उपचुनाव में होगी ज्योतिरादित्य सिंधिया की अग्निपरिक्षा / Shivpuri News

शिवपुरी। ग्वालियर चंबल संभाग की 16 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा दांव पर है। इन सभी सीटों पर नबंवर 2018 के विधानसभा चुनाव में जीते ऐदल सिंह कंसाना के अलावा सभी कांग्र्रेसी विधायक (अब 15 पूर्व और एक दिवंगत हैं) सिंधिया समर्थक हैं। जिनमें से जौरा विधायक स्व. बनवारीलाल शर्मा को छोड़कर सभी सिंधिया के साथ भाजपा में आए हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव में संभाग की 34 सीटों में से कांग्रेस ने 26 सीटों पर विजयश्री प्राप्त की थी। जबकि भाजपा को महज 7 सीटें ही मिली थी। एक सीट पर बसपा उम्मीदवार विजयी रहा था। ग्वालियर चंबल संभाग में कांग्रेस की इस शानदार विजय का श्रेय ज्योतिरादित्य सिंधिया के खाते में जोड़ा गया था।

मध्यप्रदेश में भाजपा 2003 से 2018 तक लगातार सत्ता में रही थी और 15 साल तक सत्ता का सुख भोगने के बाद 2018 में उसे सत्ता गंवानी पड़ी थी। भाजपा के सत्ता से बेदखल होने को सत्ता विरोधी लहर (एंटीइंकंवेंसी फैक्टर) का प्रभाव बताया गया था। हालांकि कांग्रेस और भाजपा की सीटों की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं था। भाजपा को जहां 107 सीटें मिली थी वहीं कांग्रेस के खाते में 114 सीटें आई थी।

लेकिन कांग्रेस का सर्वाधिक अच्छा प्रदर्शन ग्वालियर चंबल संभाग में रहा था। दोनों संभाग के 8 जिलों की 34 विधानसभा सीटों में से 2013 के विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा के 20 विधायक चुनकर आए थे। वहीं 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के विधायकों की संख्या घटकर महज 7 रह गई थी। जबकि कांग्रेस ने अपने विधायकों की संख्या 12 से बढ़ाकर 26 कर ली थी।

ग्वालियर चंबल संभाग में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन को एंटीइंकंबेंसी फैक्टर न बताकर यह प्रचारित किया गया कि यह सिंधिया के प्रभाव की जीत है। विधानसभा चुनाव में प्रदेश से जितने सिंधिया समर्थक विधायक जीतकर आए थे, उनमें अधिकांश ग्वालियर चंबल संभाग के ही हैं। सिंधिया समर्थक विधायकों में भितरवार सीट से जीते मंत्री लाखन सिंह यादव का नाम भी है।

हालांकि सिंधिया के भाजपा जाने के बाद वह उनके साथ भाजपा में नहीं आए और उन्होंने कांग्रेस में बने रहने का फैसला किया। इसके अलावा संभाग के बाहर सिंधिया समर्थक विधायकों में तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, प्रभूराम चौधरी, राजवर्धन सिंह ही सिंधिया समर्थक हैं। कांग्रेस से भाजपा में गए 22 विधायकों में से 18 सिंधिया समर्थक हैं।

इन कारणों से ग्वालियर-चंबल संभाग में कांग्रेस की जीत का श्रेय ज्योतिरादित्य सिंधिया के जनाधार और उनकी मेहनत को दिया जा सकता है। हालांकि कांग्रेसी इसे नहीं मानते और उनका कहना है कि पार्टी विधायकों को जीत सिंधिया के कारण नहीं बल्कि कांग्र्रेस के कारण मिली है। 16 सीटों के उपचुनाव में अब यहीं परीक्षा होनी है कि क्या 2018 की जीत सिंधिया के प्रभाव के बलबूते हांसिल की गई थी अथवा इसमें सिंधिया का कोई योगदान नहीं था और भाजपा सरकार के खिलाफ एंटीइंकंबेंसी फैक्टर का लाभ कांग्रेस को मिला था।

वर्तमान माहौल में सिंधिया आज अलग खैमे या दल में हैं और उनके समर्थन में इस्तीफा देने वाले विधायक भी अब कांग्रेस से नहीं बल्कि भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं। वह भाजपा में शामिल आवश्य हो गए हैं। लेकिन अभी भाजपा में उनकी स्वीकार्यता नहीं बन पाई है। पार्टी नेताओं से भी उनका अभी समन्वय नहीं बना है। एक विधायक ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस्तीफा देने वाले विधायक भले ही भाजपा में आ गए हैं।

लेकिन भाजपा के प्रति निष्ठावान पदाधिकारियेां और कार्यकर्ताओं से अभी भी उनकी दूरी बनी हुई है। इसकी पुष्टि करैरा के पूर्व विधायक जसवंत जाटव के कथन से भी होती है। वह उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार हैं। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि उपचुनाव में चेहरा सिंधिया होंगे या शिवराज सिंह चौहान, तो उनका जबाव था वेशक सिंधिया।

इससे सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों और भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं में गहरा अंतरविरोध खुलकर सामने आ रहा है और ऐसे में लगता नहीं है कि निष्ठावान कार्यकर्ता उस ऊर्जा के साथ उपचुनाव में काम करेगा। जिसकी उससे अपेक्षा है। ऐसी स्थिति में पूरा दारोमदार ज्योतिरादित्य सिंधिया पर है और उपचुनाव के परिणाम उनके जनाधार की परीक्षा करेंगे और इससे ही उनका आगे का राजनैतिक भविष्य तय होगा।

इन 16 सीटों पर होगा उपचुनाव

ग्वालियर चंबल संभाग की जिन 16 सीटों पर उपचुनाव हो रहा है, उनके नाम हैं- मुरैना, दिमनी, अंबाह, सुमावली, जौरा, डबरा, भांडेर, ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, करैरा, पोहरी, बमौरी, अशोकनगर, मुंगावली, मेहगांव और गोहद। इनमें मुरैना जिले की पांच विधानसभा सीटें ग्वालियर जिले की चार, शिवपुरी जिले की दो, भिंड जिले की दो, गुना और अशोकनगर जिले की तीन विधानसभा सीटें शामिल हैं।