इमोशनल ड्रामा के भरोसे कांग्रेस के प्रत्याशी: अंतिम इच्छा की दुहाई देकर मांग रहे हैं वोट - Shivpuri News

शिवपुरी। पोहरी और करैरा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी क्रमश: हरिवल्लभ शुक्ला और प्रागीलाल जाटव भावनात्मक आधार पर वोट मांगने में जुटे हैं। पोहरी के कांग्रेस प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला उपचुनाव को अपना आखिरी चुनाव बताकर वोट मांग रहे हैं। वहीं करैरा के कांग्रेस प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव तीन चुनावों में अपनी हार के कारण अपने पक्ष में सहानुभूति वातावरण बनाने में संलग्र हैं।

हालांकि दोनों विधानसभा क्षेत्रों मेें दल बदल का कोई मुद्दा नहीं है। क्योंकि चुनाव लडऩे वाले सभी प्रत्याशी दल बदलू रहे हों। चाहे वह करैरा के भाजपा प्रत्याशी जसवंत जाटव हों या कांग्रेस प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव अथवा पोहरी के भाजपा प्रत्याशी सुरेश राठखेड़ा हों, कांगे्रस प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला हो, बसपा के प्रत्याशी ने भी दल बदला हैं पहले वह भाजपा के नेता थे और शिवुपरी विधायक और प्रदेश मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के खास थे। देखना यह है कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशियों की इमोशनल अपील कितनी असरकारक साबित होती है।

पोहरी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी हरिवल्लभ के अलावा उनके समर्थन में आने वाले कांग्रेस नेता भी हरिवल्लभ के इस चुनाव को उनका आखिरी चुनाव बता रहे हैं। हरिवल्लभ के प्रचार में आए पिछोर विधायक और पूर्व मंत्री केपी सिंह ने तो अपनी सभा में यहां तक कहा कि हरिवल्लभ का यह आखिरी चुनाव है और आखिरी इच्छा तो हर किसी की पूरी की जाती है।

इसलिए इस चुनाव में हरिवल्लभ को जिताकर उनकी आखिरी इच्छा पूरे करें ताकि मन में कोई पश्चाताप न रहे। उनके आखिरी चुनाव में उनकी सारी गलतियों को भूल जाएं और उन्हें जिताएं। कांग्रेस प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला भी हर सभा में यही कह रहे हैं कि उपचुनाव के बाद वह पोहरी से चुनाव नहीं लड़ेंगे और उनके पुत्र आलोक शुक्ला भी पोहरी से अपनी दावेदारी नहीं करेंगे,अगर आलोक चुनाव लडेंगें तो वह शिवपुरी से।

हरिवल्लभ कांग्रेस टिकट न मिलने से नाराज दावेदारों से भी यहीं कह रहे हैं कि आखिरी बार तो मेरा साथ दे दो। अंत समय में तो आखिरी इच्छा का हर कोई सम्मान करता है। हरिवल्लभ के पुत्र आलोक शुक्ला भी भावुक अंदाज में कह रहे हैं कि उनके पिता का यह आखिरी चुनाव है।

पोहरी की राजनीति मेंं उन्होंने बचपन और जवानी देखी। बचपन में गलतियां भी हुई। लेकिन जवानी में पोहरी को संभाला भी और इस विधानसभा क्षेत्र का नाम देश और प्रदेश में पहुंचाया। अब उनके पिता का बुढ़ापा है और अब इस बुढ़ापे में उनका साथ देना हम सबका धर्म है। देखना यह है कि हरिवल्लभ की यह इमोशनल अपील मतदाताओं को किस हद तक प्रभावित करती है।

करैरा के कांगे्रस प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव भी भावनात्मक आधार पर मतदाताओं को मोहित करने में जुटे हुए हैं। वह हर सभा में यहीं कह रहे हैं कि मैं 2008 से आपकी सेवा में हूूं और लगातार तीन चुनावों मेें हारने के बाद भी आपकी सेवा से पीछे नहीं हटा हूं। इस बार तो मुझे अवसर देकर जिताईए फिर देखिए करैरा का विकास कैसे नहीं होता है। लगाातर तीन चुनाव हारने के कारण प्रागीलाल के प्रति क्षेत्र में सहानुभूति का वातावरण भी है और जिसे भूनाने में प्रागीलाल कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

प्रागीलाल के प्रचार में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता तो कम दिखते हैं। पूर्व विधायक शंकुतला खटीक और केएल राय जैसे नेता कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी प्रागीलाल के प्रचार की कमान ऐसे लोगों ने संभाल रखी है जो राजनीति में नहीं हैं। प्रागीलाल समर्थकों का दावा है कि आम आदमी उनके प्रचार में संलग्र है।