विकास का दर्द झेल रहे हैं ग्रामीण: वर्षाकाल में टापू बन जाता है गांव, करेंगे मतदान का बहिष्कार - POHRI NEWS

पोहरी।
खबर जिले के अंतिम छोर के गांव बूडदा से आ रही हैं इस गांव के लोग विकास का दंश झेल रहे हैं। बताया जा रहा हैं कि यह गांव डेम के डूब क्षेत्र में आने से मुआवजा मिलना था लेकिन मुआवजा नही मिला है और गांव का विस्थापन भी नही हुआ हैं इस कारण गांव वर्षाकाल में टापू बन जाता हैं। ग्रामीण पानी को भी तरसने लगते है।

बताया जा रहा हैं कि 560 लोगों को विस्थापन का मुआवजा मिलना था,लेकिन दिया महज 56 को, जबकि गांव के ग्रामीण मुआवजे की मांग को लेकर साल भर पहले भी आंदोलन कर चुके हैं,लेकिन कोई हल नहीं निकला।कलेक्टर ने तत्समय कमेटी बनाकर जांच कर मुआवजा देने की बात कही थी पर आज दिनांक तक मुआवजा नहीं मिला। ऐसे में यदि किसानों को मुआवजा नहीं मिला तो वह पोहरी में होने वाले उपचुनाव का बहिष्कार करेंगे। यह बात ग्राम बूड़दा के किसानों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर कही ।

ग्रामीणों ने एसडीएम को बताया कि बूड़दा गांव में पार्वती नदी पर सन 2012 में अपर ककैटो डैम का निर्माण किया गया था। उस समय सर्वे में पूरे गांव को डूब क्षेत्र में मानते हुए विस्थापन और मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में केवल 56 लोगों को ही विस्थापित कर मुआवजा दिया गया, जबकि 560 ग्रामीणों को न तो गांव से विस्थापित किया गया और न ही मुआवजा दिया गया।

मजबूरी में ग्रामीणों को गांव में ही रहना पड़ रहा हैं। बरसात के दौरान डैम में पानी भर जाता हैं, तब गांव में चारों तरफ पानी भर जाता है । डूब क्षेत्र में आने के चलते मूलभूत सुविधा भी. उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। यहां तक कि ग्रामीणों को पीने का पानी लेने दूसरे गांव जाना पड़ता हैं।

इन सब समस्याओं की जानकारी प्रशासन को भी है और 1 वर्ष पूर्व जब ग्रामीणों द्वारा अपनी मांगों के संबंध में आंदोलन किया गया,तो कलेक्टर ने कमेटी का गठन किया। इस कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में गांव को डूब क्षेत्र में माना और कलेक्टर ने रिपोर्ट बनाकर राज्य सरकार को भेजी,लेकिन अभी तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं हुआ।

इससे ग्रामीण परेशान हैं और चेतावनी देते हैं कि यदि हमारी मांगें नहीं मानी गई तो पोहरी विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव में मतदान नहीं करेंगे। इस पर एसडीएम ने उनके आवेदन पर कार्रवाई करने की बात कही