस में फुट एनपी शर्मा भाजपा में होंगें शामिल, एडवोकेट धाकड़ लडेंगें निर्दलीय चुनाव - SHIVPURI NEWS

शिवपुरी।
पोहरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार का निर्णय होने के बाद टिकट के अन्य दावेदार अपनी भूमिका स्थापित करने में लगे हुए हैं। कांग्रेस ने पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला को उम्मीदवार घोषित किया है। ब्राह्मण वर्ग से एक अन्य दावेदार पूर्व मंडी अध्यक्ष एनपी शर्मा ने इससे रूष्ट होकर कांग्रेस से विमुख होने का फैसला लिया है।

श्री शर्मा के नजदीकी सूत्र बताते हैं कि वह कल दोपहर पोहरी में राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के आतिथ्य में आयोजित मंडल सम्मेलन में अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल होंगे। श्री शर्मा ने इस बात की पुष्टि की है कि वह दिल्ली जाकर सिंधिया से भी मिल आए हैं।

टिकट के एक अन्य दावेदार विनोद धाकड़ जहां निर्दलीय रूप से चुनाव लडऩे का मन बना रहे हैं। वहीं जनपद पंचायत पोहरी के अध्यक्ष और टिकट के दावेदार प्रधुम्र वर्मा ने पार्टी के फैसले को शिरोधार्य करते हुए कांग्रेस में ही बने रहने का निर्णय लिया।

पोहरी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में इस बार कांग्रेस से टिकट के अनेक दावेदार थे। पोहरी विधानसभा क्षेत्र में अब तक हुए पिछले 10 चुनाव में पांच बार ब्राह्मण और पांच बार किरार उम्मीदवार विजयी होने में सफल रहा। इसके अलावा अन्य किसी वर्ग के उम्मीदवार को अभी तक यहां से विजयश्री हांसिल नहीं हुई।

कांग्रेस में इसी कारण ब्राह्मण और किरार वर्ग से टिकट के लिए अनेक दावेदार थे। ब्राह्मण वर्ग से जहां पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला टिकट मांग रहे थे। वहीं पूर्व मंडी अध्यक्ष एनपी शर्मा ने भी टिकट के लिए पूरा जोर लगाया। हरिवल्लभ शुक्ला पोहरी से दो बार चुनाव जीत चुके हैं और दो बार हार भी चुके हैं।

पूर्व मंडी अध्यक्ष एनपी शर्मा भी 2008 में पोहरी से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का टिकट दिया था। कांग्रेस मेें आने के बाद एनपी शर्मा ने आरोप लगाया था कि पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला को हराने के लिए उनका मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया।

लेकिन अब टिकट न मिलने के बाद एनपी शर्मा पुन: महाराज शरणम गच्छामी हो गए हैं। श्री शर्मा ने बताया कि उनके साथ भाजपा में 400-500 कांग्रेसी कार्यकर्ता भी जाएंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके पुत्र जो कि जिला कांग्रेस के महामंत्री हैं, वह भी भाजपा में जाएंगे, तो उनका जबाव है कि इसका निर्णय उनके पुत्र स्वयं लेंगे। धाकड़ वर्ग से टिकट के दावेदार कांगे्रस में प्रधुम्र वर्मा और विनोद धाकड़ थे।

भाजपा उम्मीदवार सुरेश धाकड़ का नाम तय हो जाने के बाद भी कांग्रेस में धाकड़ उम्मीदवार की पैरवी 1993 और 2018 के चुनाव को ध्यान में रखकर की जा रही थी। दोनों चुनावों में कांग्रेस और भाजपा ने धाकड़ उम्मीदवारों को टिकट दिया था। लेकिन दोनों बार जीत कांग्रेस के धाकड़ उम्मीदवार को मिली थी।

लेकिन इस बार कांग्रेस ने धाकड़ वर्सेज धाकड़ की रणनीति को अंगीकार नहीं किया और भाजपा के किरार उम्मीदवार के मुकाबले ब्राह्मण उम्मीदवार हरिवल्लभ शुक्ला पर दाव लगाया। ऐसी स्थिति में टिकट के दावेदार विनोद धाकड़ के समर्थक उन पर निर्दलीय रूप से चुनाव लडऩे का दबाव बना रहे हैं और क्षेत्र में घूमकर श्री धाकड़ अपनी स्थिति का आंकलन भी कर रहे हैं।

हालांकि चुनाव न लडऩे के लिए उन्हें कांग्रेस और भाजपा दोनों के नेतागण मना रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि वह 15 या 16 अक्टूबर को नामांकन फार्म भेंरगेे और इसके पूर्व जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे देंगे। जबकि दूसरे उम्मीदवार प्रधुम्र वर्मा ने बताया कि उन्होंने टिकट के लिए बहुत प्रयास किया।

लेकिन पार्टी ने जब हरिवल्लभ को टिकट दे दिया तो वह इस फैसले से सहमत हैं और पार्टी लाईन पर काम करेंगे। हालांकि उन्होंने सहमति व्यक्त की कि यदि भाजपा के किरार उम्मीदवार के मुकाबले कांग्रेस किरार उम्मीदवार को टिकट देती तो इसका फायदा चुनाव में कांग्रेस को निश्चित रूप से मिलता। लेकिन फिर भी वह कोशिश करेंगे कि धाकड़ मतदाताओं के भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में धु्रवीकरण को रोका जा सके।