जिले में आने वाले उपचुनावो में कितनी घातक हैं बीएसपी कांग्रेस के लिए:पढिए पूरी रिर्पोट / Shivpuri News

शिवपुरी। जिले में होने वाले उपचुनावो की तैयारी राजनीतिक दलो ने पूर्ण कर ली है। जिलें में भाजपा और बसपा के पत्ते ओपन हो चुके हैं। दोनो दलो ने अपने लगभग प्रत्याशी घोषित कर चुके हैं,लेकिन कांग्रेस का प्रत्याशी अभी घोषित नही हैं। कांग्रेस का कार्ड अभी छुपा हैं। आम तौर पर माना जाता हैं कि बसपा पार्टी का उम्मीदवार कांग्रेस के वोटो पर सैंध मारता हैं जिसका फायदा बीजेपी को मिलता हैं। सवाल यह बडा हैं कि कितनी घातक हो सकती हैं बीएसपी कांग्रेस के लिए।

पहले बसपा की ताकत की बात करते हैंं

माना जाता हैं कि बसपा कांग्रेस को कमजोर करती हैं लेकिन पिछले 2018 के आम चुनावो की बात करे तो यह बात गलत साबित होती हैं 2018 के विधानसभा चुनाव में यह सामान्य धारणा गलत साबित हुई । उस चुनाव में दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवारों ने कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवारों के छक्के छुड़ा दिए थे ।

पोहरी में तो बसपा उम्मीदवार कैलाश कुशवाह ने भाजपा उम्मीदवार प्रहलाद भारती को तीसरे स्थान पर धकेल दिया था और करैरा में भी बसपा उम्मीदवार प्रागीलाल जाटव ने 40 हजार से अधिक मत प्राप्त किए थे। लेकिन इसके बाद भी बसपा की मजबूती का भाजपा को नहीं बल्कि कांग्रेस को फायदा हुआ और दोनों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस उम्मीदवार बहुत अच्छे बहुमत से विजयी हुए।

करैरा में कांग्रेस उम्मीदवार जसवंत जाटव ने भाजपा उम्मीदवार राजकुमार खटीक को 14 हजार मतों से पराजित किया। जबकि पोहरी में कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश राठखेड़ा ने बसपा उम्मीदवार कैलाश कुशवाह को 8 हजार मतों से पराजित किया। जबकि भाजपा उम्मीदवार प्रहलाद भारती और विजयी उम्मीदवार के बीच लगभग 24 हजार मतों का अंतर रहा। दोनों विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में भी बसपा फिर से मैदान में हैं ।

पोहरी से बसपा ने पुनः कैलाश कुशवाह और करैरा से राजेंद्र जाटव को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। 2018 के विधानसभा चुनाव में करैरा से बसपा उम्मीदवार के रूप में लडे प्रागीलाल के कांग्रेस में शामिल होने के कारण राजेंद्र को बसपा ने टिकट दिया है। ऐसे में देखने वाली बात  यह होगी क्या 2018 की कहानी पुनः दोहराई जाएगी अथवा इस बार बसपा की मौजूदगी भाजपा उम्मीदवारों के लिए फायदेमंद साबित होगी ।

अब बात पोहरी विधानसभा की करते हैं

सबसे पहले पोहरी विधानसभा क्षेत्र की बात करते हैं। पोहरी में 2018 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लड़े सुरेश राठखेड़ा पुनः मैदान में हैं। लेकिन इस बार वह कांग्रेस से नहीं बल्कि भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके इस्तीफा देने से पोहरी विधानसभा सीट रिक्त हुई है। लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें राज्यमंत्री बनाकर पॉवरफुल बनाने का प्रयास किया है।

2018 में उनके विरूद्ध खड़े हुए भाजपा उम्मीदवार प्रहलाद भारती इस बार उनके साथ हैं । श्री राठखेड़ा के साथ 2018 के चुनाव में पूर्व मंत्री और इलाके में खासा जनाधार रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया अकेले साथ थे। लेकिन इस बार शिवपुरी जिले की राजनीति में अपना मजबूत जनाधार रखने वाली यशोधरा राजे और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का भी उन्हें साथ मिलेगा । इस तरह से देखा जाए तो प्रथम दृष्टि में सुरेश राठखेड़ा का पलड़ा भारी नजर आ रहा है ।

लेकिन धरातल की सच्चाई हमेशा अलग होती है । उनके विरूद्ध का कांग्रेस उम्मीदवार कौन होगा यह अभी तय नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार पूर्व सीएम कमलनाथ का कहना है कि एक सर्वे और आना बाकी हैं, उसके बाद प्रत्याशी के नाम का ऐलान किया जाएगा।

2018 में कांग्रेस ने भाजपा के धाकड़ उम्मीदवार के विरूद्ध धाकड़ उम्मीदवार को ही टिकट दिया था। धाकड़ वर्सेज धाकड़ की रणनीति अभी तक कांग्रेस के लिए लाभकारी साबित हुई है। लेकिन क्या इस बार भी यह रणनीति यदि कांग्रेस अपनाती है तो उसे सफलता हासिल होगी यह एक बड़ा सवाल है। लेकिन उपचुनाव में इस परिस्थिति में यह भी आशंका है कि कांग्रेस और भाजपा के धाकड़ उम्मीदवार आमने सामने होने से गैर धाकड़ मतों का ध्रुवीकरण बसपा उम्मीदवार कैलाश कुशवाह के पक्ष में भी हो सकता है ।

यह आशंका कितनी सत्य साबित होगी इसके विषय में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है । लेकिन कांग्रेस इस अटकल पर भी सोच विचार कर रही है । श्री कुशवाह 2018 के चुनाव में महज 8 हजार मतों से हारे थे और उनके प्रति एक सॉफ्ट वातावरण भी है । उस चुनाव में गैर धाकड़ और दलित मतों के ध्रुवीकरण से वह 52 हजार तक पहुंचे थे । इस बार भी कांग्रेस ने यदि धाकड़ उम्मीदवार को टिकट दिया तो यह संभावना भी बन सकती है और यह भी हो सकता है कि जीते चाहे कोई भी लेकिन मुकाबले में एक चेहरा बसपा उम्मीदवार कैलाश कुशवाह का होगा ।

कांग्रेस में धाकड़ उम्मीदवार के रूप में विनोद धाकड़ और प्रधुम्न वर्मा,एडवोकेट लक्ष्मीनारायण धाकड और ईंजीनियर शिशुपाल वर्मा प्रसासरत हैं। जबकि गैर धाकड़ उम्मीदवारों में पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला,पूर्व मंडी अध्यक्ष एनपी शर्मा का नाम चर्चित हैं। वहीं बसपा उम्मीदवार कैलाश कुशवाह के कांग्रेस उम्मीदवार बनने की अटकलें भी लगाई जा रही थी लेकिन इस पर विराम लग गया हैं।

कुल मिलाकर बसपा की मौजूदगी के बाद भी कांग्रेस पोहरी विधानसभा क्षेत्र से मुकाबले में बाहर नजर नहीं आ रही। यह स्थिति तब है जबकि कांग्रेस की ओर से अभी उम्मीदवार की घोषणा नहीं हुई हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में परिणाम चाहे कुछ भी हो लेकिन मुकाबला रौचक माना जा रहा हैंं।

अब बात करैरा विधानसभा की करते हैंं

करैरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार पूर्व विधायक जसवंत जाटव की उम्मीदवारी लगभग तय मानी जा रही है। 2018 में वह कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए थे ।बसपा ने राजकुमार जाटव पर दाव लगाया हैं। कांग्रेस की ओर से अभी उम्मीदवार की घोषणा नहीं हुई हैं। लेकिन माना जा रहा है कि कांग्रेस बसपा से आए प्रागीलाल जाटव पर दाव लगा सकती है ।

हालांकि कांग्रेस टिकट के अन्य सभी दावेदार प्रागीलाल को उम्मीदवार बनाए जाने के विरोध में हैं और उन्होंने घोषणा कर दी है कि यदि प्रागीलाल को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया तो वह कांग्रेस का प्रचार नहीं करेंगे। लेकिन लगता नहीं है कि कांग्रेस दावेदारों के दबाव में आएगी और यदि ऐसा हुआ तो करैरा में तीनों जाटवों के बीच मुकाबला होगा और इस बार मुकाबला काफी रौचक होगा। क्योंकि इसमें पूर्व विधायक जसवंत जाटव के डेढ़ साल के कार्यकाल का भी मूल्यांकन भी होगा।