वर्चुअल रैली: ढाई साल बाद गुरू शिष्य सिंधिया और केपी यादव फिर एक साथ आए, जमकर की तारिफ / SHIVPURI NEWS

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शिवपुरी। राजनीति मेें अपने शिष्य गुना सांसद केपी यादव के साथ पूर्व केन्द्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ढ़ाई साल बाद फिर एक बार एक साथ मंच पर आए। मौका था अशोकनगर विधानसभा की वर्चुअल रैली का। जिसमें दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की तारीफ के कसीदे काढ़े। हालांकि मुंगावली और बमौरी की वर्चुअल रैली में सांसद केपी यादव शामिल नहीं हुए थे।

जिससे उन पर सवाल खड़े हो रहे थे। मूल रूप से मुंगावली के निवासी सांसद केपी यादव 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ब्रजेंद्र यादव से पराजित हो गए थे, जो अब प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री हैं। इसके बाद केपी यादव भाजपा में शामिल हो गए और उन्होंने गुना-शिवपुरी लोकसभा चुनाव में अपने राजनैतिक गुरू ज्योतिरादित्य ङ्क्षसंधिया को पराजित कर दिया था।

सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद सांसद यादव भाजपा की राजनीति में हासिये पर चल रहे थे। लेकिन अशोकनगर की वर्चुअल रैली में दोनों ने शिकबे शिकायतें बुलकर एक-दूसरे की तारीफ की। सिंधिया ने कहा कि केपी भी मुस्कुरा रहे हैं। इनका मेरे साथ बहुत अच्छा अनुभव है।

15 साल हमने साथ-साथ काम किया है। पहले भी हम एक थे और आज भी एक हैं। बीच में जो कुछ भी हुआ हो। हम अब साथ में लडेंगे और हर संकट का सामना करेंगे। उस दौरान सांसद केपी यादव लगातार मुस्कुरा रहे थे और हाथ जोड़कर सिंधिया का अभिवादन कर रहे थे। वहीं सांसद केपी यादव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ अपने पुराने संबंध को याद करते हुए कहा कि लंबे समय तक उनके साथ काम करने का अनुभव रहा है और आगे भी वह सिंधिया के मार्गदर्शन में काम करते रहेंगे।

गुना सांसद केपी यादव 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट न मिलने के कारण भाजपा में शामिल हो गए थे। श्री यादव सिंधिया के खास विश्वासपात्र हुआ करते थे। केपी यादव मुंगावली जिला पंचायत में सांसद ङ्क्षसंधिया के सांसद प्रतिनिधि थे। विधानसभा चुनाव में केपी यादव भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े लेकिन सिंधिया के प्रत्याशी ब्रजेंद्र सिंह यादव से वह चुनाव नहीं जीत सके और पराजित हो गए।

इसके बाद केपी यादव ने सिंधिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में केपी यादव को गुना-शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र से पार्टी का उम्मीदवार बनाया। लोकसभा चुनाव मेें केपी यादव ने सिंधिया को 1 लाख 30 हजार मतों से आश्चर्यजनक रूप से पराजित कर दिया। लेकिन सांसद सिंधिया की भाजपा में एंट्री होने के बाद केपी यादव की राजनैतिक ताकत कमजोर मानी जा रही थी।

सांसद सिंधिया ने जब केपी यादव के विरोधी विधायक ब्रजेंद्र यादव को राज्यमंत्री भाजपा सरकार में बनवाया तो इससे सिंधिया की भाजपा में ताकत का एहसास केपी यादव को हुआ और इसे केपी यादव को कमजोर करने का दांव भी माना गया। सोमवार को भाजपा की मुंगावली और बमोरी में वर्चुअल रैली में केपी यादव नहीं जुड़े और यह कहा गया कि उन्हें वर्चुअल रैली की लिंक ही नहीं भेजी गई। इससे तमाम सवाल उठे।

लेकिन मंगलवार को अशोकनगर की वर्चुअल रैली में केपी यादव ने शामिल होकर तमाम सवालों का खुद व खुद उत्तर दे दिया और सिंधिया ने उनकी तरफ मित्रता का हाथ बढ़ाया। सिंधिया ने कोरोना संकट के दौरान केपी यादव के कार्यो को सराहा। केपी यादव ने भी सिंधिया के साथ अपने पुराने संबंधों को याद किया।