इस फार्म हाउस पर आकर शून्य हो जाते हैं सरकारी नियम, मामला करोड़ों की भूमि पर कब्जे का / SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। जिले में भू माफियाओं ने प्रशासनिक मिलीभगत से करोड़ों रुपए मूल्य की सरकारी भूमि कब्जा रखी है। नियम विरुद्ध ढंग से विक्रय से वर्जित पट्टे की जमीन एक नहीं दो-दो बार विक्रय हो चुकी है और अब अधिकारियों से लेनदेन कर इसके नामांतरण का खेल खेला जा रहा है जो अपने आप में भू माफियाओं की प्रशासनिक पकड़ का परिचायक है।

शिवपुरी तहसील अंतर्गत सुरवाया के निकट चक सुनरिया गांव में एक आलीशान कृषि फार्म जो पूर्व में चोपड़ा फार्म के नाम से जाना जाता था इसमें बड़े स्तर पर भूमि घोटाला हुआ है। यहां इस फार्म हाउस के कब्जे में शासन की लगभग 110 बीघा भूमि भू माफियाओं द्वारा कब्जाई गई है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 1987-88 के दरम्यान शिवपुरी निवासी चोपड़ा परिवार के नाम लगभग 30 बीघा भूमि के पट्टे यहां तत्कालीन राजस्व अधिकारी द्वारा किए गए। यह पट्टे की भूमि विक्रय से वर्जित भूमि थी किंतु इसी भूमि को बिना अनुमति के ही आगरा के एक पूर्व विधायक को बेच दिया गया। उक्त पूर्व विधायक ने यह भूमि एक पंजाब के एक कारोबारी को विक्रय कर डाली।

दो बार हुए इस विक्रय में किसी तरह से भी विक्रय की अनुमति लेना मुनासिब नहीं समझा गया। यहां बता दें कि वर्ष 1987- 88 में ही इसी फार्म हाउस से लगी करीब 50 बीघा भूमि पर वृक्षारोपण पट्टा दिया गया, लेकिन अनियमितता सामने आने पर कुछ वर्षों बाद इस 50 बीघा प्लांंटेशन पट्टे की भूमि का यह वृक्षारोपण पट्टा प्रशासन द्वारा निरस्त कर दिया गया।

अब बड़ा सवाल यह कि पट्टा निरस्ती की यह कार्यवाही सिर्फ कागजों में हुई। प्रशासन ने इस 50 बीघा भूमि को अपने कब्जे में लेना मुनासिब नहीं समझा। नतीजतन आज यह 50 बीघा भूमि भी इस फार्म हाउस संचालक के ही कब्जे में बनी हुई है।

एक और बड़ा पेच यहां यह निकल कर सामने आ रहा है कि चक सुनरिया में स्थिति फार्म हाउस की बाउंड्री के भीतर लगभग 30 बीघा भूमि और भी शासकीय खाते की है जिसे भी फार्म हाउस संचालक ने कब्जा रखा है। इस प्रकार 110 बीघा के लगभग सरकारी भूमि यहां कब्जे में है जो कि करोड़ों रुपए मूल्य की भूमि है।

इस तमाम भूमि के नामांतरण का प्रयास भी किया जा रहा है और प्रकरण शिवपुरी तहसील में विचाराधीन है। इस संबंध में विधि विशेषज्ञ अनिल व्याघ्र का कहना है कि विक्रय से वर्जित भूमि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के किसी के द्वारा क्रय की जाती है तो किया गया क्रय विक्रय और नामांतरण तक विधि अनुसार तत्काल शून्य होने योग्य है।

जानकारी के अनुसार जिस व्यक्ति ने इस भूमि को वर्तमान में क्रय किया हुआ है और जो इसके नामांतरण के प्रयास कर रहा है उसने बिनेगा चिटोरा क्षेत्र में लगभग 400 बीघा वन भूमि को षड्यंत्र पूर्वक एक भूमाफिया को बेचने का कारनामा पिछले दिनों अंजाम दिया है।

जिसमें भी यहां के तत्कालीन एसडीएम सहित कई अधिकारी जांच के घेरे में आ रहे हैं। बिनेगा के समीप स्थित इस भूमि को वर्तमान में एनर्जी प्लांट का काम कर रही एक कंपनी के नाम विक्रय किए जाने की सुगबुगाहट है। सुरवाया क्षेत्र के चक सुनरया फार्म में सामने आ रहे इस भूमि घोटाले पर जिला प्रशासन क्या कुछ कार्रवाई करता है यह देखना काबिले गौर होगा।